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नरेंद्र सिंह तोमर: कुशल रणनीति के दम पर पहले पार्टी और फिर देश की राजनीति में बनाई धाक

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Nilesh Kumar Updated Thu, 30 May 2019 07:20 PM IST
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Narendra Singh Tomar cabinet minister of Modi Government political career status and profile
Narendra Singh Tomar - फोटो : Amar Ujala
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नरेंद्र सिंह तोमर, मध्यप्रदेश की राजनीति में काफी तेजी से उभरा ऐसा नाम, जिसने देखते ही देखते केंद्र की राजनीति में अपना कद इतना मजबूत कर लिया कि विरोधियों के लिए उन्हें नजरअंदाज कर पाना लगभग नामुमकिन सा हो गया। 

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तोमर ने इस बार मुरैना लोकसभा सीट से कांग्रेस के रामनिवास रावत को 1.13 लाख वोटों से हराया। पिछली बार उन्होंने सिंधिया राजघराने के प्रभाव वाली सीट से जीत का परचम लहराया था और मोदी सरकार में मंत्री बने थे। वह ग्रामीण विकास मंत्रालय, पंचायती राज मंत्रालय, खनन मंत्रालय और संसदीय कार्य मंत्रालय का प्रभार संभाल रहे थे। 
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12 जून 1957 को ग्वालियर में किसान परिवार मुंशी सिंह तोमर और शारदा देवी के बेटे के रूप में जन्मे नरेंद्र भाजपा के महत्वपूर्ण रणनीतिकार माने जाते हैं। भारतीय जनता युवा मोर्चा से राजनीतिक करियर की शुरुआत करने वाले तोमर 1998 और 2003 में विधान सभा के लिए निर्वाचित हुए और केंद्र की राजनीति में आने से पहले भाजपा प्रदेश अध्यक्ष के रूप में पार्टी को कई बार जीत दिलाने में अहम भूमिका अदा की। मध्यप्रदेश के चंबल से आने वाले तोमर मोदी सरकार-एक में भी कैबिनेट का हिस्सा रहे और पीएम मोदी ने एक बार फिर इन पर भरोसा जताया। 

छात्र राजनीति से शुरुआत, पार्टी में बनाई धाक

तोमर ने छात्र जीवन से ही राजनीति में अपनी धाक बनानी शुरू कर दी थी। 1979-80 में कॉलेज के दिनों में ही वह मुरार गवर्मेंट कॉलेज में छात्र संगठन के अध्यक्ष बने थे। इसके बाद ग्वालियर में ही वह साल 1980 में भारतीय जनता पार्टी यूथ फोरम यानि कि भाजयुमो के अध्यक्ष बने और 1984 तक पद पर रहे। इसी बीच वह ग्वालियर नगर निगम के पार्षद निर्वाचित हुए और फिर भाजपा यूथ फोरम के प्रदेश मंत्री भी बना दिए गए।

उनका शुरुआती राजनीतिक जीवन भाजपा के यूथ फोरम में ही गुजरा। साल 1986 से 1990 तक वह भाजयुमो के प्रदेश अध्यक्ष रहे और यूथ और सांस्कृतिक गतिविधियों में बढ़-चढ़ कर हिस्सा लिया। विधायक के तौर पर निर्वाचित होने के बाद साल 2003 से 2007 तक नरेंद्र सिंह मध्य प्रदेश में कैबिनेट मंत्री रहे, जबकि जनवरी 2007 से मार्च 2009 तक वह राज्यसभा सांसद रहे।

2009 में हुए लोकसभा चुनाव में मुरैना से जीत हासिल करके तोमर लोकसभा पहुंचे। नरेंद्र सिंह ने 2014 में सिंधिया राजघराने के प्रभाव वाली सीट से जीत का परचम लहराया और मोदी सरकार में मंत्री बने। 

वाजपेयी के भांजे थे सांसद, टिकट काट कर तोमर को दिया

2014 लोकसभा चुनाव में मुरैना सीट से अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा ने 1.23 लाख वोटों से जीत हासिल की थी और सांसद बने थे। 2019 लोकसभा चुनाव में वह मैदान से बाहर कर दिए गए। भाजपा ने इस बार अटल बिहारी वाजपेयी के भांजे अनूप मिश्रा का टिकट का काटकर 2014 में तोमर को मैदान में उतारा था। इस बार यहां मुख्य मुकाबला भाजपा के नरेंद्र सिंह तोमर और कांग्रेस के रामनिवास रावत के बीच था। तोमर ने कड़ी चुनावी जंग में कांग्रेस के रामनिवास रावत को शिकस्त दी। 

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