स्पेस कंपनियों के लिए नए नियम: IN-SPACe ने जारी किए नए दिशा-निर्देश, री-एंट्री से पहले लेनी होगी अनुमति
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भारतीय राष्ट्रीय अंतरिक्ष संवर्धन और प्राधिकरण केंद्र (आईएन-स्पेस) ने एक नए दिशानिर्देशों जारी किया है। इसमें कहा है कि निजी अंतरिक्ष कंपनियों को किसी भी स्पेस ऑब्जेक्ट की री-एंट्री के दौरान जान-माल के नुकसान के जोखिम को 10,000 में से 1 से कम रखना होगा।
क्या है नया नियम?
IN-SPACe, जो प्राइवेट कंपनियों की ओर से स्पेस सेक्टर की सभी गतिविधियों के लिए सिंगल-विंडो एजेंसी है। इसने यह भी अनिवार्य कर दिया है कि किसी भी भारतीय कंपनी को किसी स्पेस ऑब्जेक्ट की री-एंट्री (चाहे वह भारतीय क्षेत्र के अंदर हो या बाहर) की योजना बनाने के लिए उसकी मंजूरी लेनी होगी।
नए दिशानिर्देश में कब जारी होगा?
भारतीय अंतरिक्ष नीति-2023 के तहत स्पेस ऑब्जेक्ट्स की योजनाबद्ध री-एंट्री (वापसी) के लिए मंज़ूरी से जुड़े नियम, गाइडलाइंस और प्रक्रियाएं' वाली नई गाइडलाइंस 23 जुलाई को जारी की गईं और बुधवार को सार्वजनिक की गईं।
नई गाइडलाइंस में कहा गया है, 'जो गैर-भारतीय संस्थाएं अपने स्पेस ऑब्जेक्ट की भारतीय क्षेत्र में 'प्लान्ड री-एंट्री' (योजनाबद्ध तरीके से दोबारा प्रवेश) करना चाहती हैं। उन्हें IN-SPACe से मंज़ूरी सिर्फ भारत में रजिस्टर्ड संस्थाओं के जरिए ही लेनी होगी।'
क्या सरकार की कोई जवाबदेही है?
इसमें कहा गया है कि कंपनियों को अपनी जिम्मेदारी और जोखिम पर ही री-एंट्री (वापसी) से जुड़ी गतिविधियां करनी होंगी और वे भारतीय सरकार पर कोई भी देनदारी नहीं डाल सकतीं। इसलिए, अगर IN-SPACe मंज़ूरी देते समय जरूरी समझे या इसकी मांग करे, तो कंपनियों को ऐसे सभी जोखिमों और संभावित स्थितियों से निपटने के लिए पर्याप्त बीमा (जिसमें अनिवार्य थर्ड-पार्टी लायबिलिटी इंश्योरेंस भी शामिल हो) लेना चाहिए।
इसमें यह भी कहा गया है कि अगर अंतरिक्ष यान में सुरक्षित वापसी की योजना है, तो कंपनियों को प्राधिकरण प्राप्त करते समय सुरक्षित वापसी करने के अपने इरादे की स्पष्ट रूप से घोषणा करनी होगी। इसमें कहा गया है कि अगर कोई कंपनी बिना पूर्व सूचना दिए प्रक्षेपण के बाद पुनः पृथ्वी के वायुमंडल में प्रवेश करने का निर्णय लेती है, तो उसे युद्धाभ्यास से छह महीने पहले प्राधिकरण के लिए आवेदन करना होगा।