NEET Paper Leak: पेपर नहीं हुआ था लीक, सवाल किए गए थे याद; CBI की चार्जशीट में और कौन-कौन से हुए खुलासे?
सूत्रों ने बताया कि नीट परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने और उनका अनुवाद करने की प्रक्रिया में एक ही तरह के लोगों की भागीदारी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुई गड़बड़ी की प्रमुख वजहों में से एक रही। साथ ही NTA को परीक्षा प्रणाली में सुधार के लिए महत्वपूर्ण सुझाव भी दिए गए हैं।
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नीट परीक्षा में हुई गड़बड़ी को लेकर CBI की जांच में चौंकाने वाले खुलासे सामने आए हैं। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस बार पारंपरिक तरीके से पेपर लीक नहीं हुआ, बल्कि प्रश्नपत्र तैयार करने और उसका अनुवाद करने की जिम्मेदारी संभाल रहे तीन विशेषज्ञों ने कथित तौर पर अंतिम सवाल याद कर उन्हें अपने ट्यूशन के चुनिंदा छात्रों तक पहुंचाया। बाद में यही सवाल बिचौलियों के जरिए लाखों रुपये लेकर कई राज्यों में बेचे गए। मामले में CBI ने 13 आरोपियों को गिरफ्तार कर चार्जशीट दाखिल कर दी है, जबकि NTA की परीक्षा प्रणाली में भी एक बड़ी खामी की ओर इशारा किया गया है।
सवाल तैयार करने और अनुवाद में क्या थी बड़ी चूक?
सूत्रों ने बताया कि नीट परीक्षा के लिए प्रश्नपत्र तैयार करने और उनका अनुवाद करने की प्रक्रिया में एक ही तरह के लोगों की भागीदारी मेडिकल प्रवेश परीक्षा में हुई गड़बड़ी की प्रमुख वजहों में से एक रही। CBI ने अनौपचारिक रूप से इस कमी की जानकारी नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) को दे दी है और संभावना है कि इसे अपनी औपचारिक सिफारिशों में भी शामिल करेगी।
2024 और 2026 की गड़बड़ियों में क्या अंतर था?
प्रक्रिया से जुड़े अधिकारियों के मुताबिक, NEET-UG 2026 में सामने आई गड़बड़ियां 2024 की घटनाओं से पूरी तरह अलग थीं। वर्ष 2024 में एक परीक्षा केंद्र प्रभारी पर कथित तौर पर पेपर लीक गिरोह के साथ मिलकर प्रश्नपत्र की चोरी और उसे फैलाने में मदद करने का आरोप था।
2024 के बाद NTA ने कौन-कौन से सुधार किए थे?
अधिकारियों ने बताया कि 2024 की जांच के बाद CBI ने NTA को प्रश्नपत्र के परिवहन, उसकी सुरक्षा, हैंडलिंग और परीक्षा संचालन से जुड़े कई संस्थागत सुधारों की सिफारिश की थी। NTA ने 2025 और 2026 की परीक्षाओं में इन सुझावों को लागू भी किया। इसी वजह से तकनीकी रूप से इस बार पारंपरिक अर्थों में कोई 'पेपर लीक' नहीं हुआ।
तीन शिक्षकों ने कथित तौर पर कैसे याद किए अंतिम सवाल?
सूत्रों के अनुसार, NTA पैनल के जिन विशेषज्ञों को प्रश्न तैयार करने और मराठी में उनका अनुवाद करने की जिम्मेदारी दी गई थी, उनमें केमिस्ट्री शिक्षक पी.वी. कुलकर्णी, फिजिक्स शिक्षिका मनीषा गुरुनाथ मंधारे और बायोलॉजी शिक्षिका मनीषा संजय हवलदार शामिल थे। आरोप है कि इन तीनों ने अंतिम प्रश्नपत्र के सवाल याद कर लिए और बाद में पुणे स्थित अपनी ट्यूशन क्लास में पढ़ने वाले चुनिंदा छात्रों के साथ उन्हें साझा किया।
आरोपियों को अंतिम प्रश्नपत्र तक कितना समय मिला?
जांच से जुड़े सूत्रों का कहना है कि ये शिक्षक प्रश्नपत्र तैयार करने और अनुवाद की प्रक्रिया में शामिल थे। 3 मई को आयोजित परीक्षा से पहले उन्हें अंतिम प्रश्नपत्र के साथ कथित तौर पर 'काफी समय' मिला था।
CBI जांच में क्या सामने आया?
CBI की जांच में पाया गया कि पूरी प्रक्रिया कई दिनों तक चली। इस दौरान संबंधित शिक्षकों को सुरक्षित वातावरण में रखा गया था, लेकिन उन्हें घर जाने, ट्यूशन पढ़ाने और अगले दिन फिर अपनी ड्यूटी पर लौटने की अनुमति थी।
सवाल छात्रों तक कैसे पहुंचे?
जांच एजेंसी के अनुसार, शिक्षकों ने अंतिम प्रश्नपत्र से सवाल याद किए, घर लौटने के बाद उनका एक प्रश्न बैंक तैयार किया और उसे अपने ट्यूशन के चुनिंदा छात्रों को 'बहुत महत्वपूर्ण प्रश्न' बताकर उपलब्ध कराया। हालांकि उन्होंने यह संकेत नहीं दिया कि ये प्रश्न आगामी NEET परीक्षा के वास्तविक प्रश्नपत्र का हिस्सा हैं।
ब्यूटीशियन और बिचौलियों की भूमिका क्या रही?
CBI का आरोप है कि मनीषा वाघमारे नाम की एक स्थानीय ब्यूटीशियन, जो इन शिक्षकों को जानती थी, ने ट्यूशन पढ़ने वाले कुछ छात्रों से ये प्रश्न हासिल किए। उसने उन्हें प्रश्नपत्र के प्रारूप में टाइप किया और धनंजय निवृत्ति लोखंडे को बेच दिया। इसके बाद लोखंडे ने यह सामग्री अन्य बिचौलियों तक पहुंचाई, जिन्होंने कथित तौर पर कई राज्यों में इसे फैलाया।
क्या वाघमारे की भूमिका सबसे अहम थी?
सूत्रों का कहना है कि यदि मनीषा वाघमारे इस साजिश में शामिल नहीं होतीं, तो कथित प्रश्नपत्र इतने बड़े स्तर पर उम्मीदवारों तक नहीं पहुंचता और संभवतः यह पूरा मामला कभी उजागर भी नहीं होता। सूत्रों के मुताबिक, धनंजय लोखंडे के जरिए लाखों रुपये लेकर यह कथित प्रश्नपत्र कई लोगों तक पहुंचाया गया।
NTA को पूरे मामले की जानकारी कैसे मिली?
बताया गया कि यही कथित प्रश्नपत्र एक अभ्यर्थी तक भी पहुंचा। उसने इसकी जानकारी NTA को दी, जिसके बाद एजेंसी ने 12 मई को NEET-UG 2026 परीक्षा रद्द करने का फैसला लिया।
CBI जांच कब शुरू हुई और क्या कार्रवाई हुई?
सूत्रों के अनुसार, शिक्षा मंत्रालय ने पूरे मामले की जांच CBI को सौंपी। एजेंसी ने तेजी से कार्रवाई करते हुए कुछ ही दिनों में मामले का खुलासा किया और 13 लोगों को गिरफ्तार कर लिया। इनमें तीन लेक्चरर, मनीषा वाघमारे, कोचिंग सेंटर से जुड़े लोग और कई बिचौलिए शामिल हैं।
चार्जशीट में किन लोगों के नाम शामिल हैं?
करीब दो महीने के भीतर CBI ने पूरी साजिश का खुलासा करते हुए स्थानीय विशेष अदालत में 13 आरोपियों के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की। इनमें पी.वी. कुलकर्णी, मनीषा संजय हवलदार, मनीषा गुरुनाथ मंधारे, मनीषा वाघमारे और धनंजय निवृत्ति लोखंडे समेत अन्य आरोपी शामिल हैं।
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CBI ने अपने आधिकारिक बयान में क्या कहा?
CBI ने मंगलवार को जारी बयान में कहा,'इस मामले में कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है, जिनमें केमिस्ट्री, बायोलॉजी और फिजिक्स के तीन NTA विषय विशेषज्ञ शामिल हैं। लीक हुए प्रश्न हासिल करने और उन्हें विभिन्न लोगों तक पहुंचाने वाले कई बिचौलियों की भी पहचान कर उन्हें गिरफ्तार किया गया है। ऊपर बताए गए विशेषज्ञों से कथित तौर पर लीक हुए प्रश्नपत्र हासिल करने के आरोप में कोचिंग संस्थान से जुड़े दो लोगों को भी गिरफ्तार किया गया है। पैसों के लेन-देन की भी जांच की गई है। आरोपियों के कई बैंक खाते, बैंक लॉकर और एक डीमैट खाता फ्रीज कर दिया गया है।'