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NIA: उत्तर प्रदेश की राजधानी सहित कई शहरों को दहलाने की रची थी साजिश, तीन आरोपियों को आजीवन कारावास की सजा

डिजिटल ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली। Published by: Sandhya Kumari Updated Tue, 14 Apr 2026 03:15 PM IST
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सार

एनआईए अदालत ने यूपी में अल-कायदा साजिश के तीन दोषियों को 5 साल से उम्रकैद तक सजा और जुर्माना दिया। वे 2021 में आतंकी हमलों की योजना बना रहे थे।

NIA Three Convicted in Al-Qaeda-Linked Terror Conspiracy in UP Sentences Include Life Imprisonment
एनआईए - फोटो : एएनआई
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विस्तार

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की लखनऊ विशेष अदालत ने 2021 के अल-कायदा से जुड़े कट्टरपंथीकरण और भर्ती मामले में तीन आरोपियों को सजा सुनाई है। तीनों आरोपियों की पहचान लखनऊ (उत्तर प्रदेश) के मुसीरुद्दीन उर्फ राजू और मिन्हाज अहमद उर्फ मिन्हाज तथा जम्मू-कश्मीर के बुडगाम जिले के तौहीद अहमद शाह उर्फ सोबू शाह के रूप में हुई है। तीनों को आईपीसी, असांवैधानिक पदार्थ अधिनियम, विस्फोटक पदार्थ अधिनियम और शस्त्र अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत दोषी ठहराया गया है। विशेष अदालत ने इन आरोपियों को पांच साल के कठोर कारावास से लेकर आजीवन कारावास तक की अलग-अलग सजाएं सुनाईं। सभी सजाएं साथ-साथ चलेंगी। इन आरोपियों पर 20 हजार रुपये तक का जुर्माना भी लगाया गया है।

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एनआईए के अनुसार, तीन अन्य आरोपी, शकील, मोहम्मद मुस्तकीम और मोहम्मद मोईद (सभी लखनऊ निवासी), इस मामले में पहले ही शस्त्र अधिनियम के तहत दोषी ठहराए जा चुके हैं। वजह, उन्होंने अपना जुर्म कबूल कर लिया था। एनआईए ने 2022 में दो आरोपपत्रों के माध्यम से इस मामले में सभी छह दोषी आरोपियों के खिलाफ आरोप दायर किए थे। यह मामला मूल रूप से उत्तर प्रदेश पुलिस द्वारा जुलाई 2021 में उत्तर प्रदेश एटीएस द्वारा प्रतिबंधित अल-कायदा आतंकवादी संगठन के सदस्य मुशीरुद्दीन और मिन्हाज की गिरफ्तारी के बाद दर्ज किया गया था।
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दोनों आरोपियों को लखनऊ में अक़ीस (अल-कायदा इन इंडियन सबकॉन्टिनेंट) के मॉड्यूल के रूप में अंसार गजवतुल हिंद (एजीएच) की स्थापना के लिए कमजोर युवाओं के कट्टरपंथीकरण और भर्ती में शामिल पाया गया था। इस साजिश का उद्देश्य 2021 में स्वतंत्रता दिवस समारोह से पहले राजधानी सहित उत्तर प्रदेश के विभिन्न शहरों में आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देना था। एनआईए ने मामले की जांच के दौरान पाया कि मिन्हाज को तौहीद और एक अन्य आरोपी आदिल नबी तेली उर्फ मूसा ने कट्टरपंथी बनाया था। इन तीनों ने मिलकर प्रतिबंधित एजीएच के लिए आतंकवादी कृत्यों को अंजाम देने के लिए सदस्यों की भर्ती की साजिश रची थी।

आतंकवाद-विरोधी एजेंसी की जांच में यह भी पता चला है कि मुसीरुद्दीन को भी मिन्हाज ने साजिश में शामिल किया था। उसने मिन्हाज के कहने पर बैयत (निष्ठा की शपथ) भी ली थी। इसके बाद, मुसीरुद्दीन और मिन्हाज ने शकील, मुस्तकीम और मोईद की मदद से हथियार, गोला-बारूद और विस्फोटक सामग्री जुटाई थी। यह सब भारत सरकार के खिलाफ युद्ध छेड़ने की आतंकी साजिश का हिस्सा था। जांच के दौरान मूसा को प्रतिबंधित लश्कर-ए-तैबा (एलईटी) आतंकी संगठन के विस्तारित संगठन टीआरएफ से संबद्ध घोषित आतंकवादी पाया गया। जांच में पता चला कि मूसा को तौहीद के माध्यम से मिन्हाज से धनराशि प्राप्त हुई थी। मार्च 2022 में सुरक्षा बलों के साथ मुठभेड़ में मूसा मारा गया। एनआईए ने अगस्त 2022 में उसके खिलाफ संशोधित आरोपपत्र दाखिल किया था।

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