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ED: फर्जी पुलिस क्लीयरेंस से चल रहा था 25 लोगों की जान लेने वाला नाइट क्लब, ईडी ने जब्त की 17 करोड़ की संपत्ति

डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Asmita Tripathi Updated Wed, 08 Apr 2026 05:26 PM IST
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सार

गोवा का वह नाइट क्लब, जिसमें 25 लोग मारे गए थे, वहां फायर सेफ्टी विभाग की एनओसी नहीं थी। क्लब, फर्जी पुलिस क्लीयरेंस पर चल रहा था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने गोवा के अरपोरा स्थित 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइट क्लब के अवैध संचालन से संबंधित जांच के सिलसिले में 17.45 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया है

Night club that killed 25 people was operating with fake police clearance; ED seizes assets worth Rs 17 crore
ED - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार

गोवा का वह नाइट क्लब, जिसमें 25 लोग मारे गए थे, वहां फायर सेफ्टी विभाग की एनओसी नहीं थी। क्लब, फर्जी पुलिस क्लीयरेंस पर चल रहा था। प्रवर्तन निदेशालय (ईडी), पणजी क्षेत्रीय कार्यालय ने गोवा के अरपोरा स्थित 'बर्च बाय रोमियो लेन' नाइट क्लब के अवैध संचालन से संबंधित जांच के सिलसिले में 17.45 करोड़ रुपये की अचल संपत्तियों को अस्थायी रूप से जब्त कर लिया गया है। यह कार्रवाई धन शोधन निवारण अधिनियम (पीएमएलए), 2002 के प्रावधानों के तहत की गई है। 

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ईडी ने क्लब संचालक सौरभ लूथरा और अन्य के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता, 2023 के विभिन्न प्रावधानों के तहत अंजुना पुलिस स्टेशन और मापुसा पुलिस स्टेशन में दर्ज एफआईआर के आधार पर इस मामले की जांच शुरू की थी। उक्त एफआईआर न केवल 06.12.2025 के दुखद अग्निकांड से संबंधित हैं, जिसमें 25 लोगों की जान चली गई और कई लोग घायल हो गए, बल्कि नियामक अनुमोदन प्राप्त करने के उद्देश्य से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) सहित वैधानिक दस्तावेजों की बड़े पैमाने पर जालसाजी और हेराफेरी से संबंधित अपराधों से भी संबंधित हैं।
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पीएमएलए के तहत की गई जांच में पता चला है कि मेसर्स बीइंग जीएस हॉस्पिटैलिटी गोवा अरपोरा एलएलपी द्वारा अनिवार्य वैधानिक स्वीकृतियों, जिनमें आवश्यक अग्नि सुरक्षा एनओसी भी शामिल है, के बिना क्लब का संचालन किया जा रहा था। यह भी सामने आया है कि उक्त संस्था के साझेदारों ने लाइसेंस प्राप्त करने और प्रतिष्ठान को कानूनी रूप से अनुपालन करने वाला दिखाने के लिए विभिन्न अधिकारियों को फर्जी स्वास्थ्य एनओसी और फर्जी पुलिस क्लीयरेंस सर्टिफिकेट जैसे जाली और मनगढ़ंत दस्तावेज प्रस्तुत किए थे।

ईडी के अनुसार, साझेदारों ने आपस में मिलीभगत करके अनिवार्य लाइसेंसों की अनुपस्थिति और समाप्ति के बावजूद प्रतिष्ठान का व्यावसायिक संचालन जानबूझकर जारी रखा। गौरतलब है कि व्यापार लाइसेंस 31.03.2024 को समाप्त हो गया था। इसका नवीनीकरण नहीं किया गया। इसके बावजूद कलब, वैधानिक आवश्यकताओं का घोर उल्लंघन करते हुए संचालित होता रहा। जांच में यह भी पता चला है कि प्रतिष्ठान ने लगभग 2 करोड़ रुपये का कुल राजस्व अर्जित किया। वित्तीय वर्ष 2023-24 से वित्तीय वर्ष 2025-26 (06.12.2025 तक) की अवधि के दौरान अवैध संचालन के माध्यम से 29.78 करोड़ रुपये की आय अर्जित की गई है, जिसे पीएमएलए, 2002 की धारा 2(1)(यू) के तहत "अपराध की आय" के रूप में पहचाना गया है। 

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