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डाक मतपत्र पर चुनाव आयोग का पहरा: बदले गए कई नियम, अब बिना CCTV के नहीं होगा मतदान
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, कोलकाता
Published by: राकेश कुमार
Updated Wed, 08 Apr 2026 06:53 PM IST
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सार
चुनाव आयोग ने पोस्टल बैलट, यानी डाक मतपत्र के जरिए होने वाली वोटिंग को और सुरक्षित बनाने के लिए नए नियम लागू किए हैं। अब चुनावी ड्यूटी पर तैनात कर्मियों को केवल सीसीटीवी कैमरों की निगरानी और केंद्रीय बलों की सुरक्षा में ही मतदान करना होगा। इसके साथ ही प्रतिदिन तस्वीरों की जांच अनिवार्य कर दी गई है।
भारतीय चुनाव आयोग
- फोटो : IANS
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विस्तार
आगामी विधानसभा चुनावों में धांधली की गुंजाइश को खत्म करने के लिए चुनाव आयोग (ईसी) ने कमर कस ली है। आयोग ने पोस्टल बैलट यानी, डाक मतपत्र के जरिए होने वाले मतदान के लिए दिशा-निर्देश जारी किए हैं। अब चुनावी ड्यूटी पर तैनात कर्मचारी और अनिवार्य सेवाओं से जुड़े मतदाता केवल कैमरे की निगरानी में ही अपना वोट डाल सकेंगे।
फैसिलिटेशन सेंटर्स पर होगी अभेद्य सुरक्षा
चुनाव आयोग की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र के अनुसार, अब सभी 'फैसिलिटेशन सेंटर' (एफसी) और 'पोस्टल वोटिंग सेंटर' (पीवीसी) पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार पर फोर्स तैनात रहेगी, जिससे अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को पूरी तरह रोका जा सके।
चप्पे-चप्पे पर होगी नजर
प्रक्रिया को और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए चुनाव आयोग ने कई प्रशासनिक बदलाव किए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, प्रत्येक मतदान केंद्र के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि कैमरे इस तरह लगाए जाएंगे कि मतदान की गोपनीयता भंग न हो। जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) इन सेंटर्स की लाइव फीड देखेंगे।
इसके अलावा, हर बूथ पर कम से कम एक 'ग्रुप बी' स्तर के अधिकारी को माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया जाएगा। सामान्य पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे मतदान के दिन कम से कम तीन बार इन केंद्रों का दौरा करें। इतना ही नहीं, मतदान केंद्र में मोबाइल ले जाने पर सख्त पाबंदी रहेगी, जिसकी निगरानी खुद पर्यवेक्षक करेंगे।
यह भी पढ़ें: दोस्ती पड़ी भारी: युद्ध में ईरान की मदद करने वालों की आई शामत, अमेरिका ने तत्काल प्रभाव से लगाया 50% टैरिफ
नियम 18ए का कड़ाई से पालन
चुनाव आयोग ने 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 18ए का हवाला देते हुए कहा कि चुनावी ड्यूटी पर तैनात मतदाता केवल रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से निर्धारित 'फैसिलिटेशन सेंटर' पर ही अपना वोट रिकॉर्ड जमा कर सकेंगे। वे किसी अन्य तरीके से मतदान नहीं कर पाएंगे। प्रशिक्षण केंद्रों और रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालयों में ये केंद्र विशेष रूप से इसलिए बनाए जा रहे हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया एक ही जगह पर पारदर्शी तरीके से पूरी हो।
दिन के अंत में होगी तस्वीरों की जांच
हर दिन मतदान खत्म होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर और सामान्य पर्यवेक्षक सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की जांच करेंगे। यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आयोग का मानना है कि इन कदमों से डाक मतपत्र यानी पोस्टल बैलट के साथ होने वाली संभावित छेड़छाड़ या दबाव की शिकायतों पर लगाम लगेगी।
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फैसिलिटेशन सेंटर्स पर होगी अभेद्य सुरक्षा
चुनाव आयोग की ओर से राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के मुख्य निर्वाचन अधिकारियों को भेजे गए पत्र के अनुसार, अब सभी 'फैसिलिटेशन सेंटर' (एफसी) और 'पोस्टल वोटिंग सेंटर' (पीवीसी) पर केंद्रीय सशस्त्र पुलिस बलों की तैनाती अनिवार्य कर दी गई है। इसके अलावा, मतदान केंद्र के प्रवेश द्वार पर फोर्स तैनात रहेगी, जिससे अनाधिकृत व्यक्तियों के प्रवेश को पूरी तरह रोका जा सके।
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चप्पे-चप्पे पर होगी नजर
प्रक्रिया को और अधिक विश्वसनीय बनाने के लिए चुनाव आयोग ने कई प्रशासनिक बदलाव किए हैं। चुनाव आयोग के मुताबिक, प्रत्येक मतदान केंद्र के अंदर सीसीटीवी कैमरे लगाए जाएंगे। हालांकि, आयोग ने स्पष्ट किया है कि कैमरे इस तरह लगाए जाएंगे कि मतदान की गोपनीयता भंग न हो। जिला निर्वाचन अधिकारी (डीईओ) इन सेंटर्स की लाइव फीड देखेंगे।
इसके अलावा, हर बूथ पर कम से कम एक 'ग्रुप बी' स्तर के अधिकारी को माइक्रो ऑब्जर्वर के रूप में तैनात किया जाएगा। सामान्य पर्यवेक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे मतदान के दिन कम से कम तीन बार इन केंद्रों का दौरा करें। इतना ही नहीं, मतदान केंद्र में मोबाइल ले जाने पर सख्त पाबंदी रहेगी, जिसकी निगरानी खुद पर्यवेक्षक करेंगे।
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नियम 18ए का कड़ाई से पालन
चुनाव आयोग ने 'चुनाव संचालन नियम, 1961' के नियम 18ए का हवाला देते हुए कहा कि चुनावी ड्यूटी पर तैनात मतदाता केवल रिटर्निंग ऑफिसर की ओर से निर्धारित 'फैसिलिटेशन सेंटर' पर ही अपना वोट रिकॉर्ड जमा कर सकेंगे। वे किसी अन्य तरीके से मतदान नहीं कर पाएंगे। प्रशिक्षण केंद्रों और रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालयों में ये केंद्र विशेष रूप से इसलिए बनाए जा रहे हैं, जिससे पूरी प्रक्रिया एक ही जगह पर पारदर्शी तरीके से पूरी हो।
दिन के अंत में होगी तस्वीरों की जांच
हर दिन मतदान खत्म होने के बाद रिटर्निंग ऑफिसर और सामान्य पर्यवेक्षक सीसीटीवी फुटेज और दस्तावेजों की जांच करेंगे। यदि किसी भी प्रकार की गड़बड़ी पाई जाती है, तो तत्काल कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं। आयोग का मानना है कि इन कदमों से डाक मतपत्र यानी पोस्टल बैलट के साथ होने वाली संभावित छेड़छाड़ या दबाव की शिकायतों पर लगाम लगेगी।
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