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Digital Arrest Scam: 23 करोड़ रुपये की ठगी के मामले में CBI ने दाखिल की चार्जशीट, ऐसे खुला साइबर फ्रॉड का खेल
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: Himanshu Singh Chandel
Updated Fri, 10 Apr 2026 03:55 PM IST
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सार
दिल्ली के एक रिटायर्ड बैंकर को डिजिटल अरेस्ट स्कैम के जरिए करीब 23 करोड़ रुपये की ठगी का शिकार बनाया गया था। ठगों ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर डराया। एक महीने तक मानसिक कैद में रखा। इसी मामले में सीबीआई ने सिलिगुड़ी के आरोपी साग्निक रॉय और उसकी कंपनी के खिलाफ चार्जशीट दाखिल की है।
CBI
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
डिजिटल अरेस्ट स्कैम के नाम पर देश में तेजी से साइबर ठगी बढ़ रही है। ऐसा ही एक बड़ा मामला हाल ही में सामने आया था। इसमें एक रिटायर्ड बैंकर को डर और धोखे के जाल में फंसाकर करीब 23 करोड़ रुपये ठग लिए गए। इस मामले में केंद्रीय जांच ब्यूरो (सीबीआई) ने अब सिलिगुड़ी के एक व्यक्ति के खिलाफ चार्जशीट दाखिल कर दी।
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दरअसल, सीबीआई ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर 15 मार्च को इस केस की जांच अपने हाथ में ली थी। जांच के दौरान पता चला कि सिलिगुड़ी निवासी साग्निक रॉय और उसकी कंपनी के बैंक खाते का इस्तेमाल ठगी की रकम लेने के लिए किया गया था। इससे पहले इस मामले की जांच दिल्ली पुलिस कर रही थी और आरोपी को गिरफ्तार भी किया जा चुका है।
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क्या है डिजिटल अरेस्ट स्कैम और कैसे हुआ शिकार?
सीबीआई की जांच में सामने आया कि 78 वर्षीय बुजुर्ग को वीडियो कॉल के जरिए डराया-धमकाया गया। ठगों ने खुद को पुलिस और जांच एजेंसियों का अधिकारी बताकर कहा कि उनका आधार कार्ड आतंक फंडिंग में इस्तेमाल हुआ है। इसके बाद उन्हें 'डिजिटल अरेस्ट' में रख दिया गया, यानी उन्हें घर से बाहर निकलने और किसी से बात करने से रोक दिया गया।
कैसे एक महीने तक डर के साए में रहा बुजुर्ग?
करीब एक महीने तक पीड़ित को मानसिक रूप से कैद रखा गया। उसे केवल बैंक जाने और पैसे ट्रांसफर करने की अनुमति दी जाती थी। ठगों ने उसे लगातार वीडियो कॉल पर निगरानी में रखा और परिवार से भी बात करने से मना कर दिया। अगर किसी को बताया तो जेल भेजने की धमकी दी गई।
फर्जी दस्तावेज और भरोसे का खेल कैसे चला?
हर बार पैसे ट्रांसफर करने के बाद ठग पीड़ित को भारतीय रिजर्व बैंक के फर्जी सर्टिफिकेट भेजते थे। उसे भरोसा दिलाया गया कि जांच पूरी होने के बाद पैसा वापस कर दिया जाएगा। यहां तक कहा गया कि आरबीआई का एक अधिकारी खुद संपर्क करेगा।
क्या इस खाते का इस्तेमाल अन्य ठगी में भी हुआ?
सीबीआई को जांच में यह भी पता चला कि जिस बैंक खाते में पैसे आए, उसका इस्तेमाल देश के कम से कम दो और साइबर ठगी मामलों में भी हुआ था। इस खाते के जरिए पैसा अलग-अलग फर्जी खातों में भेजा गया और फिर निकाल लिया गया।
कब और कैसे शुरू हुई ठगी की पूरी कहानी?
1 अगस्त 2025 को पीड़ित को एक कॉल आया, जिसमें कहा गया कि उसके आधार कार्ड से मुंबई में एक मोबाइल कनेक्शन लिया गया है, जो आतंक गतिविधियों से जुड़ा है। इसके बाद कॉल को कथित पुलिस अधिकारियों से जोड़ दिया गया और व्हाट्सऐप के जरिए पूरी साजिश को अंजाम दिया गया। धीरे-धीरे डर बढ़ाकर उससे 23 करोड़ रुपये निकलवा लिए गए।
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