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अब अधूरे मेडिकल कॉलेजों में नहीं होगी पढ़ाई: एनएमसी सख्त, जारी किया नया मसौदा; मरीजों को बेहतर इलाज की तैयारी
Tue, 14 Jul 2026 05:44 AM IST
Devesh Tripathi
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
अमर उजाला ब्यूरो, नई दिल्ली
Published by: Devesh Tripathi
Updated Tue, 14 Jul 2026 05:44 AM IST
सार
राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग ने नए मेडिकल कॉलेजों की स्थापना से जुड़े नियमों को और सख्त बनाने का प्रस्ताव रखा है। मसौदे के अनुसार, किसी भी संस्थान को तब तक मंजूरी नहीं मिलेगी, जब तक अस्पताल, कॉलेज भवन और अन्य आवश्यक सुविधाएं पूरी तरह तैयार न हों। अधूरी परियोजनाओं या अस्थायी व्यवस्थाओं के आधार पर आवेदन स्वीकार नहीं किए जाएंगे।
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मेडिकल कॉलेज
- फोटो : अमर उजाला प्रिंट
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विस्तार
देश में नए मेडिकल कॉलेज खोलने के नियमों में बड़ा बदलाव होने जा रहा है। अगर राष्ट्रीय आयुर्विज्ञान आयोग (एनएमसी) का प्रस्ताव लागू होता है तो अब अधूरे अस्पताल, निर्माणाधीन भवन या अस्थायी व्यवस्था के सहारे किसी नए मेडिकल कॉलेज को मंजूरी नहीं मिलेगी।
मेडिकल कॉलेज शुरू करने से पहले इमारत, अस्पताल और अन्य सभी जरूरी सुविधाएं तैयार होना अनिवार्य होगा। इसका सीधा फायदा मेडिकल छात्रों और मरीजों को मिलेगा, क्योंकि उन्हें शुरुआत से ही बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। एनएमसी ने मेडिकल संस्थानों की स्थापना, नए पाठ्यक्रम, सीट वृद्धि, मूल्यांकन एवं रेटिंग (संशोधन) विनियम-2026 का मसौदा जारी किया है।
क्या हैं नए नियम?
प्रस्तावित संशोधनों पर 30 दिनों तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। मौजूदा व्यवस्था में कई बार अस्पताल या मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा होने से पहले भी आवेदन कर दिए जाते थे। लेकिन प्रस्तावित नियमों के अनुसार, आवेदन करते समय सभी बुनियादी ढांचा व वैधानिक आवश्यकताएं पूरी होना अनिवार्य होगा। अस्पताल और कॉलेज भवन के लिए किसी भी तरह की अस्थायी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी और वर्क-इन-प्रोग्रेस परियोजनाओं पर आगे विचार ही नहीं होगा।
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आवेदन प्रक्रिया में बदलाव
एनएमसी ने आवेदन प्रक्रिया भी पहले से अधिक सख्त करने का प्रस्ताव दिया है। अगर किसी मेडिकल कॉलेज का आवेदन जरूरी दस्तावेजों के बिना जमा किया जाता है तो उसे बिना अतिरिक्त मौका दिए सीधे खारिज किया जा सकेगा। अब अधूरी तैयारी के साथ आवेदन करने वाले संस्थानों के लिए मंजूरी पाना आसान नहीं होगा।
कॉलेज को बनाना होगा कॉर्पस फंड
नए के अलावा पहले से चल रहे मेडिकल कॉलेजों को भी एक समर्पित कॉर्पस फंड बनाकर रखना होगा। यह फंड केवल मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए होगा। इसकी राशि मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) तय करेगा और जरूरत पड़ने पर कॉलेजों को इसका प्रमाण भी देना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कॉलेजों के पास वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा या स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।
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मेडिकल कॉलेज शुरू करने से पहले इमारत, अस्पताल और अन्य सभी जरूरी सुविधाएं तैयार होना अनिवार्य होगा। इसका सीधा फायदा मेडिकल छात्रों और मरीजों को मिलेगा, क्योंकि उन्हें शुरुआत से ही बेहतर सुविधाएं मिल सकेंगी। एनएमसी ने मेडिकल संस्थानों की स्थापना, नए पाठ्यक्रम, सीट वृद्धि, मूल्यांकन एवं रेटिंग (संशोधन) विनियम-2026 का मसौदा जारी किया है।
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क्या हैं नए नियम?
प्रस्तावित संशोधनों पर 30 दिनों तक सुझाव और आपत्तियां मांगी गई हैं। मौजूदा व्यवस्था में कई बार अस्पताल या मेडिकल कॉलेज का निर्माण पूरा होने से पहले भी आवेदन कर दिए जाते थे। लेकिन प्रस्तावित नियमों के अनुसार, आवेदन करते समय सभी बुनियादी ढांचा व वैधानिक आवश्यकताएं पूरी होना अनिवार्य होगा। अस्पताल और कॉलेज भवन के लिए किसी भी तरह की अस्थायी व्यवस्था स्वीकार नहीं की जाएगी और वर्क-इन-प्रोग्रेस परियोजनाओं पर आगे विचार ही नहीं होगा।
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आवेदन प्रक्रिया में बदलाव
एनएमसी ने आवेदन प्रक्रिया भी पहले से अधिक सख्त करने का प्रस्ताव दिया है। अगर किसी मेडिकल कॉलेज का आवेदन जरूरी दस्तावेजों के बिना जमा किया जाता है तो उसे बिना अतिरिक्त मौका दिए सीधे खारिज किया जा सकेगा। अब अधूरी तैयारी के साथ आवेदन करने वाले संस्थानों के लिए मंजूरी पाना आसान नहीं होगा।
कॉलेज को बनाना होगा कॉर्पस फंड
नए के अलावा पहले से चल रहे मेडिकल कॉलेजों को भी एक समर्पित कॉर्पस फंड बनाकर रखना होगा। यह फंड केवल मेडिकल कॉलेज के संचालन के लिए होगा। इसकी राशि मेडिकल असेसमेंट एंड रेटिंग बोर्ड (एमएआरबी) तय करेगा और जरूरत पड़ने पर कॉलेजों को इसका प्रमाण भी देना होगा। इसका उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि कॉलेजों के पास वित्तीय संसाधनों की कमी के कारण शिक्षा या स्वास्थ्य सेवाएं प्रभावित न हों।