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Karnataka: 'कर्नाटक में सफारी के लिए बसों का होगा इस्तेमाल', हाथी शिविर की घटना के बाद मंत्री ने दिए निर्देश
पीटीआई, बंगलूरू।
Published by: निर्मल कांत
Updated Wed, 20 May 2026 04:36 PM IST
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सार
Karnataka: कर्नाटक सरकार ने वन्यजीव सफारी में पर्यटकों की सुरक्षा बढ़ाने के लिए खुले वाहनों की जगह सुरक्षित बसें चलाने का फैसला लिया है। दुबारे हाथी शिविर में महिला पर्यटक की मौत के बाद वन मंत्री ईश्वर खंडरे ने अधिकारियों को सख्त सुरक्षा इंतजाम करने, वाहनों में जाली और मजबूत शीशे लगाने तथा जंगल में पर्यटकों के उतरने पर रोक लगाने के निर्देश दिए हैं। पढ़िए रिपोर्ट-
ईश्वर खंडरे, कर्नाटक के वन मंत्री
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक/एक्स/ईश्वर खंडरे
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विस्तार
कर्नाटक के वन, पर्यावरण और पारिस्थितिकी मंत्री ईश्वर खंडरे ने बुधवार को अधिकारियों को निर्देश दिया कि राज्य के पांच टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्यों में सफारी के लिए खुले सफारी वाहनों की जगह ज्यादा सुरक्षित बसों का इस्तेमाल किया जाए।
कोडागु जिले के दुबारे हाथी शिविर में 18 मई की घटना के बाद मंत्री ने मुख्य वन्यजीव संरक्षक को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सफारी के दौरान पर्यटकों की सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता दी जाए। उस दिन दो प्रशिक्षित हाथियों के बीच झड़प हो गई थी। इस दौरान एक महिला पर्यट की मौत हो गई थी।
राज्य में कहां-कहां कराई जाती है सफारी?
अधिकारियों के अनुसार, राज्य के अलग-अलग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्यों में सफारी कराई जाती है। इनमें बांदीपुर टाइगर रिजर्व, नागरहोल टाइगर रिजर्व, काली, बिलिगिरिरंगना हिल्स और भद्रा टाइगर रिजर्व शामिल हैं। इसके अलावा, मलई महादेश्वर हिल्स, डांडेली और के गुड़ी जैसे वन क्षेत्रों में भी सफारी कराई जाती है। इन जगहों पर केवल राज्य के अलग-अलग हिस्सों से ही नहीं, बल्कि देश और विदेश से भी पर्यटक और वन्यजीव प्रेमी आते हैं।
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वन मंत्री खंडरे ने क्या कहा?
मंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में खंडरे ने कहा कि अच्छी बात यह है कि अब तक सफारी क्षेत्रों में हाथी या बाघ जैसे जंगली जानवरों की ओर से सफारी वाहनों पर हमले में किसी के हताहत होने की घटना नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के होने से पहले एहतियाती कदम उठाना जरूरी है।
पर्यटकों की सुरक्षा के लिए खडरे ने निर्देश दिया कि सफारी में इस्तेमाल होने वाले खुले सफारी वाहनों की जगह पूरी तरह सुरक्षित बसों का उपयोग किया जाए। मौजूदा सफारी वाहनों में लोहे की जाली या टूट-फूट से सुरक्षित शीशे लगाए जाएं और उसके बाद उनका इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जंगल के अंदर पर्यटकों को वाहन से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा, हर सफारी वाहन में प्राथमिक उपचार किट की व्यवस्था जरूरी होगी और सफारी केंद्रों तथा हाथी शिविरों के पास एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।
कोडागु जिले के दुबारे हाथी शिविर में 18 मई की घटना के बाद मंत्री ने मुख्य वन्यजीव संरक्षक को स्पष्ट निर्देश दिए हैं कि सफारी के दौरान पर्यटकों की सुरक्षा को ज्यादा प्राथमिकता दी जाए। उस दिन दो प्रशिक्षित हाथियों के बीच झड़प हो गई थी। इस दौरान एक महिला पर्यट की मौत हो गई थी।
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राज्य में कहां-कहां कराई जाती है सफारी?
अधिकारियों के अनुसार, राज्य के अलग-अलग टाइगर रिजर्व और वन्यजीव अभयारण्यों में सफारी कराई जाती है। इनमें बांदीपुर टाइगर रिजर्व, नागरहोल टाइगर रिजर्व, काली, बिलिगिरिरंगना हिल्स और भद्रा टाइगर रिजर्व शामिल हैं। इसके अलावा, मलई महादेश्वर हिल्स, डांडेली और के गुड़ी जैसे वन क्षेत्रों में भी सफारी कराई जाती है। इन जगहों पर केवल राज्य के अलग-अलग हिस्सों से ही नहीं, बल्कि देश और विदेश से भी पर्यटक और वन्यजीव प्रेमी आते हैं।
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वन मंत्री खंडरे ने क्या कहा?
मंत्री कार्यालय की ओर से जारी बयान में खंडरे ने कहा कि अच्छी बात यह है कि अब तक सफारी क्षेत्रों में हाथी या बाघ जैसे जंगली जानवरों की ओर से सफारी वाहनों पर हमले में किसी के हताहत होने की घटना नहीं हुई है। हालांकि, उन्होंने कहा कि किसी भी दुर्भाग्यपूर्ण घटना के होने से पहले एहतियाती कदम उठाना जरूरी है।
पर्यटकों की सुरक्षा के लिए खडरे ने निर्देश दिया कि सफारी में इस्तेमाल होने वाले खुले सफारी वाहनों की जगह पूरी तरह सुरक्षित बसों का उपयोग किया जाए। मौजूदा सफारी वाहनों में लोहे की जाली या टूट-फूट से सुरक्षित शीशे लगाए जाएं और उसके बाद उनका इस्तेमाल किया जाए। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि जंगल के अंदर पर्यटकों को वाहन से बाहर निकलने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। इसके अलावा, हर सफारी वाहन में प्राथमिक उपचार किट की व्यवस्था जरूरी होगी और सफारी केंद्रों तथा हाथी शिविरों के पास एंबुलेंस सेवा की व्यवस्था भी सुनिश्चित की जाएगी।