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Ajit Doval: अजीत डोभाल को मिला लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार, अमित शाह ने किया सम्मानित; अब तक इन्हें मिला
Sat, 01 Aug 2026 01:42 PM IST
Devesh Tripathi
पीटीआई, पुणे
पीटीआई, पुणे
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:42 PM IST
सार
पुणे में आयोजित एक समारोह में केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया। तिलक स्मारक ट्रस्ट ने उन्हें राष्ट्रीय सुरक्षा और रणनीतिक मामलों में लंबे समय से दिए गए योगदान के लिए सम्मानित किया। डोभाल ने अपने करियर के दौरान कई संवेदनशील क्षेत्रों में अहम जिम्मेदारियां निभाई हैं।
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एनएसए अजीत डोभाल
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने शनिवार को पुणे में राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार (एनएसए) अजीत डोभाल को लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार से सम्मानित किया। तिलक स्मारक ट्रस्ट के अनुसार, राष्ट्रीय सुरक्षा के क्षेत्र में उनके महत्वपूर्ण योगदान के लिए अजीत डोभाल को इस प्रतिष्ठित पुरस्कार के लिए चुना गया है।
अजीत डोभाल को क्यों मिला पुरस्कार?
81 वर्षीय अजीत डोभाल ने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशनों में राजनयिक भूमिका भी निभाई है।
डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। वह भारत-चीन सीमा वार्ता में भारत के विशेष प्रतिनिधि भी रहे हैं। डोकलाम गतिरोध को सुलझाने के लिए हुए कूटनीतिक प्रयासों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
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कब शुरू हुआ था यह सम्मान?
तिलक स्मारक ट्रस्ट ने बताया कि लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी। यह सम्मान सबसे पहले समाजवादी नेता एस. एम. जोशी को दिया गया था। यह पुरस्कार हर वर्ष 1 अगस्त को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने देश की प्रगति और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
अब तक यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तथा वरिष्ठ नेता शरद पवार सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों को दिया जा चुका है।
अमित शाह ने अण्णाभाऊ साठे को भी दी श्रद्धांजलि
पुणे दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महान मराठी लोकशाहीर, कवि और समाज सुधारक अण्णाभाऊ साठे की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की। सरसबाग क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार भी मौजूद रहे। इस दौरान कई स्थानीय नेताओं और गणमान्य लोगों ने भी अण्णाभाऊ साठे की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। अण्णाभाऊ साठे का जन्म 1 अगस्त 1920 को हुआ था। उन्हें महाराष्ट्र में समाज सुधार, लोककाव्य और दलित साहित्य के अग्रणी हस्ताक्षरों में गिना जाता है।
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अजीत डोभाल को क्यों मिला पुरस्कार?
81 वर्षीय अजीत डोभाल ने मिजोरम, सिक्किम, पंजाब और जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां संभाली हैं। उन्होंने इस्लामाबाद और लंदन स्थित भारतीय मिशनों में राजनयिक भूमिका भी निभाई है।
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डोभाल भारत के सबसे लंबे समय तक सेवा देने वाले राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार हैं। वह भारत-चीन सीमा वार्ता में भारत के विशेष प्रतिनिधि भी रहे हैं। डोकलाम गतिरोध को सुलझाने के लिए हुए कूटनीतिक प्रयासों में भी उनकी महत्वपूर्ण भूमिका मानी जाती है।
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कब शुरू हुआ था यह सम्मान?
तिलक स्मारक ट्रस्ट ने बताया कि लोकमान्य तिलक राष्ट्रीय पुरस्कार की शुरुआत वर्ष 1983 में हुई थी। यह सम्मान सबसे पहले समाजवादी नेता एस. एम. जोशी को दिया गया था। यह पुरस्कार हर वर्ष 1 अगस्त को स्वतंत्रता सेनानी बाल गंगाधर तिलक की पुण्यतिथि पर उन व्यक्तियों को दिया जाता है, जिन्होंने देश की प्रगति और विकास में उल्लेखनीय योगदान दिया हो।
अब तक यह सम्मान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी, पूर्व प्रधानमंत्रियों अटल बिहारी वाजपेयी, मनमोहन सिंह और इंदिरा गांधी, पूर्व राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी तथा वरिष्ठ नेता शरद पवार सहित कई प्रतिष्ठित हस्तियों को दिया जा चुका है।
अमित शाह ने अण्णाभाऊ साठे को भी दी श्रद्धांजलि
पुणे दौरे के दौरान केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने महान मराठी लोकशाहीर, कवि और समाज सुधारक अण्णाभाऊ साठे की जयंती पर उन्हें श्रद्धांजलि भी अर्पित की। सरसबाग क्षेत्र में आयोजित कार्यक्रम में महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस, उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे और सुनेत्रा पवार भी मौजूद रहे। इस दौरान कई स्थानीय नेताओं और गणमान्य लोगों ने भी अण्णाभाऊ साठे की प्रतिमा पर पुष्प अर्पित किए। अण्णाभाऊ साठे का जन्म 1 अगस्त 1920 को हुआ था। उन्हें महाराष्ट्र में समाज सुधार, लोककाव्य और दलित साहित्य के अग्रणी हस्ताक्षरों में गिना जाता है।