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बंगाल में जनगणना शुरू: CM ने खुद भरा पहला फॉर्म, बोले- नहीं होगा डाटा का गलत इस्तेमाल; कब तक चलेगी स्व-गणना?
Sat, 01 Aug 2026 01:18 PM IST
Devesh Tripathi
आईएएनएस, कोलकाता
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Sat, 01 Aug 2026 01:18 PM IST
सार
पश्चिम बंगाल में 16वीं जनगणना के पहले चरण के तहत ऑनलाइन स्व-गणना प्रक्रिया शुरू हो गई है, जो 15 अगस्त तक चलेगी। इसके बाद निर्धारित कार्यक्रम के अनुसार मकानों की सूची तैयार करने का कार्य शुरू होगा। राज्य सरकार ने लोगों से डिजिटल माध्यम से अपनी जानकारी दर्ज करने और जनगणना कर्मचारियों का सहयोग करने की अपील की है।
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बंगाल में 15 अगस्त तक चलेगी स्व-गणना
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत की 16वीं जनगणना के तहत पश्चिम बंगाल में स्व-गणना (सेल्फ एन्यूमरेशन) प्रक्रिया शनिवार से शुरू हो गई। यह प्रक्रिया 15 अगस्त तक चलेगी। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने डिजिटल माध्यम से अपना जनगणना फॉर्म भरकर इसकी शुरुआत की। राज्य के नागरिक पहले चरण के तहत लोग 1 अगस्त से 15 अगस्त तक se.census.gov.in पोर्टल पर अपनी जानकारी दर्ज कर सकते हैं।
इसके बाद 16 अगस्त से 14 सितंबर तक मकानों की सूची तैयार करने (हाउस लिस्टिंग) का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे देश की पहली "100 प्रतिशत डिजिटल" जनगणना बताते हुए राज्य के लोगों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने और अधिकारियों का सहयोग करने की अपील की।
डाटा की नहीं होगा दुरुपयोग :सीएम शुभेंदु अधिकारी
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "मैं पश्चिम बंगाल के सभी लोगों से आग्रह करता हूं कि वे इस प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों का सहयोग करें और स्व-गणना के माध्यम से इस जनगणना में भाग लें।" मुख्यमंत्री ने जनगणना के दौरान व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता को लेकर उठने वाली आशंकाओं को भी दूर करने की कोशिश की।
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उन्होंने कहा, "यह जनगणना पूरी तरह गोपनीय है और कानून के तहत संरक्षित है। जनगणना के दौरान एकत्र किया गया डाटा केवल सांख्यिकीय विश्लेषण, योजना निर्माण और विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस जनगणना में किसी भी तरह से व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग की कोई गुंजाइश नहीं है।"
कैसे करें स्व-गणना?
ऑनलाइन फॉर्म भरने और जमा करने के बाद पोर्टल संबंधित व्यक्ति के लिए एक स्व-गणना आईडी जारी करेगा।
स्व-गणना पूरी होने के बाद व्यक्ति को मिली 11 अंकों की स्व-गणना आईडी सुरक्षित रखनी होगी। बाद में जब गणनाकर्मी सत्यापन के लिए घर आएंगे, तब यह आईडी उन्हें उपलब्ध करानी होगी। पोर्टल के अनुसार, स्व-गणना से आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी, क्योंकि व्यक्ति अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करेगा।
दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत नहीं
स्व-गणना फॉर्म भरते समय किसी भी प्रकार के दस्तावेज अपलोड या जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की आयुक्त और निगम क्षेत्र की प्रमुख जनगणना अधिकारी स्मिता पांडे ने भी इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बाद में जब गणनाकर्मी घर आएंगे, तब भी दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी।
सीएम ने पिछली सरकार पर लगाया देरी का आरोप
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में जनगणना 2027 की प्रक्रिया देर से शुरू होने के लिए पिछली ममता बनर्जी सरकार का ढुलमुल रवैया जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष फरवरी में ही तत्कालीन राज्य सरकार को इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए पत्र भेजा था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा, "पिछली राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के पत्र का जवाब तक नहीं दिया। संकीर्ण राजनीतिक कारणों से जनगणना का काम शुरू नहीं किया गया। तत्कालीन मुख्य सचिव इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति का इंतजार कर रहे थे। इसी कारण पश्चिम बंगाल इस मामले में अन्य राज्यों से पीछे रह गया।"
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इसके बाद 16 अगस्त से 14 सितंबर तक मकानों की सूची तैयार करने (हाउस लिस्टिंग) का कार्य किया जाएगा। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने इसे देश की पहली "100 प्रतिशत डिजिटल" जनगणना बताते हुए राज्य के लोगों से इसमें बढ़-चढ़कर भाग लेने और अधिकारियों का सहयोग करने की अपील की।
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डाटा की नहीं होगा दुरुपयोग :सीएम शुभेंदु अधिकारी
सीएम शुभेंदु अधिकारी ने कहा, "मैं पश्चिम बंगाल के सभी लोगों से आग्रह करता हूं कि वे इस प्रक्रिया में शामिल अधिकारियों का सहयोग करें और स्व-गणना के माध्यम से इस जनगणना में भाग लें।" मुख्यमंत्री ने जनगणना के दौरान व्यक्तिगत जानकारी की गोपनीयता को लेकर उठने वाली आशंकाओं को भी दूर करने की कोशिश की।
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उन्होंने कहा, "यह जनगणना पूरी तरह गोपनीय है और कानून के तहत संरक्षित है। जनगणना के दौरान एकत्र किया गया डाटा केवल सांख्यिकीय विश्लेषण, योजना निर्माण और विकास कार्यों के लिए इस्तेमाल किया जाएगा। इस जनगणना में किसी भी तरह से व्यक्तिगत जानकारी के दुरुपयोग की कोई गुंजाइश नहीं है।"
कैसे करें स्व-गणना?
ऑनलाइन फॉर्म भरने और जमा करने के बाद पोर्टल संबंधित व्यक्ति के लिए एक स्व-गणना आईडी जारी करेगा।
स्व-गणना पूरी होने के बाद व्यक्ति को मिली 11 अंकों की स्व-गणना आईडी सुरक्षित रखनी होगी। बाद में जब गणनाकर्मी सत्यापन के लिए घर आएंगे, तब यह आईडी उन्हें उपलब्ध करानी होगी। पोर्टल के अनुसार, स्व-गणना से आंकड़ों की सटीकता बढ़ेगी, क्योंकि व्यक्ति अपनी जानकारी स्वयं दर्ज करेगा।
दस्तावेज अपलोड करने की जरूरत नहीं
स्व-गणना फॉर्म भरते समय किसी भी प्रकार के दस्तावेज अपलोड या जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। कोलकाता नगर निगम (केएमसी) की आयुक्त और निगम क्षेत्र की प्रमुख जनगणना अधिकारी स्मिता पांडे ने भी इसकी पुष्टि की। उन्होंने कहा कि बाद में जब गणनाकर्मी घर आएंगे, तब भी दस्तावेज दिखाने की जरूरत नहीं होगी।
सीएम ने पिछली सरकार पर लगाया देरी का आरोप
पश्चिम बंगाल के मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी ने कहा कि राज्य में जनगणना 2027 की प्रक्रिया देर से शुरू होने के लिए पिछली ममता बनर्जी सरकार का ढुलमुल रवैया जिम्मेदार है। उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार ने पिछले वर्ष फरवरी में ही तत्कालीन राज्य सरकार को इस प्रक्रिया को शुरू करने के लिए पत्र भेजा था, लेकिन उस पर कोई कार्रवाई नहीं की गई।
मुख्यमंत्री ने कहा, "पिछली राज्य सरकार ने केंद्र सरकार के पत्र का जवाब तक नहीं दिया। संकीर्ण राजनीतिक कारणों से जनगणना का काम शुरू नहीं किया गया। तत्कालीन मुख्य सचिव इस मुद्दे पर राजनीतिक सहमति का इंतजार कर रहे थे। इसी कारण पश्चिम बंगाल इस मामले में अन्य राज्यों से पीछे रह गया।"