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NEET Paper Leak: अहमदाबाद में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का विरोध, NSUI ने दिखाए काले झंडे; मांगा इस्तीफा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: अमन तिवारी
Updated Thu, 14 May 2026 07:36 PM IST
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सार
नीट पेपर लीक मामले में एनएसयूआई ने अहमदाबाद में केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को काले झंडे दिखाकर इस्तीफे की मांग की। इस बीच, मंत्री ने आईआईएम की बैठक में विकसित भारत 2047, छात्र कल्याण और दाखिले से जुड़े नए नियमों पर चर्चा की।
शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
गुजरात के अहमदाबाद में कांग्रेस की छात्र इकाई एनएसयूआई (NSUI) के सदस्यों ने केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान का कड़ा विरोध किया। नीट-यूजी 2026 परीक्षा के पेपर लीक मामले को लेकर प्रदर्शनकारियों ने मंत्री को काले झंडे दिखाए और उनके इस्तीफे की मांग की।
IIMA के बाहर हुआ प्रदर्शन
यह प्रदर्शन भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (IIMA) के बाहर हुआ। धर्मेंद्र प्रधान वहां आईआईएम के समन्वय मंच की बैठक की अध्यक्षता करने पहुंचे थे। जब मंत्री की कार संस्थान से बाहर निकल रही थी, तब प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए। गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता पार्थिवराजसिंह काठवाड़िया ने कहा कि पेपर लीक की जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
तीन मई को हुई थी परीक्षा
नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को इसे रद्द कर दिया। इस मामले में अब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। परीक्षा रद्द होने से करीब 22 लाख मेडिकल छात्र अनिश्चितता के बीच फंस गए हैं।
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ये भी पढ़ें: NEET Paper Leak: गुरुग्राम के यश यादव के जरिए राजस्थान पहुंचा पेपर, दिनेश बिवाल के बेटे से पुरानी पहचान
विरोध प्रदर्शन के बीच, शिक्षा मंत्री ने आईआईएम समन्वय मंच की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उच्च शिक्षा विभाग, आईआईएम के अध्यक्ष, निदेशक और गुजरात व उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत 2047 के निर्माण में आईआईएम की भूमिका पर चर्चा करना था।
बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में छात्र कल्याण, शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों पर बात हुई। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आईआईएम राष्ट्र निर्माण और आर्थिक बदलाव के लिए मजबूत माध्यम बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि ये संस्थान वैश्विक स्तर पर नेतृत्व और प्रबंधन शिक्षा के मॉडल बन गए हैं।
बैठक में कुछ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इनमें एमबीए दाखिले के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करना, फीस वापसी की नीति और एक आईआईएम से दूसरे आईआईएम में छात्रों के जाने (माइग्रेशन) की सुविधा शामिल है। इसके अलावा, फैकल्टी और अन्य पदों के लिए आरक्षण रोस्टर लागू करने और युवा फैकल्टी को नए अवसर देने पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस बीच, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने संस्थानों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया।
अन्य वीडियो-
IIMA के बाहर हुआ प्रदर्शन
यह प्रदर्शन भारतीय प्रबंधन संस्थान अहमदाबाद (IIMA) के बाहर हुआ। धर्मेंद्र प्रधान वहां आईआईएम के समन्वय मंच की बैठक की अध्यक्षता करने पहुंचे थे। जब मंत्री की कार संस्थान से बाहर निकल रही थी, तब प्रदर्शनकारियों ने उन्हें काले झंडे दिखाए। गुजरात कांग्रेस के प्रवक्ता पार्थिवराजसिंह काठवाड़िया ने कहा कि पेपर लीक की जिम्मेदारी लेते हुए मंत्री को तुरंत इस्तीफा देना चाहिए।
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तीन मई को हुई थी परीक्षा
नीट-यूजी 2026 की परीक्षा 3 मई को हुई थी। पेपर लीक के आरोपों के बाद नेशनल टेस्टिंग एजेंसी (NTA) ने मंगलवार को इसे रद्द कर दिया। इस मामले में अब तक केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) ने पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। परीक्षा रद्द होने से करीब 22 लाख मेडिकल छात्र अनिश्चितता के बीच फंस गए हैं।
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विरोध प्रदर्शन के बीच, शिक्षा मंत्री ने आईआईएम समन्वय मंच की बैठक की अध्यक्षता की। इस बैठक में उच्च शिक्षा विभाग, आईआईएम के अध्यक्ष, निदेशक और गुजरात व उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ अधिकारी शामिल हुए। बैठक का मुख्य उद्देश्य विकसित भारत 2047 के निर्माण में आईआईएम की भूमिका पर चर्चा करना था।
बैठक में इन मुद्दों पर हुई चर्चा
बैठक में छात्र कल्याण, शैक्षणिक उत्कृष्टता, नवाचार और वैश्विक प्रतिस्पर्धा जैसे विषयों पर बात हुई। धर्मेंद्र प्रधान ने कहा कि आईआईएम राष्ट्र निर्माण और आर्थिक बदलाव के लिए मजबूत माध्यम बनकर उभरे हैं। उन्होंने कहा कि ये संस्थान वैश्विक स्तर पर नेतृत्व और प्रबंधन शिक्षा के मॉडल बन गए हैं।
बैठक में कुछ अन्य महत्वपूर्ण मुद्दों पर भी चर्चा हुई। इनमें एमबीए दाखिले के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करना, फीस वापसी की नीति और एक आईआईएम से दूसरे आईआईएम में छात्रों के जाने (माइग्रेशन) की सुविधा शामिल है। इसके अलावा, फैकल्टी और अन्य पदों के लिए आरक्षण रोस्टर लागू करने और युवा फैकल्टी को नए अवसर देने पर भी विचार-विमर्श किया गया। इस बीच, उच्च शिक्षा सचिव विनीत जोशी ने संस्थानों के बीच आपसी तालमेल बढ़ाने पर जोर दिया।
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