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ओडिशा: उत्पीड़न के आरोप में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दयाल गंगवार निलंबित, कांस्टेबल की हत्या का मामला
पीटीआई, भुवनेश्वर।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 19 Jun 2026 02:47 PM IST
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सार
ओडिशा में जीआरपी कांस्टेबल सौम्य रंजन स्वैन की भीड़ द्वारा हत्या के मामले में वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी दयाल गंगवार को निलंबित कर दिया गया है। स्वैन के परिवार ने उन पर मानसिक और शारीरिक प्रताड़ना के आरोप लगाए थे। मामले की जांच में गंगवार का नाम सामने आने के बाद सरकार ने यह कार्रवाई की। क्या हुआ पूरा मामला, पढ़िए रिपोर्ट-
दयाल गंगवार
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
ओडिशा में जीआरपी कांस्टेबल सौम्य रंजन स्वैन की कथित तौर पर भीड़ द्वारा हत्या के मामले में नया मोड़ आया है। स्वैन के परिवार की ओर से मानसिक और शारीरिक उत्पीड़न के आरोप लगाए जाने के बाद भारतीय पुलिस सेवा (आईपीएस) के वरिष्ठ अधिकारी दयाल गंगवार को गुरुवार को निलंबित कर दिया गया।
मुख्यमंत्री माझी ने दिया निलंबन का आदेश
एक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गंगवार के निलंबन का आदेश दिया है। गंगवार गृह विभाग में विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के पद पर तैनात थे। गंगवार का नाम भी स्वैन की हत्या की जांच के दौरान सामने आया था।
घटना क्या हुई थी?
सात मई को भुवनेश्वर के बलियंता थाना क्षेत्र में भीड़ ने कथित तौर पर सौम्य रंजन स्वैन को खंभे से बांधकर पीट-पीटकर मार डाला था। घटना भिंगारपुर-काजा में हुई। पुलिस के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ, जब एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी स्कूटी और स्वैन की मोटरसाइकिल की टक्कर के बाद कांस्टेबल ने उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की थी।
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परिवार ने लगाया था उत्पीड़न का आरोप
इस घटना के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर आक्रोश फैला था। स्वैन के परिवार ने आरोप लगाया था कि उस समय अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (संचार) रहे गंगवार ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था। परिवार ने मांग की थी कि गंगवार को भी जांच के दायरे में लाया जाए।
आठ पुलिसकर्मियों से घर के काम कराने का आरोप
ओडिशा सरकार ने सस्पेंड किए गए IPS अधिकारी दयाल गंगवार के खिलाफ गृह विभाग की एक आधिकारिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गंगवार ने सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना आठ GRP कर्मियों को अपने आवास पर घरेलू कार्यों के लिए तैनात कर रखा था। सभी पुलिसकर्मी सरकारी ड्यूटी के बजाय अधिकारी के निजी कार्य करते थे। जबकि उनका ADGP रेलवे एवं तटीय सुरक्षा पद से तबादला हो चुका था।
गृह विभाग में ओएसडी नियुक्त किए गए थे गंगवार
इसके बाद वर्ष 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी गंगवार का तबादला कर उन्हें गृह विभाग में ओएसडी के रूप में नियुक्त कर दिया गया था। बाद में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेलवे) अरुण बोथरा को इस आरोप की जांच करने का निर्देश दिया गया कि गंगवार ने स्वैन से सरकारी काम के बजाय निजी और घरेलू कार्य करवाकर मानसिक उत्पीड़न किया था।
बोथरा को यह भी जांचने की जिम्मेदारी दी गई थी कि स्वैन की निजी डायरी में दर्ज तनाव का उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों पर कोई असर था या नहीं। जांच रिपोर्ट पिछले महीने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सौंप दी गई थी।
ये भी पढ़ें: सबरीमाला सोना गायब मामला: हाईकोर्ट का SIT को निर्देश- तेजी से पूरी हो जांच, 29 जून तक दाखिल करें रिपोर्ट
बीजद ने क्या सवाल उठाए थे?
विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने भी मृतक कांस्टेबल और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के बीच कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए थे। पार्टी का कहना था कि दो साल पहले रेलवे एडीजी रहते हुए गंगवार स्वैन को जानते थे। बीजद ने दावा किया था कि स्वैन को पुलिस की आधिकारिक ड्यूटी के बजाय गंगवार के घर और जिम में काम करने के लिए लगाया गया था।
इस मामले की जांच के तहत राज्य सरकार पहले ही चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर चुकी है। इसके अलावा, दो होमगार्ड को सेवा से हटाया गया और बलियंता थाने के प्रभारी निरीक्षक का तबादला किया गया था। इन सभी पर घटना में भूमिका और आचरण को लेकर कार्रवाई की गई थी। पुलिस अब तक इस मामले में मुख्य आरोपी समेत 18 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।
मुख्यमंत्री माझी ने दिया निलंबन का आदेश
एक बयान में कहा गया कि मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने गंगवार के निलंबन का आदेश दिया है। गंगवार गृह विभाग में विशेष कार्याधिकारी (ओएसडी) के पद पर तैनात थे। गंगवार का नाम भी स्वैन की हत्या की जांच के दौरान सामने आया था।
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घटना क्या हुई थी?
सात मई को भुवनेश्वर के बलियंता थाना क्षेत्र में भीड़ ने कथित तौर पर सौम्य रंजन स्वैन को खंभे से बांधकर पीट-पीटकर मार डाला था। घटना भिंगारपुर-काजा में हुई। पुलिस के अनुसार, यह हमला उस समय हुआ, जब एक महिला ने आरोप लगाया था कि उसकी स्कूटी और स्वैन की मोटरसाइकिल की टक्कर के बाद कांस्टेबल ने उसके साथ दुष्कर्म की कोशिश की थी।
परिवार ने लगाया था उत्पीड़न का आरोप
इस घटना के बाद राज्य में बड़े पैमाने पर आक्रोश फैला था। स्वैन के परिवार ने आरोप लगाया था कि उस समय अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (संचार) रहे गंगवार ने उन्हें शारीरिक और मानसिक रूप से प्रताड़ित किया था। परिवार ने मांग की थी कि गंगवार को भी जांच के दायरे में लाया जाए।
आठ पुलिसकर्मियों से घर के काम कराने का आरोप
ओडिशा सरकार ने सस्पेंड किए गए IPS अधिकारी दयाल गंगवार के खिलाफ गृह विभाग की एक आधिकारिक रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि गंगवार ने सक्षम प्राधिकारी की मंजूरी के बिना आठ GRP कर्मियों को अपने आवास पर घरेलू कार्यों के लिए तैनात कर रखा था। सभी पुलिसकर्मी सरकारी ड्यूटी के बजाय अधिकारी के निजी कार्य करते थे। जबकि उनका ADGP रेलवे एवं तटीय सुरक्षा पद से तबादला हो चुका था।
गृह विभाग में ओएसडी नियुक्त किए गए थे गंगवार
इसके बाद वर्ष 1998 बैच के आईपीएस अधिकारी गंगवार का तबादला कर उन्हें गृह विभाग में ओएसडी के रूप में नियुक्त कर दिया गया था। बाद में अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक (रेलवे) अरुण बोथरा को इस आरोप की जांच करने का निर्देश दिया गया कि गंगवार ने स्वैन से सरकारी काम के बजाय निजी और घरेलू कार्य करवाकर मानसिक उत्पीड़न किया था।
बोथरा को यह भी जांचने की जिम्मेदारी दी गई थी कि स्वैन की निजी डायरी में दर्ज तनाव का उनकी मौत से जुड़ी परिस्थितियों पर कोई असर था या नहीं। जांच रिपोर्ट पिछले महीने पुलिस महानिदेशक (डीजीपी) को सौंप दी गई थी।
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बीजद ने क्या सवाल उठाए थे?
विपक्षी बीजू जनता दल (बीजद) ने भी मृतक कांस्टेबल और वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी के बीच कथित संबंधों को लेकर सवाल उठाए थे। पार्टी का कहना था कि दो साल पहले रेलवे एडीजी रहते हुए गंगवार स्वैन को जानते थे। बीजद ने दावा किया था कि स्वैन को पुलिस की आधिकारिक ड्यूटी के बजाय गंगवार के घर और जिम में काम करने के लिए लगाया गया था।
इस मामले की जांच के तहत राज्य सरकार पहले ही चार पुलिसकर्मियों को निलंबित कर चुकी है। इसके अलावा, दो होमगार्ड को सेवा से हटाया गया और बलियंता थाने के प्रभारी निरीक्षक का तबादला किया गया था। इन सभी पर घटना में भूमिका और आचरण को लेकर कार्रवाई की गई थी। पुलिस अब तक इस मामले में मुख्य आरोपी समेत 18 लोगों को गिरफ्तार कर चुकी है।