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Jitu Munda: बहन का कंकाल लेकर बैंक पहुंचने वाले भाई को मिली मदद, सीएम मोहन चरण के दखल के बाद जागा प्रशासन
वर्ल्ड डेस्क, अमर उजाला, भुवनेश्वर
Published by: नवीन पारमुवाल
Updated Wed, 29 Apr 2026 03:53 PM IST
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सार
ओडिशा के क्योंझर जिले में एक आदिवासी युवक अपनी मृत बहन के पैसे निकालने के लिए उसका कंकाल लेकर बैंक पहुंच गया। मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने इस घटना पर गहरा दुख जताते हुए उच्च स्तरीय जांच के आदेश दिए हैं।
मोहन चरण माझी, सीएम, ओडिशा
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
Odisha News: ओडिशा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने क्योंझर जिले से सामने आई चौंकाने वाली घटना पर गहरा दुख व्यक्त किया है। इस मामले में एक आदिवासी व्यक्ति अपनी बहन के कंकाल को कब्र से निकालकर बैंक ले गया था। बैंक अधिकारियों ने मृतका के खाते से पैसे देने के लिए मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र की मांग की थी। मुख्यमंत्री ने इस घटना को अत्यंत पीड़ादायक बताया है।
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा, 'यह घटना समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि वे आम लोगों के प्रति अधिक संवेदनशील बनें। मुख्यमंत्री ने उत्तरी राजस्व मंडल आयुक्त को इस पूरी घटना की जांच करने का आदेश दिया है। उत्तरी आरडीसी इस मामले की जांच करेंगे।
मुख्यमंत्री के आदेश के बाद हरकत में आया प्रशासन
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा को आर्थिक मदद मुहैया कराई गई है। जिला प्रशासन ने इस मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता चले कि किसी स्तर पर कोई लापरवाही तो नहीं हुई। जिला रेड क्रॉस फंड से जीतू मुंडा को बिना किसी देरी के 30,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी गई है।
यह भी पढ़ें: बैंक ने मांगा सबूत तो कब्र खोद लाया भाई: कंधे पर ढोने को मजबूर हुआ बहन का कंकाल, क्या है पूरा मामला?
प्रशासन ने जीतू मुंडा की मजबूरी को देखते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र बनवाने में मदद की। मेडिकल अधिकारी ने फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसके बाद कलारा मुंडा के बैंक खाते में जमा 19,300 रुपए की राशि जीतू मुंडा को सौंप दी गई। तहसीलदार ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर कुल 19,402 रुपए जीतू को दिलाए।
क्या थी पूरी घटना
यह घटना 27 अप्रैल को हुई थी जब जीतू मुंडा ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा में अपनी बहन कलारा मुंडा के कंकाल के साथ पहुंचे थे। बैंक के नियमों और दस्तावेजों की मांग से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देशभर में आक्रोश देखा गया। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
जिला प्रशासन का कहना है कि यह घटना बैंकिंग जागरूकता की कमी के कारण हुई। प्रशासन ने प्रतिबद्धता जताई है कि भविष्य में किसी भी निर्दोष व्यक्ति को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे दूरदराज के क्षेत्रों में सरकारी और बैंकिंग सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराएं। इस मामले में लापरवाही बरतने वालों की पहचान की जा रही है।
यह भी पढ़ें: ओडिशा कंकाल कांड: 'मृत्यु प्रमाण पत्र मिलते ही होगा भुगतान', इंडियन ओवरसीज बैंक ने बेबस भाई को दिया आश्वासन
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मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने कहा, 'यह घटना समाज और व्यवस्था दोनों के लिए चिंता का विषय है। भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति नहीं होनी चाहिए।' उन्होंने अधिकारियों से अपील की है कि वे आम लोगों के प्रति अधिक संवेदनशील बनें। मुख्यमंत्री ने उत्तरी राजस्व मंडल आयुक्त को इस पूरी घटना की जांच करने का आदेश दिया है। उत्तरी आरडीसी इस मामले की जांच करेंगे।
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मुख्यमंत्री के आदेश के बाद हरकत में आया प्रशासन
मुख्यमंत्री के हस्तक्षेप के बाद जिला प्रशासन तुरंत हरकत में आया। आदिवासी व्यक्ति जीतू मुंडा को आर्थिक मदद मुहैया कराई गई है। जिला प्रशासन ने इस मामले की विस्तृत जांच शुरू कर दी है ताकि यह पता चले कि किसी स्तर पर कोई लापरवाही तो नहीं हुई। जिला रेड क्रॉस फंड से जीतू मुंडा को बिना किसी देरी के 30,000 रुपए की वित्तीय सहायता दी गई है।
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प्रशासन ने जीतू मुंडा की मजबूरी को देखते हुए मृत्यु प्रमाण पत्र और कानूनी उत्तराधिकारी प्रमाण पत्र बनवाने में मदद की। मेडिकल अधिकारी ने फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत मृत्यु प्रमाण पत्र जारी कर दिया। इसके बाद कलारा मुंडा के बैंक खाते में जमा 19,300 रुपए की राशि जीतू मुंडा को सौंप दी गई। तहसीलदार ने बैंक अधिकारियों के साथ मिलकर कुल 19,402 रुपए जीतू को दिलाए।
क्या थी पूरी घटना
यह घटना 27 अप्रैल को हुई थी जब जीतू मुंडा ओडिशा ग्रामीण बैंक की शाखा में अपनी बहन कलारा मुंडा के कंकाल के साथ पहुंचे थे। बैंक के नियमों और दस्तावेजों की मांग से परेशान होकर उन्होंने यह कदम उठाया था। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद देशभर में आक्रोश देखा गया। विपक्षी दलों ने राज्य सरकार और बैंकिंग व्यवस्था पर सवाल उठाए थे।
जिला प्रशासन का कहना है कि यह घटना बैंकिंग जागरूकता की कमी के कारण हुई। प्रशासन ने प्रतिबद्धता जताई है कि भविष्य में किसी भी निर्दोष व्यक्ति को ऐसी स्थिति का सामना नहीं करना पड़ेगा। अधिकारियों को निर्देश दिए गए हैं कि वे दूरदराज के क्षेत्रों में सरकारी और बैंकिंग सेवाएं आसानी से उपलब्ध कराएं। इस मामले में लापरवाही बरतने वालों की पहचान की जा रही है।
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