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अविश्वास प्रस्ताव पर ओम बिरला: लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी, नेता प्रतिपक्ष को कभी नहीं रोका; नियम सबसे ऊपर

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Shivam Garg Updated Thu, 12 Mar 2026 12:18 PM IST
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सार

लोकसभा में अविश्वास प्रस्ताव पर दो दिनों तक चली चर्चा के बाद स्पीकर ओम बिरला पहली बार आसन पर पहुंचे और सदन को संबोधित किया। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष जरूरी है और किसी भी नेता, यहां तक कि प्रधानमंत्री भी, संसद के नियमों से ऊपर नहीं हैं।

Om Birla on No-Confidence Debate: Strong Opposition Essential, Rules Above All in Parliament
लोकसभा स्पीकर ओम बिरला - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला अविश्वास प्रस्ताव पर चर्चा के बाद आज पहली बार आसन पर आए। उन्होंने कहा कि लोकतंत्र में मजबूत विपक्ष का होना अत्यंत आवश्यक है और नेता प्रतिपक्ष को कभी नहीं रोका गया। उन्होंने स्पष्ट किया कि संसद के नियम सर्वोपरि हैं और कोई भी व्यक्ति नियम से ऊपर नहीं है, चाहे वह प्रधानमंत्री ही क्यों न हों।

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ओम बिरला ने बताया कि सदन में पिछले दो दिनों में 12 घंटे से अधिक बहस हुई, ताकि सभी सदस्यों के विचार और चिंताएं सामने आ सकें। उन्होंने कहा "यह सदन 140 करोड़ लोगों का प्रतिनिधित्व करता है। यहां हर सांसद अपनी जनता की समस्याओं और अपेक्षाओं के साथ आता है। मैंने हमेशा कोशिश की कि हर सांसद नियमों के तहत अपनी बात रखे। मैं हर उस सांसद को बोलने के लिए प्रेरित करने का प्रयास करता रहा जो कम बोलते थे, क्योंकि बोलने से लोकतंत्र का संकल्प मजबूत होता है।"
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हर सदस्य का आभारी हूं- ओम बिरला
उन्होंने सदन को विचारों का जीवंत मंच बताते हुए कहा कि पिछले दो दिन में सभी सदस्यों की बातों को गंभीरता से सुना गया। हर सदस्य का आभारी हूं, चाहे वे आलोचक ही क्यों न रहे हों। यही विशेषता है कि यहां हर आवाज सुनी जाती है। यह आसन किसी व्यक्ति का नहीं है, यह लोकतंत्र की महान भावना का प्रतिनिधि है।

'नियमों के तहत बोलने का अधिकार'
ओम बिरला ने विपक्ष की शिकायतों का भी जवाब दिया। कुछ सदस्यों का कहना था कि नेता प्रतिपक्ष को बोलने से रोका जाता है। इस पर उन्होंने कहा मैं स्पष्ट करना चाहता हूं कि कोई भी हो, उसे सदन में नियमों के तहत बोलने का अधिकार है। कुछ लोगों का मानना था कि सदन के नेता हर नियम से ऊपर हैं। मैं साफ कर दूं कि ऐसा नहीं है। ये नियम मुझे विरासत में मिले हैं और इन्हें पालन करना अनिवार्य है। चाहे प्रधानमंत्री ही क्यों न हों, नियम 372 के तहत उन्हें पहले अध्यक्ष से अनुमति लेना अनिवार्य है। जब कोई सदस्य इस सदन की मर्यादा के खिलाफ जाते हैं तो मुझे कठोर निर्णय लेने की व्यवस्था देनी पड़ती है। नियमों के तहत किसी भी सदस्य को सदन में बोलने की आजादी तो है, लेकिन नियमों की सीमा में रहकर।

उन्होंने कहा कि चर्चा के दौरान कुछ लोगों ने माइक बंद करने का आरोप लगाया। चेयर के पास माइक बंद करने का बटन नहीं होता। विपक्ष में कई लोग इस चेयर पर बैठते हैं, उन्हें इसके बारे में पता है।

सभी महिला सदस्यों ने अपनी बात रखी
ओम बिरला ने कहा कि महिला सदस्यों को लेकर भी आरोप लगाया गया कि उन्हें मौका कम दिया जाता है। लेकिन मुझे इस बात का गर्व है कि मेरे कार्यकाल में सभी महिला सदस्यों ने अपने विचार रखे हैं। बजट पर चर्चा के दौरान कुछ महिला सदस्यों ने ट्रेजरी बेंच की तरफ जाकर नारेबाजी करने की कोशिश की। यह अप्रत्याशित घटना थी, इसलिए मैंने सदन में सत्ता पक्ष के नेता को सदन में न आने का आग्रह किया। मेरी कोशिश रहती है कि भले ही देर रात तक बैठना हो, मैं सबके बोलने के बाद ही सदन से जाता हूं। मुझे खुशी है कि जो भी सदन में बोलना चाहता था, उसे एक साल के अंदर ही मैंने बोलने का मौका दिया।

निलंबन का विषय भी कुछ सदस्यों ने उठाया है। मेरा दल से ऊपर उठकर सभी सदस्यों से व्यक्तिगत संबंध आज भी है। लेकिन सदन की व्यवस्था बनाए रखने की जिम्मेदारी भी मेरी है। हमें विचार करना होगा कि इस सदन को निलंबन जैसे कठोर निर्णय क्यों लेने पड़े। मैं अक्सर आग्रह करता हूं कि सदन की गरिमा बनी रहे। लेकिन जब सदन के सदस्य नहीं मानते, तो सदन स्थगित करना पड़ता है।

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