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लोकसभा अध्यक्ष पर रार: नेहरू-1954 के उदाहरण पर भिड़े राहुल और रविशंकर, रिजिजू के बयान पर सदन में फिर हंगामा

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अमन तिवारी Updated Wed, 11 Mar 2026 01:43 PM IST
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सार

लोकसभा में ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान रवि शंकर प्रसाद और राहुल गांधी के बीच तीखी नोकझोंक हुई। विपक्ष ने स्पीकर पर पक्षपात के आरोप लगाए, जबकि सरकार ने इसे राजनीति से प्रेरित कदम बताया।

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रविशंकर प्रसाद और राहुल गांधी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार

लोकसभा में स्पीकर ओम बिरला को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान भाजपा और कांग्रेस के बीच तीखी बहस हुई। भाजपा सांसद मंत्री रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष पर कड़ा हमला करते हुए कहा कि स्पीकर को हटाने के इस प्रस्ताव को किसी नेता के अहंकार (ईगो) को संतुष्ट करने का जरिया नहीं बनाना चाहिए। उन्होंने दुख जताया कि सदन को आज ऐसे विषय पर चर्चा करनी पड़ रही है जो सिर्फ एक नेता की जिद का नतीजा है। रविशंकर प्रसाद ने विपक्ष के उस दावे को भी खारिज कर दिया जिसमें कहा गया था कि इस चर्चा के दौरान चेयरपर्सन का पैनल सदन की कार्यवाही नहीं चला सकता। उन्होंने संसदीय नियमों और संवैधानिक प्रावधानों का हवाला देते हुए कहा कि विपक्ष के नेता को राष्ट्रीय सुरक्षा जैसे संवेदनशील मुद्दों पर बहुत सोच-समझकर बोलना चाहिए।
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para_count-1 para_count-1 para_count-1 प्रसाद और राहुल गांधी में तीखी बहस para_count-1
para_count-1 para_count-1 para_count-1 प्रसाद के इन आरोपों पर सदन में काफी हंगामा हुआ। इसके बाद कार्यवाही की अध्यक्षता कर रहे दिलीप सैकिया ने राहुल गांधी को जवाब देने का मौका दिया। राहुल गांधी ने आरोप लगाया कि उन्हें सदन में कई बार बोलने से रोका गया है। उन्होंने कहा कि लोकसभा किसी एक पार्टी की नहीं है, बल्कि यह पूरे देश का प्रतिनिधित्व करती है। जवाब में रविशंकर प्रसाद ने फिर आरोप लगाया कि राहुल गांधी ने विदेशों में जाकर भारतीय संसद, संविधान और चुनाव आयोग जैसी संस्थाओं का मजाक उड़ाया है। उन्होंने कहा कि कांग्रेस ने पहले इन्हीं संस्थाओं के तहत कई चुनाव जीते हैं, लेकिन अब वह इन्हीं पर निशाना साध रही है। para_count-1
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para_count-3 para_count-3 para_count-3 रिजिजू और जयराम रमेश में हुई तीखी बहस para_count-3
para_count-3 para_count-3 para_count-3 चर्चा के दौरान केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू और कांग्रेस नेता जयराम रमेश के बीच 1954 के एक पुराने मामले को लेकर तीखी बहस हुई। किरेन रिजिजू ने सदन में गर्व से कहा कि मौजूदा सरकार ने स्पीकर को हटाने के प्रस्ताव पर चर्चा के लिए 10 घंटे का समय तय किया है। उन्होंने इसकी तुलना साल 1954 से की, जब देश के पहले स्पीकर जी.वी. मावलंकर के खिलाफ ऐसा ही प्रस्ताव आया था। रिजिजू ने दावा किया कि उस समय इस पर सिर्फ ढाई घंटे की बहस हुई थी। para_count-3
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para_count-4 para_count-4 para_count-4 रिजिजू के अनुसार, उस समय विपक्षी दल ने चर्चा के लिए पूरे एक दिन की मांग की थी, लेकिन तत्कालीन प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने केवल डेढ़ घंटे का समय दिया था। काफी बहस के बाद उस समय दो घंटे की चर्चा पर सहमति बनी थी। रिजिजू ने कहा कि आज की सरकार चर्चा से भाग नहीं रही है और विपक्ष को दो दिन का समय दे रही है। उन्होंने टीएमसी सांसद सौगत राय पर भी निशाना साधा, जिन्होंने चर्चा की अध्यक्षता करने वाले व्यक्ति के फैसले पर सवाल उठाए थे। para_count-4
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para_count-5 para_count-5 para_count-5 जयराम रमेश ने दावों किया पलटवार para_count-5
para_count-5 para_count-5 para_count-5 कांग्रेस महासचिव जयराम रमेश ने रिजिजू के इन दावों पर तुरंत पलटवार किया। उन्होंने सोशल मीडिया पर 1954 की बहस के कुछ दस्तावेज साझा किए। रमेश ने बताया कि 18 दिसंबर 1954 को प्रधानमंत्री नेहरू खुद पूरी बहस के दौरान सदन में बैठे थे और उन्होंने चर्चा में हिस्सा भी लिया था। नेहरू ने खुद डिप्टी स्पीकर से अनुरोध किया था कि चर्चा का ज्यादातर समय विपक्ष को मिलना चाहिए। नेहरू का कहना था कि सरकारी पक्ष को ज्यादा समय नहीं लेना चाहिए ताकि विपक्षी सदस्य अपनी बात विस्तार से रख सकें। para_count-5
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para_count-6 para_count-6 para_count-6 जयराम रमेश ने एक और बड़ा मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि 1954, 1966 और 1987 में जब भी स्पीकर के खिलाफ प्रस्ताव आया, तब सदन में डिप्टी स्पीकर मौजूद थे। लेकिन 2019 के बीच से लोकसभा में कोई डिप्टी स्पीकर नहीं है। रमेश ने इसे संविधान का स्पष्ट उल्लंघन बताया। उन्होंने यह भी याद दिलाया कि 1954 में कांग्रेस के पास 489 में से 364 सांसद थे, फिर भी नेहरू ने विपक्ष की आवाज को महत्व दिया था। para_count-6
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para_count-8 para_count-8 para_count-8 विपक्ष ने स्पीकर पर लगाए पक्षपात आरोप para_count-8
para_count-8 para_count-8 para_count-8 विपक्ष ने मौजूदा स्पीकर ओम बिरला पर पक्षपात करने के गंभीर आरोप लगाए हैं। विपक्षी सांसदों का कहना है कि उन्हें महत्वपूर्ण मुद्दों पर बोलने की अनुमति नहीं मिलती। उन्होंने आरोप लगाया कि राहुल गांधी को जरूरी विषयों पर अपनी बात रखने से रोका गया। विपक्ष ने महिला सांसदों के खिलाफ लगाए गए कुछ आरोपों को भी गलत बताया। विपक्षी सदस्यों ने सांसदों के निलंबन पर सवाल उठाए और कहा कि सदन को बिना किसी सरकारी दबाव के निष्पक्ष तरीके से चलाना चाहिए। para_count-8
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para_count-9 para_count-9 para_count-9 सत्ता पक्ष ने ओम बिरला की किया बचाव para_count-9
para_count-9 para_count-9 para_count-9 दूसरी तरफ, सत्ता पक्ष (एनडीए) ने ओम बिरला का बचाव किया। सरकार ने कहा कि विपक्ष यह प्रस्ताव सिर्फ सुर्खियां बटोरने के लिए लाया है। सत्ता पक्ष के सदस्यों ने कहा कि स्पीकर पूरी तरह निष्पक्ष हैं और सांसदों के खिलाफ कार्रवाई उनके खराब व्यवहार की वजह से हुई थी। संविधान के अनुसार, स्पीकर चर्चा के दौरान सदन में मौजूद रह सकते हैं, लेकिन ओम बिरला ने मंगलवार की कार्यवाही से दूर रहने का फैसला किया। इस चर्चा का अंत बुधवार को गृह मंत्री अमित शाह के जवाब के साथ होने की उम्मीद है। para_count-9
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