{"_id":"6a6c79c38b230b4e0f0d7db7","slug":"omar-abdullah-and-payal-abdullah-31-year-old-marriage-comes-to-end-supreme-court-grants-divorce-2026-07-31","type":"story","status":"publish","title_hn":"31 साल की शादी का हुआ अंत: उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का रिश्ता खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने तलाक पर लगाई मुहर","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
31 साल की शादी का हुआ अंत: उमर अब्दुल्ला और पायल अब्दुल्ला का रिश्ता खत्म, सुप्रीम कोर्ट ने तलाक पर लगाई मुहर
Fri, 31 Jul 2026 04:03 PM IST
प्रशांत तिवारी
पीटीआई, नई दिल्ली
पीटीआई, नई दिल्ली
Published by: प्रशांत तिवारी
Updated Fri, 31 Jul 2026 04:03 PM IST
सार
सुप्रीम कोर्ट ने जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रहीं पत्नी पायल अब्दुल्ला के विवाह को संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत समाप्त करने की मंजूरी दे दी। दोनों पक्षों के बीच सभी विवाद सुलझ जाने और अन्य मामलों को वापस लेने पर सहमति बनने के बाद अदालत ने तलाक को मंजूरी देने का फैसला किया।
विज्ञापन
उमर अब्दुल्ला
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को जम्मू-कश्मीर के मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला और उनकी अलग रह रहीं पत्नी पायल अब्दुल्ला की शादी को खत्म करने की मंजूरी दे दी। अदालत ने इस तथ्य को ध्यान में रखा कि दोनों ने आपसी सहमति से अपने सभी विवाद सुलझा लिए हैं और अब अलग-अलग जीवन जीने का फैसला कर लिया है।
विज्ञापन
किस आधार पर सुप्रीम कोर्ट ने तलाक को मंजूरी दी?
शीर्ष अदालत ने नेशनल कॉन्फ्रेंस के नेता उमर अब्दुल्ला की ओर से पेश वरिष्ठ अधिवक्ता कपिल सिब्बल की दलीलों पर गौर किया। सिब्बल ने अदालत को बताया कि संविधान के अनुच्छेद 142 के तहत विवाह समाप्त करने की अर्जी दाखिल की गई है, क्योंकि दोनों पक्षों के बीच सभी विवादों का समाधान हो चुका है। जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने कहा कि हम इसे अपने आदेश का हिस्सा बनाएंगे और उसी के अनुसार मामले का निपटारा करेंगे। पीठ इस मामले में जल्द ही औपचारिक आदेश जारी करेगी।
विज्ञापन
सुनवाई के दौरान अदालत में क्या कहा गया?
कपिल सिब्बल ने पीठ से कहा कि दोनों ने आजादी अपना ली है। सभी विवाद सुलझ चुके हैं। अनुच्छेद 142 के तहत अर्जी दाखिल की गई है और अदालत तलाक की मंजूरी दे सकती है। इस पर पीठ ने पूछा कि यह अर्जी रिकॉर्ड पर कब आई? अदालत को बताया गया कि यह अर्जी 22 जुलाई को दाखिल की गई थी। इसके जवाब में सिब्बल ने कहा कि बाकी सभी मामले वापस ले लिए जाएंगे। अर्जी में पूरी जानकारी दी गई है।
विज्ञापन
किन याचिकाओं पर सुनवाई हो रही थी?
पीठ दो याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी। इनमें उमर अब्दुल्ला की वह याचिका भी शामिल थी, जिसमें उन्होंने पत्नी पर क्रूरता का आरोप लगाते हुए तलाक की मांग की थी।
दिल्ली हाई कोर्ट ने पहले क्या फैसला दिया था?
जुलाई 2024 में सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली हाई कोर्ट के उस फैसले को चुनौती देने वाली उमर अब्दुल्ला की याचिका पर पायल अब्दुल्ला से जवाब मांगा था। इससे पहले 12 दिसंबर 2023 को दिल्ली हाई कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की तलाक की अपील खारिज करते हुए कहा था कि उनकी अपील में कोई ठोस आधार नहीं है। हाई कोर्ट ने 2016 में फैमिली कोर्ट द्वारा दिए गए उस आदेश को भी बरकरार रखा था, जिसमें तलाक की डिक्री देने से इनकार किया गया था।
फैमिली कोर्ट ने तलाक की अर्जी क्यों खारिज की थी?
30 अगस्त 2016 को फैमिली कोर्ट ने उमर अब्दुल्ला की याचिका खारिज करते हुए कहा था कि वे क्रूरता और परित्याग (डेजर्शन) के अपने आरोपों को पर्याप्त रूप से साबित नहीं कर सके। तलाक की अर्जी में उमर अब्दुल्ला ने कहा था कि उनका वैवाहिक संबंध पूरी तरह टूट चुका है। उनके अनुसार वर्ष 2007 से पति-पत्नी के रूप में कोई संबंध नहीं रहा, जबकि 1 सितंबर 1994 को विवाह करने वाला यह दंपति वर्ष 2009 से अलग-अलग रह रहा है। याचिका में यह भी आरोप लगाया गया था कि पायल अब्दुल्ला का व्यवहार अनुचित था, जिससे उन्हें मानसिक पीड़ा और परेशानी का सामना करना पड़ा।
ये भी पढ़ें: संसद: विपक्ष के हंगामे के बीच लोकसभा से जन्म-मृत्यु पंजीकरण संशोधन विधेयक पारित, जानिए क्या हैं नए बदलाव?
गुजारा-भत्ते को लेकर हाई कोर्ट का क्या आदेश था?
अगस्त 2023 में दिल्ली हाई कोर्ट की एकल पीठ ने उमर अब्दुल्ला को अपनी अलग रह रही पत्नी पायल अब्दुल्ला को हर महीने 1.5 लाख रुपये अंतरिम गुजारा-भत्ता देने का आदेश दिया था। इसके अलावा अदालत ने दोनों बेटों की पढ़ाई के लिए प्रत्येक को हर महीने 60,000 रुपये देने का भी निर्देश दिया था। यह आदेश पायल अब्दुल्ला और उनके बेटों की उन याचिकाओं पर आया था, जिनमें उन्होंने निचली अदालत के 2018 के आदेश को चुनौती दी थी। निचली अदालत ने पायल अब्दुल्ला को 75,000 रुपये प्रतिमाह तथा दोनों बेटों को बालिग होने तक 25,000-25,000 रुपये प्रतिमाह अंतरिम गुजारा-भत्ता देने का आदेश दिया था।