दसॉल्ट के सीईओ ने कहा- सितंबर 2019 में भारत को मिलेगा राफेल, अंबानी को चुनना मेरा फैसला
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दसॉल्ट एविएशन के मुख्य कार्यकारी अधिकारी (सीईओ) एरिक ट्रैपियर ने न्यूज एजेंसी एएनआई को दिए विशेष साक्षात्कार में कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी के आरोपों को सिरे से खारिज कर दिया है। उन्होंने गांधी के राफेल सौदे को लेकर दसॉल्ट-रिलायंस ज्वाइंट वेंचर को लेकर दिए गए विवरणों को गलत बताया। अपनी 2 नवंबर को की गई प्रेस कांफ्रेस में राहुल ने कहा था कि दसॉल्ट ने अनिल अंबानी की घाटे में चल रही कंपनी में 284 करोड़ रुपये निवेश किए हैं। इन पैसों का इस्तेमाल नागपुर में एक जमीन खरीदने के लिए किया गया। राहुल ने कहा था, 'यह साफ है कि दसॉल्ट के सीईओ झूठ बोल रहे हैं। यदि इसकी जांच की जाए तो मोदी बच नहीं पाएंगे। इसकी गारंटी है।'
एरिक ट्रैपियर ने कहा, 'मैं झूठ नहीं बोलता। सच वही है जो मैंने पहले कहा है और जो बयान दिए हैं वह सच हैं। मेरी झूठ बोलने की आदत नहीं है। मेरे जैसे सीईओ के पद पर बैठकर आप झूठ नहीं बोलते हैं।' यह जवाब उन्होंने तब दिया जब उनसे राहुल गांधी के आरोपों को लेकर सवाल किया गया। गांधी का आरोप है कि अनिल अंबानी की कंपनी रिलायंस समूह को दसॉल्ट की ऑफसेट डील देकर फायदा पहुंचाया गया है। ट्रैपियर ने कहा कि उनके पास कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने का अनुभव है और कांग्रेस अध्यक्ष द्वारा दिए गए बयानों की वजह से वह काफी निराश हुए हैं।
सीईओ ने कहा, 'हमारा कांग्रेस पार्टी के साथ काम करने का लंबा अनुभव है। हमारी भारत के सात पहली डील 1953 में नेहरू के जमाने में हुई थी। इसके बाद हमने और प्रधानमंत्रियों के साथ भी काम किया। हम भारत के साथ काम करते रहे हैं। हम किसी पार्टी के लिए काम नहीं कर रहे हैं। हम रणनीतिक उत्पाद जैसे कि लड़ाकू विमान भारतीय वायुसेना को सप्लाई करते रहे हैं। यह सबसे जरूरी है।' राफेल सौदे में हुए भ्रष्टाचार के आरोपों पर एरिक ने कहा, 'हमने अंबानी को खुद चुना। हमारे रिलायंस के अलावा 30 और साझेदार हैं। भारतीय वायुसेना इस सौदे का पक्ष इसलिए ले रही है क्योंकि उन्हें अपनी सुरक्षा के लिए लड़ाकू विमान चाहिए।'
सीईओ ने बताया, '36 विमानों की कीमत वही है जो 18 की थी। 36 18 के दोगुने हैं। जहां तक मेरी बात है यह कीमत दोगुनी होनी चाहिए थी। चूंकि यह सरकार से सरकार के बीच है तो इसमें मोलभाव हुआ। मुझे 9 प्रतिशत तक कीमतें घटानी पड़ीं। हम रिलायंस में पैसे निवेश नहीं कर रहे हैं। यह पैसा हमारे ज्वाइंट वेंचर (जेवी) में जाएगा। जहां तक डील के औद्योगिक हिस्सों की डील का सवाल है उसमें दसॉल्ट के इंजीनियर और कर्मचारी अगवानी कर रहे हैं। ठीक उसी समय मेरे पास रिलायंस जैसी एक भारतीय कंपनी है जो जेवी में पैसा निवेश कर रही है क्योंकि वह अपने देश को विकसित करना चाहती है। ऐसे में कंपनी को पता होगा कि वह किस तरह से विमानों का उत्पादन करेगी।'
दसॉ़ल्ट और रिलायंस के जेवी पर सफाई देते हुए एरिक ने कहा, 'पिछले साल जब हमने जेवी बनाया तो जेवी बनाने का फैसला 2012 में किए गए सौदे का हिस्सा था लेकिन हमने कांट्रैक्ट पर हस्ताक्षर होने का इंतजार किया। हम इस कंपनी में 50:50 के तहत 800 करोड़ रुपये निवेश करने थे। जेवी में दसॉल्ट के 49 और रिलायंस के 51 प्रतिशत शेयर हैं। हम अभी तक इसमें 40 करोड़ रुपये निवेश कर चुके हैं लेकिन यह 800 करोड़ रुपये तक बढ़ेगा। जिसमें 400 करोड़ रुपये दसॉल्ट आने वाले पांच सालों में देगा।'
ट्रैपियर से जब पूछा गया कि उनका शुरुआती समझौता भारत के सार्वजनिक उपक्रम या फिर हिंदुस्तान एरोनॉटिक्स लिमिटेड (एचएएल) के साथ हुआ था तो वह जारी क्यों नहीं रहा। इसपर उन्होंने कहा कि यदि 126 लड़ाकू विमानों का उत्पादन करने की डील आगे बढ़ती तो उन्हें एचएएल या फिर मुकेश अंबानी के रिलायंस के साथ काम करने में कोई दिक्कत नहीं थी। उन्होंने कहा, 'क्योंकि 126 विमानों की डील आगे नहीं बढ़ी क्योंकि भारत सरकार को फ्रांस से अविलंब 36 विमान चाहिए थे। इसके बाद मैंने रिलायंस और एचएएल के साथ काम करने का फैसला लिया। कुछ दिनों पहले ही एचएएल ने कहा था कि वह ऑफसेट साझेदार बनने में कोई दिलचस्पी नहीं रखता है। इसलिए नई निजी कंपनी रिलायंस में निवेश करने का फऐसला मेरा था।'
कांट्रैक्ट के हिसाब से हम वायुसेना को राफेल की पहली डिलिवरी अगले साल सितंबर में करने वाले है। यह समय पर हो जाएगी। उन्होंने बताया कि रिलायंस से पहले टाटा और अन्य कंपनियों से भी साझेदारी के लिए बातचीत हुई थी। 2011 में टाटा के साथ ही अन्य विमान कंपनियों से बातचीत हुई। मगर आखिर में रिलायंस की इंजीनियरिंग सुविधाएं देखते हुए हमने उनके साथ जाने का फैसला किया। विमान के बारे में बोलते हुए सीईओ ने कहा कि वर्तमान विमान में हथियार और मिसाइलों को छोड़कर सभी जरूरी उपकरण मौजूद हैं। हथियार दूसरे कांट्रैक्ट में भेजे जाएंगे। हथियारों को छोड़कर सभी चीजों से परिपूर्ण विमान को दसॉल्ट देगा।