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ऑपरेशन सिंदूर का मनोवैज्ञानिक प्रहार: दाने-दाने को तरस रही आवाम, फिर भी पाकिस्तान ने बढ़ाई फौज की सैलरी!
Fri, 26 Jun 2026 03:41 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Fri, 26 Jun 2026 03:41 PM IST
सार
ऑपरेशन सिंदूर के बाद पाकिस्तानी सेना का मनोबल टूट गया है और जवान चौकियां छोड़कर भाग रहे हैं। आसिम मुनीर ने खुद को फील्ड मार्शल बनाया और कंगाली के बावजूद रक्षा बजट में 18% की भारी बढ़ोतरी करवाई। जनता पर टैक्स का भारी बोझ डाला गया है और फौज को रोकने के लिए उनका वेतन 25% बढ़ा दिया गया है।
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असीम मुनीर, पाकिस्तानी सेना प्रमुख
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
पहलगाम हमले का बदला लेने के लिए भारतीय सेना ने 'ऑपरेशन सिंदूर' को अंजाम दिया था। इस ऑपरेशन का पाकिस्तान सेना के मनोबल पर बहुत गहरा असर पड़ा है। यह असर अब साफ-साफ दिखने लगा है। इस कार्रवाई के बाद पाकिस्तान ने एक झूठा दावा किया था। उसने कहा था कि वह भारत पर भारी पड़ा, लेकिन अधिकारियों का कहना है कि यह दावा पूरी तरह खोखला है। इस ऑपरेशन ने पाकिस्तानी सेना की कमर तोड़ दी है। देश के दूसरे सुरक्षा बलों का हौसला भी पस्त हो गया है। एक अधिकारी ने बताया कि इसका बुरा असर पाकिस्तान की हर फोर्स पर पड़ा है।
फील्ड मार्शल की पदवी और फौज में भगदड़
अधिकारियों ने एक और बड़ी बात बताई है। जनरल आसिम मुनीर ने इस ऑपरेशन के तुरंत बाद खुद को फील्ड मार्शल बना लिया। वह अपनी सेना को एक कड़ा संदेश देना चाहते थे। उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार पर भारी दबाव बनाया। इसके बाद ही उन्हें यह रैंक मिली। पाकिस्तान के इतिहास में यह सिर्फ दूसरी बार हुआ है। मुनीर चाहते थे कि जनता और सेना समझे कि पाकिस्तान जीत गया है। वे दिखाना चाहते थे कि इसी जीत के बदले उन्हें यह बड़ा इनाम मिला है।
एक दूसरे अधिकारी ने इस पर रोशनी डाली। मुनीर का यह कदम बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और टीटीपी से लड़ रहे जवानों के लिए भी था। वे उनका हौसला बढ़ाना चाहते थे। असल में इस समय पाकिस्तानी सेना में बड़ी भगदड़ मची है। सुरक्षा बलों के जवान लगातार अपनी पोस्ट छोड़कर भाग रहे हैं। इससे पूरी सेना का मनोबल टूट गया है।
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कंगाली में भारी रक्षा बजट और जनता पर टैक्स की मार
इस बड़े संकट के बीच एक और हैरान करने वाली बात सामने आई। पाकिस्तान ने साल 2026 के लिए अपने रक्षा बजट में 18 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय बेहद बदहाल है। शरीफ सरकार ने इस बढ़ोतरी का विरोध भी किया था। लेकिन मुनीर अपनी बात पर अड़ गए। मुनीर का मानना था कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना को मजबूत दिखाना जरूरी है।
इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने रक्षा के लिए रिकॉर्ड 3 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये तय कर दिए। यह देश के कुल बजट का करीब 16 प्रतिशत है। सेना के दबाव के आगे शरीफ सरकार झुक गई। इसका खामियाजा अब वहां की गरीब जनता भुगत रही है। सरकार ने विकास योजनाओं (पीएसडीपी) के बजट में भारी कटौती कर दी है। इसे घटाकर सिर्फ 1 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। अब वहां सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के काम रुक जाएंगे।
केंद्र सरकार ने राज्यों पर भी दबाव बनाया है। पंजाब और सिंध प्रांतों का पैसा जबरन केंद्र ने ले लिया। इसके साथ ही बिजली और गैस की सब्सिडी पूरी तरह खत्म कर दी गई। अब आम जनता को बिजली-गैस के पूरे दाम चुकाने होंगे। इस घाटे को पूरा करने के लिए सरकार ने जनता पर भारी टैक्स लगा दिया है। सरकार ने 15.26 लाख करोड़ रुपये वसूलने का कड़ा लक्ष्य रखा है।
यह भी पढ़ें: ऑपरेशन सिंदूर में बलिदान हुए थे छह वीर सपूत: सरकार ने जारी किए नाम; इनमें वायुसेना का एक और थल सेना के पांच जवान
सैनिकों को रोकने के लिए वेतन में भारी बढ़ोतरी
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने एक और खुलासा किया। इन तमाम कोशिशों के बाद भी जब सैनिकों का मनोबल नहीं बढ़ा, तो सरकार ने नया रास्ता निकाला। सरकार ने मजबूरी में सैनिकों का वेतन ढांचा ही बदल दिया। अब सभी रैंक के सैनिकों की सैलरी सीधे 25 प्रतिशत बढ़ा दी गई है। मुनीर ने इस फैसले को तुरंत लागू भी कर दिया है। अधिकारी ने कहा कि मुनीर सेना को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह सब सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर की हार को छिपाने के लिए किया जा रहा है ताकि सैनिक फौज छोड़कर न भागें।
जानकारों का कहना है कि भारत का ऑपरेशन सिंदूर एक सटीक रणनीतिक हमला था। भारतीय सेना ने चंद मिनटों में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय को तबाह कर दिया था। लश्कर-ए-तैयबा के ट्रेनिंग कैंप को भी मटियामेट कर दिया गया था। इस हमले ने मुनीर की सेना के होश उड़ा दिए हैं। अब वे अपनी जनता को भूखा मारकर भी फौज को खुश रखने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।
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फील्ड मार्शल की पदवी और फौज में भगदड़
अधिकारियों ने एक और बड़ी बात बताई है। जनरल आसिम मुनीर ने इस ऑपरेशन के तुरंत बाद खुद को फील्ड मार्शल बना लिया। वह अपनी सेना को एक कड़ा संदेश देना चाहते थे। उन्होंने शहबाज शरीफ सरकार पर भारी दबाव बनाया। इसके बाद ही उन्हें यह रैंक मिली। पाकिस्तान के इतिहास में यह सिर्फ दूसरी बार हुआ है। मुनीर चाहते थे कि जनता और सेना समझे कि पाकिस्तान जीत गया है। वे दिखाना चाहते थे कि इसी जीत के बदले उन्हें यह बड़ा इनाम मिला है।
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एक दूसरे अधिकारी ने इस पर रोशनी डाली। मुनीर का यह कदम बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) और टीटीपी से लड़ रहे जवानों के लिए भी था। वे उनका हौसला बढ़ाना चाहते थे। असल में इस समय पाकिस्तानी सेना में बड़ी भगदड़ मची है। सुरक्षा बलों के जवान लगातार अपनी पोस्ट छोड़कर भाग रहे हैं। इससे पूरी सेना का मनोबल टूट गया है।
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कंगाली में भारी रक्षा बजट और जनता पर टैक्स की मार
इस बड़े संकट के बीच एक और हैरान करने वाली बात सामने आई। पाकिस्तान ने साल 2026 के लिए अपने रक्षा बजट में 18 फीसदी की बढ़ोतरी कर दी। पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था इस समय बेहद बदहाल है। शरीफ सरकार ने इस बढ़ोतरी का विरोध भी किया था। लेकिन मुनीर अपनी बात पर अड़ गए। मुनीर का मानना था कि ऑपरेशन सिंदूर के बाद सेना को मजबूत दिखाना जरूरी है।
इसके बाद पाकिस्तान सरकार ने रक्षा के लिए रिकॉर्ड 3 लाख करोड़ पाकिस्तानी रुपये तय कर दिए। यह देश के कुल बजट का करीब 16 प्रतिशत है। सेना के दबाव के आगे शरीफ सरकार झुक गई। इसका खामियाजा अब वहां की गरीब जनता भुगत रही है। सरकार ने विकास योजनाओं (पीएसडीपी) के बजट में भारी कटौती कर दी है। इसे घटाकर सिर्फ 1 लाख करोड़ रुपये कर दिया गया है। अब वहां सड़कों, स्कूलों और अस्पतालों के काम रुक जाएंगे।
केंद्र सरकार ने राज्यों पर भी दबाव बनाया है। पंजाब और सिंध प्रांतों का पैसा जबरन केंद्र ने ले लिया। इसके साथ ही बिजली और गैस की सब्सिडी पूरी तरह खत्म कर दी गई। अब आम जनता को बिजली-गैस के पूरे दाम चुकाने होंगे। इस घाटे को पूरा करने के लिए सरकार ने जनता पर भारी टैक्स लगा दिया है। सरकार ने 15.26 लाख करोड़ रुपये वसूलने का कड़ा लक्ष्य रखा है।
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सैनिकों को रोकने के लिए वेतन में भारी बढ़ोतरी
न्यूज एजेंसी आईएएनएस के मुताबिक, खुफिया ब्यूरो के एक अधिकारी ने एक और खुलासा किया। इन तमाम कोशिशों के बाद भी जब सैनिकों का मनोबल नहीं बढ़ा, तो सरकार ने नया रास्ता निकाला। सरकार ने मजबूरी में सैनिकों का वेतन ढांचा ही बदल दिया। अब सभी रैंक के सैनिकों की सैलरी सीधे 25 प्रतिशत बढ़ा दी गई है। मुनीर ने इस फैसले को तुरंत लागू भी कर दिया है। अधिकारी ने कहा कि मुनीर सेना को खुश करने के लिए किसी भी हद तक जा सकते हैं। यह सब सिर्फ ऑपरेशन सिंदूर की हार को छिपाने के लिए किया जा रहा है ताकि सैनिक फौज छोड़कर न भागें।
जानकारों का कहना है कि भारत का ऑपरेशन सिंदूर एक सटीक रणनीतिक हमला था। भारतीय सेना ने चंद मिनटों में जैश-ए-मोहम्मद के मुख्यालय को तबाह कर दिया था। लश्कर-ए-तैयबा के ट्रेनिंग कैंप को भी मटियामेट कर दिया गया था। इस हमले ने मुनीर की सेना के होश उड़ा दिए हैं। अब वे अपनी जनता को भूखा मारकर भी फौज को खुश रखने की नाकाम कोशिश कर रहे हैं।