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रूसी तेल खरीद पर अमेरिकी मंजूरी: संजय राउत ने केंद्र सरकार को घेरा; विपक्षी नेताओं ने भी दागे तीखे सवाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Love Gaur
Updated Fri, 06 Mar 2026 03:22 PM IST
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सार
Russian Oil: संजय राउत सहित विपक्षी नेताओं ने अमेरिका की रूसी तेल मंजूरी पर केंद्र सरकार पर निशाना साधा है। विपक्ष ने इस पूरे मुद्दे को भारत की विदेश नीति और राजनीतिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए तीखी आलोचना की है।
संजय राउत, सांसद, शिवसेना यूबीटी
- फोटो : ANI
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विस्तार
शिवसेना (यूबीटी) के सांसद संजय राउत ने अमेरिका द्वारा रूस से तेल खरीद के मामले में भारत को एक महीने की मोहलत दिए जाने पर तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। उन्होंने इस मुद्दे को भारत की विदेश नीति और राजनीतिक स्वतंत्रता से जोड़ते हुए कहा है कि किसी भी देश को यह तय करने का अधिकार नहीं मिलना चाहिए कि भारत कब और कितना तेल खरीदे।
विदेश नीति पर बाहरी दबाव की चिंता
मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा, 'यह बात समझ से परे है कि कोई दूसरा देश भारत को इस तरह 'परमिशन' दे।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसी अनुमति आमतौर पर एक ताकतवर देश अपने अधीन या कमजोर देश को देता है। अगर भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए एक महीने की छूट दी गई है, तो इसका मतलब है कि हमारी विदेश नीति कहीं न कहीं दूसरे देश के इशारों पर चल रही है। उन्होंने इसे भारत की राजनीतिक स्वायत्तता के लिए एक चिंताजनक संकेत बताया।
'अमेरिका के अधीन और गुलाम' होने का आरोप
संजय राउत ने आरोप लगाया कि रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति लेना यह दर्शाता है कि भारत अमेरिका के अधीन और गुलाम है। उन्होंने कहा, 'अब अमेरिका जो कहेगा भारत वही करेगा। विदेश नीति में हमारी कोई आवाज नहीं है, कोई भूमिका नहीं है।' वहीं संजय राउत ने आगे कहा कि अगर देश को ऊर्जा की जरूरत है और रूस से तेल खरीदना फायदेमंद है, तो इस पर फैसला भारत सरकार को खुद करना चाहिए, न कि किसी दूसरे देश की मंजूरी के आधार पर। उन्होंने भारत के राजनीतिक नेतृत्व और सरकार से इस मामले में एक स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाने की अपील की।
ये भी पढ़ें: Russia Oil: रूसी तेल खरीदना जारी रख सकेगा भारत! अमेरिका ने मॉस्को को दी 30 दिनों की मोहलत, कहा- ये अस्थायी कदम
कांग्रेस ने भी उठाए सवाल, सरकार को घेरा
इधर, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, 'ट्रेड डील के अनुसार हम आयात कर घटा रहे हैं और अमेरिका आयात कर बढ़ा रहा है। हमने ट्रेड डील में अमेरिका से वादा किया है कि हम कृषि के क्षेत्र में आयात कर हटाएंगे या घटाएंगे, तो वास्तविक है कि अमेरिका खुश होगा। रूस के तेल के बारे में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी का जो बयान आया है, वो बहुत आपत्तिजनक है। अमेरिका हमें सर्टिफिकेट देने वाला कौन होता है? यह हमारी संप्रभुता पर आक्रमण है। निक्सन और किसिंजर ने 1971 में यही भाषा इस्तेमाल की थी और इंदिरा गांधी ने करारा जवाब दिया था। हमारे प्रधानमंत्री के इस्राइल दौरे के ठीक 2 दिन बाद अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर लक्षित हमले किए। पूरी सरकार इस पर चुप है। ट्रेड डील के मुद्दे के साथ-साथ इसे भी संसद में उठाया जाएगा।'
ये भी पढ़ें: यूएस ने दी रूसी तेल खरीद पर 30 दिन की छूट: कांग्रेस ने साधा निशाना, जयराम रमेश बोले- कब तक चलेगा ये ब्लैकमेल
आरजेडी का तीखा हमला
अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के भारतीय रिफाइनर को रूसी तेल खरीदने की इजाजत देने के लिए 30 दिन की टेम्पररी छूट देने पर आरजेडी नेता मनोज कुमार झा निशाना साधा। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका राजनीति से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। हमारे विदेश मंत्री, पेट्रोलियम मिनिस्टर और प्रधानमंत्री मोदी कहां हैं।
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विदेश नीति पर बाहरी दबाव की चिंता
मीडिया से बातचीत करते हुए संजय राउत ने कहा, 'यह बात समझ से परे है कि कोई दूसरा देश भारत को इस तरह 'परमिशन' दे।' उन्होंने आगे कहा कि ऐसी अनुमति आमतौर पर एक ताकतवर देश अपने अधीन या कमजोर देश को देता है। अगर भारत को रूस से तेल खरीदने के लिए एक महीने की छूट दी गई है, तो इसका मतलब है कि हमारी विदेश नीति कहीं न कहीं दूसरे देश के इशारों पर चल रही है। उन्होंने इसे भारत की राजनीतिक स्वायत्तता के लिए एक चिंताजनक संकेत बताया।
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'अमेरिका के अधीन और गुलाम' होने का आरोप
संजय राउत ने आरोप लगाया कि रूस से तेल खरीदने के लिए अमेरिका से अनुमति लेना यह दर्शाता है कि भारत अमेरिका के अधीन और गुलाम है। उन्होंने कहा, 'अब अमेरिका जो कहेगा भारत वही करेगा। विदेश नीति में हमारी कोई आवाज नहीं है, कोई भूमिका नहीं है।' वहीं संजय राउत ने आगे कहा कि अगर देश को ऊर्जा की जरूरत है और रूस से तेल खरीदना फायदेमंद है, तो इस पर फैसला भारत सरकार को खुद करना चाहिए, न कि किसी दूसरे देश की मंजूरी के आधार पर। उन्होंने भारत के राजनीतिक नेतृत्व और सरकार से इस मामले में एक स्पष्ट और मजबूत रुख अपनाने की अपील की।
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कांग्रेस ने भी उठाए सवाल, सरकार को घेरा
इधर, कांग्रेस सांसद जयराम रमेश ने कहा, 'ट्रेड डील के अनुसार हम आयात कर घटा रहे हैं और अमेरिका आयात कर बढ़ा रहा है। हमने ट्रेड डील में अमेरिका से वादा किया है कि हम कृषि के क्षेत्र में आयात कर हटाएंगे या घटाएंगे, तो वास्तविक है कि अमेरिका खुश होगा। रूस के तेल के बारे में अमेरिकी ट्रेजरी सेक्रेटरी का जो बयान आया है, वो बहुत आपत्तिजनक है। अमेरिका हमें सर्टिफिकेट देने वाला कौन होता है? यह हमारी संप्रभुता पर आक्रमण है। निक्सन और किसिंजर ने 1971 में यही भाषा इस्तेमाल की थी और इंदिरा गांधी ने करारा जवाब दिया था। हमारे प्रधानमंत्री के इस्राइल दौरे के ठीक 2 दिन बाद अमेरिका और इस्राइल ने ईरान पर लक्षित हमले किए। पूरी सरकार इस पर चुप है। ट्रेड डील के मुद्दे के साथ-साथ इसे भी संसद में उठाया जाएगा।'
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आरजेडी का तीखा हमला
अमेरिकी ट्रेजरी डिपार्टमेंट के भारतीय रिफाइनर को रूसी तेल खरीदने की इजाजत देने के लिए 30 दिन की टेम्पररी छूट देने पर आरजेडी नेता मनोज कुमार झा निशाना साधा। न्यूज एजेंसी एएनआई से बात करते हुए उन्होंने कहा कि इसका राजनीति से कोई मतलब नहीं है। उन्होंने अपमानजनक भाषा का इस्तेमाल किया है। हमारे विदेश मंत्री, पेट्रोलियम मिनिस्टर और प्रधानमंत्री मोदी कहां हैं।
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