Pakistan Economic Crisis: दिल्ली स्थित हाई कमीशन पर पड़ी पाकिस्तान की आर्थिक तंगी की मार, बंद करना पड़ा स्कूल
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विस्तार
आर्थिक तंगी से जूझ रहे पाकिस्तान को भारत की राजधानी दिल्ली में पाकिस्तान हाई कमिशन की ओर से चलाए जाने वाले अपने स्कूल को आखिरकार बंद करना पड़ गया। कहने को तो पाकिस्तान हाई कमीशन ने इस स्कूल को बंद करने की वजह छात्रों के कम एडमिशन को बताया है। लेकिन हकीकत में ऐसा नहीं है। दरअसल देश की राजधानी दिल्ली में पाकिस्तान की ओर से चलाए जाने वाले अपने स्कूल के खर्चे तक वहन करने में आर्थिक संकट का सामना करना पड़ रहा था। हालात यह तक हो गए थे कि शिक्षकों के वेतन से लेकर कर्मचारियों की तनख्वाह पिछले एक साल से न दिए जाने का भी मामला सामने आया है। बदहाल हो चुकी आर्थिक स्थिति को लेकर पाकिस्तान सरकार ने खर्चों में कटौती करने के लिए आदेश दिए थे, जो ना सिर्फ पाकिस्तान बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों के दूतावासों और हाई कमीशन के मौजूद अधिकारियों के रहन-सहन से लेकर अन्य खर्चों में जबरदस्त कटौती करने को कहा गया था।
खर्चों में कटौती करने के आदेश दिए हैं इस्लामाबाद ने
पाकिस्तान के हाई कमीशन की ओर से दिल्ली में चलाए जाने वाले अपने स्कूल को आखिरकार बंद करना पड़ गया। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान हाई कमीशन को इस्लामाबाद से लगातार खर्चों में कटौती करने के निर्देश दिए जा रहे थे। दरअसल पाकिस्तान में लगातार गिर रही अर्थव्यवस्था के चलते महंगाई अपने चरम पर है। पाकिस्तान में एक डॉलर की कीमत तकरीबन 285 पाकिस्तानी रुपये से ज्यादा पहुंच चुकी है। पाकिस्तान में महंगाई और राजनैतिक अस्थिरता के चलते युद्ध की स्थिति बनी हुई है। ऐसे में पाकिस्तान सरकार ने न सिर्फ अपने देश, बल्कि दुनिया के अलग-अलग देशों में स्थित एस्टेब्लिशमेंट को खर्चों में कटौती करने के निर्देश दिए। उसी कड़ी में पाकिस्तान ने देश की राजधानी दिल्ली में चलाए जा रहे अपने हाई कमीशन के स्कूल को बंद करने का भी निर्णय ले लिया। सूत्रों का कहना है कि ऐसा नहीं है कि इस स्कूल में बच्चे नहीं आ रहे थे। लेकिन भारत में स्कूल खुला रखना और उसको चला पाना पाकिस्तान के लिए बहुत महंगा पड़ता जा रहा था। जिसके चलते पाकिस्तान हाई कमीशन की ओर से अप्रैल में स्कूल बंद होने और नौकरी से निकाले जाने का फरमान सुना दिया।
नहीं चला पा रहे थे दिल्ली में स्कूल
सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान हाई कमीशन के सलमान शरीफ की ओर से 31 मार्च को एक चिट्ठी जारी की जाती है। जिसमें स्कूल के बंद किए जाने का फरमान सुनाया जाता है। सूत्रों के मुताबिक यह वही दौर था जब पाकिस्तान में महंगाई और गिरती अर्थव्यवस्था के चलते त्राहि-त्राहि मची हुई थी। आलू, प्याज, टमाटर, दूध और सब्जियों समेत रोजाना की जरूरतों की लोगों के पहुंच से बाहर हो रही थीं। सूत्रों के मुताबिक पाकिस्तान ने विदेशों में अपने दूतावासों और हाई कमीशन के अधिकारियों को न सिर्फ खर्चे में कटौती करने के निर्देश दिए, बल्कि उन सभी सेटअप को बंद करने का निर्देश दिया, जिन्हें चला पाने में पाकिस्तान अच्छा महसूस कर रहा था। इसी कड़ी में पाकिस्तान ने दिल्ली में अपने हाई कमीशन के स्कूल को बंद करने का फैसला ले लिया।

अपने देश के भी लोग काम करते थे
सूत्रों के पाकिस्तान हाई कमीशन के इस स्कूल में अपने देश के भी सात-आठ लोग काम करते थे। इसमें कुछ शिक्षक और अन्य स्टाफ के लोग भी शामिल थे। जानकारी के मुताबिक आर्थिक तंगी का हाल यह हो चुका था कि पाकिस्तान हाई कमीशन अपने स्कूल के स्टाफ को वेतन तक नहीं दे पा रहा था। सूत्रों के मुताबिक वेतन का संकट पिछले एक साल से लगातार बना हुआ था। इसे लेकर स्कूल के कर्मचारियों ने पाकिस्तान हाई कमीशन के उच्चाधिकारियों से बात भी की थी। सूत्रों का कहना है कि पाकिस्तान हाई कमीशन ने 31 मार्च को स्कूल बंद होने का एक सर्कुलर भी जारी किया था।
अगले महीने डिफॉल्टर हो सकता है पाकिस्तान
पाकिस्तान की बदहाल आर्थिक व्यवस्था के चलते ही कई संगठनों ने अपनी रिपोर्ट्स में पहले ही चेतावनी दी थी कि पाकिस्तान की अर्थव्यवस्था डूबने के कगार पर है। रेटिंग एजेंसी मूडीज ने फरवरी में देश की क्रेडिट रेटिंग को घटा दिया था, जबकि इसी महीने में उसने कहा कि अगर पाकिस्तान अंतरराष्ट्रीय मुद्रा कोष से राहत पैकेज हासिल करने में विफल रहता है, तो वह जून तक डिफॉल्ट हो सकता है। पाकिस्तान के अर्थशास्त्रियों को लगता है कि पाकिस्तान को बचाने के लिए चीन और सऊदी अरब जरूर मदद करने को आगे आएंगे।