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ISI: यूपी चुनाव से पहले बड़े आतंकी हमले की साजिश रच रहा पाकिस्तान, खुफिया एजेंसियों को उलझाने के लिए रचा 'खेल'
आईएएनएस, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Thu, 30 Apr 2026 12:55 PM IST
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सार
खुफिया रिपोर्ट में खुलासा हुआ है कि पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई आगामी उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव में बड़ा आतंकी हमला करने की साजिश रच रही है। इसके लिए आईएसआई ने खतरनाक चाल चली है। आइए जानते हैं और क्या है खुफिया रिपोर्ट में....
पाकिस्तान।
- फोटो : AI
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विस्तार
भारतीय खुफिया एजेंसियों के मुताबिक पाकिस्तान की खुफिया एजेंसी आईएसआई उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनावों से पहले बड़े हमले की साजिश रच रही है और इसके लिए खतरनाक खतरनाक चाल चल रही है। खुफिया अधिकारियों का कहना है कि इस हमले से पहले आईएसआई, हमारी जांच एजेंसियों का ध्यान भटकाना चाहती है और इसके लिए प्रोपेगेंडा अभियान चलाया जा रहा है।
यूपी चुनाव के दौरान आतंकी हमले की फिराक में आईएसआई
एक अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बड़ा आयोजन है और इसके मद्देनजर बड़े आतंकी हमलों की साजिश रची जा रही है। इसके तहत आईएसआई समर्थित लोग देश में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाने और जासूसी जैसी गतिविधियों में शामिल हैं। इसका उद्देश्य संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाना है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, गतिविधियों में अचानक आई तेजी का मकसद भारतीय एजेंसियों को उलझाए रखना है, ताकि बड़े हमले को अंजाम दिया जा सके।
सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की नापाक चाल
अधिकारियों ने यह भी आशंका जताई है कि आईएसआई देश का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की भी साजिश रच रही है। कई इंटरसेप्ट्स से संकेत मिले हैं कि प्रोपेगेंडा चैनलों को सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए सक्रिय किया गया है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आईएसआई की नजर सिर्फ बड़े शहरों पर नहीं, बल्कि छोटे शहरों और गांवों पर भी है, ताकि एजेंसियों को भ्रमित कर अचानक हमला किया जा सके।
हाल ही में गाजियाबाद पुलिस ने एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जो रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगा रहा था। ये सोलर पावर्ड कैमरे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को लाइव फीड देने के लिए लगाए जा रहे थे, जिसके बाद देशभर में सीसीटीवी कैमरों का ऑडिट शुरू किया गया। एजेंसियों को आशंका है कि ऐसे कैमरे बड़ी संख्या में पहले ही जुटा लिए गए हैं और चुनाव से पहले इन्हें सड़क किनारे ढाबों व दुकानों पर लगाया जा सकता है, ताकि चुनाव प्रचार के दौरान बड़े नेताओं की आवाजाही पर नजर रखी जा सके।
खुफिया एजेंसियों का ध्यान भटकाने की चाल चल रही आईएसआई
अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इस बार उत्तर प्रदेश के बजाय अन्य राज्यों के लोगों का इस्तेमाल हमलों में कर सकती है, ताकि स्थानीय पुलिस को हमलों की भनक तक न लगे। एजेंसियों का मानना है कि अलग-अलग राज्यों में जासूसी और आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बावजूद सतर्कता के साथ नजर बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि ध्यान भटकाने की रणनीति के पीछे बड़ी साजिश छिपी हो सकती है।
आतंकी हमलों को घरेलू दिखाने की साजिश
विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसआई की कोशिश है कि भारत में होने वाले हमलों को घरेलू दिखाया जाए, ताकि पाकिस्तान पर सीधे आरोप न आएं। दरअसल आतंकी वित्तपोषण को लेकर पाकिस्तान एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) के निशाने पर है। आईएसआई पर पहले भी ड्रग्स और आतंकी गतिविधियां संचालित करने के आरोप लगते रहे हैं। यही वजह है कि प्रतिबंध से बचने के लिए आईएसआई हर हमले को स्थानीय दिखाने की कोशिश करेगी। भारत ने भी अपनी रणनीति को आक्रामक करते हुए हर आतंकी हमले को युद्ध मानने का एलान कर दिया है, जिसके चलते भी आईएसआई ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।
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यूपी चुनाव के दौरान आतंकी हमले की फिराक में आईएसआई
एक अधिकारी ने बताया कि उत्तर प्रदेश विधानसभा चुनाव बड़ा आयोजन है और इसके मद्देनजर बड़े आतंकी हमलों की साजिश रची जा रही है। इसके तहत आईएसआई समर्थित लोग देश में जगह-जगह सीसीटीवी कैमरे लगाने और जासूसी जैसी गतिविधियों में शामिल हैं। इसका उद्देश्य संवेदनशील स्थानों की जानकारी जुटाना है। इंटेलिजेंस ब्यूरो के एक अधिकारी के अनुसार, गतिविधियों में अचानक आई तेजी का मकसद भारतीय एजेंसियों को उलझाए रखना है, ताकि बड़े हमले को अंजाम दिया जा सके।
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सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की नापाक चाल
अधिकारियों ने यह भी आशंका जताई है कि आईएसआई देश का सांप्रदायिक सौहार्द बिगाड़ने की भी साजिश रच रही है। कई इंटरसेप्ट्स से संकेत मिले हैं कि प्रोपेगेंडा चैनलों को सांप्रदायिक तनाव भड़काने के लिए सक्रिय किया गया है। एक अन्य अधिकारी ने कहा कि आईएसआई की नजर सिर्फ बड़े शहरों पर नहीं, बल्कि छोटे शहरों और गांवों पर भी है, ताकि एजेंसियों को भ्रमित कर अचानक हमला किया जा सके।
हाल ही में गाजियाबाद पुलिस ने एक मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया था, जो रेलवे स्टेशनों और अन्य संवेदनशील स्थानों पर सीसीटीवी कैमरे लगा रहा था। ये सोलर पावर्ड कैमरे पाकिस्तान स्थित हैंडलर्स को लाइव फीड देने के लिए लगाए जा रहे थे, जिसके बाद देशभर में सीसीटीवी कैमरों का ऑडिट शुरू किया गया। एजेंसियों को आशंका है कि ऐसे कैमरे बड़ी संख्या में पहले ही जुटा लिए गए हैं और चुनाव से पहले इन्हें सड़क किनारे ढाबों व दुकानों पर लगाया जा सकता है, ताकि चुनाव प्रचार के दौरान बड़े नेताओं की आवाजाही पर नजर रखी जा सके।
खुफिया एजेंसियों का ध्यान भटकाने की चाल चल रही आईएसआई
अधिकारियों के मुताबिक पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई इस बार उत्तर प्रदेश के बजाय अन्य राज्यों के लोगों का इस्तेमाल हमलों में कर सकती है, ताकि स्थानीय पुलिस को हमलों की भनक तक न लगे। एजेंसियों का मानना है कि अलग-अलग राज्यों में जासूसी और आतंकी मॉड्यूल का भंडाफोड़ होने के बावजूद सतर्कता के साथ नजर बनाए रखना जरूरी है, क्योंकि ध्यान भटकाने की रणनीति के पीछे बड़ी साजिश छिपी हो सकती है।
आतंकी हमलों को घरेलू दिखाने की साजिश
विशेषज्ञों का कहना है कि आईएसआई की कोशिश है कि भारत में होने वाले हमलों को घरेलू दिखाया जाए, ताकि पाकिस्तान पर सीधे आरोप न आएं। दरअसल आतंकी वित्तपोषण को लेकर पाकिस्तान एफएटीएफ (फाइनेंशियल एक्शन टास्क फोर्स) के निशाने पर है। आईएसआई पर पहले भी ड्रग्स और आतंकी गतिविधियां संचालित करने के आरोप लगते रहे हैं। यही वजह है कि प्रतिबंध से बचने के लिए आईएसआई हर हमले को स्थानीय दिखाने की कोशिश करेगी। भारत ने भी अपनी रणनीति को आक्रामक करते हुए हर आतंकी हमले को युद्ध मानने का एलान कर दिया है, जिसके चलते भी आईएसआई ने अपनी रणनीति में बदलाव किया है।
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