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पाकिस्तान की नई साजिश: ग्राफिटी और प्रोपेगेंडा के सहारे भारतीय युवाओं का ब्रेनवॉश, आईएसआई का सॉफ्ट टेरर प्लान
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Thu, 04 Jun 2026 03:58 PM IST
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सार
ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी से बौखलाया पाकिस्तान अब भारत में घुसपैठ न कर पाने के कारण 'सॉफ्ट टेरर' और 'ग्राफिटी वार' का सहारा ले रहा है। आईएसआई सीमावर्ती राज्यों के भ्रमित युवाओं और ड्रग एडिक्ट्स को पैसे देकर दीवारों पर भारत विरोधी नारे और टीटीएच जैसे फर्जी संगठन के नाम लिखवा रही है, जिससे देश में भ्रम और अशांति फैलाई जा सके।
जनरल असीम मुनीर
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारतीय सुरक्षा बलों के कड़े एक्शन से बौखलाया पाकिस्तान अब सीधे हमले के बजाय 'सॉफ्ट टेरर' पर उतर आया है। खुफिया रिपोर्ट के मुताबिक, ऑपरेशन सिंदूर में मिली करारी शिकस्त और शर्मिंदगी को छिपाने के लिए पाकिस्तानी सेना के फील्ड मार्शल असीम मुनीर ने भारत के खिलाफ यह नई साजिश रची है। कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले का बदला लेने के लिए भारत ने इस ऑपरेशन को अंजाम दिया था। इसके बाद से सीमा पर घुसपैठ पूरी तरह ठप है और पाकिस्तान के कई आतंकी मॉड्यूल ध्वस्त हो चुके हैं।
झूठे संगठन की आड़ में खतरनाक नैरेटिव
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अब भारत के खिलाफ एक फर्जी प्रोपेगेंडा कैंपेन चला रही है। इसका मुख्य मकसद भारत में 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (टीटीएच) नाम के एक काल्पनिक और गैर-मौजूद संगठन को खड़ा करना है। पाकिस्तान इस फर्जी संगठन का संबंध 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (टीटीपी) से जोड़कर दुनिया को दिखाना चाहता है कि इसे भारत ने बनाया है। दरअसल, पाकिस्तान में टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने वहां के सुरक्षा बलों की नाक में दम कर रखा है। वहां चीनी निवेश पर भी लगातार हमले हो रहे हैं। अपनी इसी नाकामी और चीन के बढ़ते दबाव को छिपाने के लिए असीम मुनीर भारत पर झूठे आरोप मढ़ रहे हैं।
यह भी पढ़ें: UP: पाकिस्तानी गैंगस्टर्स-आईएसआई से जुड़ा आतंकी गिरफ्तार, महिला नेता को निशाना बनाने वाला था; ये था प्लान
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सीमावर्ती राज्यों के युवाओं को निशाना बनाने की साजिश
खुफिया विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई भारत के सीमावर्ती राज्यों में कॉलेज जाने वाले और सीधे-सरल युवाओं को बरगलाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए मुख्य रूप से नशे के आदी युवाओं को आसान निशाना बनाया जा रहा है, जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती है। इन युवाओं को मामूली रकम देकर रेलवे स्टेशनों, सरकारी दफ्तरों, बस स्टैंडों और कॉलेजों की दीवारों पर भारत विरोधी ग्राफिटी (दीवारों पर लिखना और चित्र बनाना) बनाने का काम सौंपा जा रहा है।
देश में पैनिक और असंतोष पैदा करने का लक्ष्य
इस ग्राफिटी वॉर का मकसद भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर झूठी कहानियां फैलाना और कश्मीर व खालिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दों को हवा देना है। आईएसआई का इरादा हथियारों या बमों से नुकसान पहुंचाने का नहीं, बल्कि युवाओं की सोच पर हमला करना है। नियमित अंतराल पर दिखने वाली यह ग्राफिटी देश में डर का माहौल पैदा कर सकती है, जिससे छात्र और युवा सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों पर उतर आएं। हालांकि, भारतीय एजेंसियां सीमावर्ती राज्यों में भर्ती की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रही हैं।
झूठे संगठन की आड़ में खतरनाक नैरेटिव
पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आईएसआई अब भारत के खिलाफ एक फर्जी प्रोपेगेंडा कैंपेन चला रही है। इसका मुख्य मकसद भारत में 'तहरीक-ए-तालिबान हिंदुस्तान' (टीटीएच) नाम के एक काल्पनिक और गैर-मौजूद संगठन को खड़ा करना है। पाकिस्तान इस फर्जी संगठन का संबंध 'तहरीक-ए-तालिबान पाकिस्तान' (टीटीपी) से जोड़कर दुनिया को दिखाना चाहता है कि इसे भारत ने बनाया है। दरअसल, पाकिस्तान में टीटीपी और बलूचिस्तान लिबरेशन आर्मी (बीएलए) ने वहां के सुरक्षा बलों की नाक में दम कर रखा है। वहां चीनी निवेश पर भी लगातार हमले हो रहे हैं। अपनी इसी नाकामी और चीन के बढ़ते दबाव को छिपाने के लिए असीम मुनीर भारत पर झूठे आरोप मढ़ रहे हैं।
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खुफिया विभाग के अधिकारियों के अनुसार, आईएसआई भारत के सीमावर्ती राज्यों में कॉलेज जाने वाले और सीधे-सरल युवाओं को बरगलाने की कोशिश कर रही है। इसके लिए मुख्य रूप से नशे के आदी युवाओं को आसान निशाना बनाया जा रहा है, जिन्हें पैसों की सख्त जरूरत होती है। इन युवाओं को मामूली रकम देकर रेलवे स्टेशनों, सरकारी दफ्तरों, बस स्टैंडों और कॉलेजों की दीवारों पर भारत विरोधी ग्राफिटी (दीवारों पर लिखना और चित्र बनाना) बनाने का काम सौंपा जा रहा है।
देश में पैनिक और असंतोष पैदा करने का लक्ष्य
इस ग्राफिटी वॉर का मकसद भारत के मानवाधिकार रिकॉर्ड पर झूठी कहानियां फैलाना और कश्मीर व खालिस्तान जैसे संवेदनशील मुद्दों को हवा देना है। आईएसआई का इरादा हथियारों या बमों से नुकसान पहुंचाने का नहीं, बल्कि युवाओं की सोच पर हमला करना है। नियमित अंतराल पर दिखने वाली यह ग्राफिटी देश में डर का माहौल पैदा कर सकती है, जिससे छात्र और युवा सरकार के खिलाफ हिंसक प्रदर्शनों पर उतर आएं। हालांकि, भारतीय एजेंसियां सीमावर्ती राज्यों में भर्ती की हर गतिविधि पर पैनी नजर रख रही हैं।