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बजट सत्र विस्तार पर रार: कांग्रेस बोली- संसद का दुरुपयोग कर रही सरकार, राज्यों में विधानसभा चुनाव की दी दलील

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: Himanshu Singh Chandel Updated Fri, 03 Apr 2026 03:45 PM IST
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सार

Congress: केंद्र सरकार द्वारा चुनाव के बीच संसद का विशेष सत्र बुलाने पर कांग्रेस ने कई आरोप लगाए हैं। पार्टी का कहना है कि बंगाल और तमिलनाडु चुनाव में फायदा लेने के लिए उठाया गया। महिलाओं के आरक्षण कानून और परिसीमन को लेकर सरकार की जल्दबाजी पर सवाल उठाए गए। विपक्ष इसे लोकतांत्रिक प्रक्रिया और आचार संहिता के खिलाफ बता रहा है।

Parliament Special Session Amidst Bengal Tamil Nadu Elections Congress Alleges Used of Political Power
जयराम रमेश, कांग्रेस नेता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार

पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु में चुनावी माहौल के बीच केंद्र सरकार द्वारा संसद का विशेष सत्र बुलाने को लेकर सियासत तेज हो गई है। कांग्रेस ने आरोप लगाया है कि सरकार इस कदम के जरिए चुनाव में राजनीतिक फायदा उठाना चाहती है। पार्टी का कहना है कि यह आचार संहिता का खुला उल्लंघन है और लोकतांत्रिक प्रक्रिया को प्रभावित करने की कोशिश है।

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कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने कहा कि सरकार महिलाओं के आरक्षण कानून और परिसीमन से जुड़े विधेयकों को जल्दबाजी में लाकर चुनावी लाभ लेना चाहती है। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार ने 2023 में कानून पास होने के बाद 30 महीने तक कोई कदम नहीं उठाया और अब चुनाव के समय इसे आगे बढ़ाया जा रहा है।
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क्या चुनावी फायदा लेने के लिए बुलाया गया सत्र?
जयराम रमेश ने कहा कि सरकार का असली उद्देश्य पश्चिम बंगाल और तमिलनाडु के चुनाव को प्रभावित करना है। उन्होंने सवाल उठाया कि अगर यह इतना जरूरी था तो 15 दिन बाद सत्र क्यों नहीं बुलाया गया। उनके मुताबिक यह कदम सीधे-सीधे राजनीतिक लाभ लेने की रणनीति है।

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क्या परिसीमन से राज्यों का संतुलन बिगड़ेगा?
कांग्रेस ने परिसीमन को लेकर भी चिंता जताई है। रमेश ने कहा कि प्रस्तावित बदलाव से छोटे राज्यों और दक्षिण भारत के राज्यों को भारी नुकसान हो सकता है। उनका दावा है कि उत्तर प्रदेश की लोकसभा सीटें 120 तक जा सकती हैं, जबकि केरल जैसे राज्यों की संख्या बहुत कम बढ़ेगी।

क्या सरकार ने बिना जानकारी के फैसला लिया?
कांग्रेस का आरोप है कि परिसीमन को लेकर सरकार की ओर से कोई आधिकारिक जानकारी नहीं दी गई। रमेश ने कहा कि ऑफ रिकॉर्ड जानकारी मिली है, लेकिन संसद में इस पर कोई स्पष्ट प्रस्ताव नहीं रखा गया। इससे सरकार की मंशा पर सवाल खड़े होते हैं।

क्या विपक्ष को साथ लिए बिना बढ़ाया गया कदम?
कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे और नेता राहुल गांधी ने विपक्षी दलों की बैठक बुलाने का फैसला किया है। कांग्रेस का कहना है कि सरकार डिवाइड एंड रूल की नीति पर काम कर रही है और सभी दलों को साथ लेकर नहीं चलना चाहती।

क्या संसदीय प्रक्रिया का पालन हुआ?
रमेश ने बताया कि संसदीय कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने कांग्रेस को बातचीत के लिए पत्र लिखा था, लेकिन कांग्रेस ने सभी दलों की बैठक की मांग की। इसके बावजूद सरकार ने एकतरफा निर्णय लेकर सत्र बुला लिया। राज्यसभा में इस मुद्दे पर पहले ही सरकार और विपक्ष के बीच तीखी बहस हो चुकी है। नेता सदन जेपी नड्डा ने कहा कि सरकार को कानून लाने का अधिकार है, जबकि विपक्ष ने इसे दबाव की राजनीति बताया।

क्या आगे और बढ़ेगा राजनीतिक विवाद?
16 अप्रैल से शुरू होने वाला यह सत्र तीन दिन तक चल सकता है। इसमें महिलाओं के आरक्षण कानून में संशोधन और लोकसभा सीटों को 543 से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव लाया जा सकता है। चुनावी माहौल में यह मुद्दा और बड़ा राजनीतिक टकराव बन सकता है।

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