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सख्ती: नकली कीटनाशकों का कारोबार करने पर होगी तीन साल तक कैद, विधेयक का मसौदा तैयार; चार फरवरी तक मांगे सुझाव
अजीत खरे, नई दिल्ली।
Published by: निर्मल कांत
Updated Fri, 16 Jan 2026 06:58 AM IST
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सार
नकली और खतरनाक कीटनाशकों पर अब कड़ी कार्रवाई होगी। अपराधियों को तीन साल तक जेल या भारी जुर्माना भुगतना पड़ सकता है और गंभीर नुकसान होने पर सजा और भी कठोर होगी। नया कीटनाशक प्रबंधन विधेयक किसानों और उपभोक्ताओं को सुरक्षित, गुणवत्तापूर्ण उत्पाद सुनिश्चित करेगा और पर्यावरण की सुरक्षा भी करेगा। पढ़िए रिपोर्ट-
खेत में कीटनाशक का छिड़काव (सांकेतिक तस्वीर)।
- फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
नकली, खतरनाक व अधोमानक कीटनाशकों का कारोबार करने वालों को अब कड़ी सजा मिलेगी। इस तरह के कीटनाशकों का निर्माण करने, कारोबार करने, आयात करने, बेचने वालों को तीन साल तक जेल की सजा या 10 लाख रुपये से 40 लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ सकता है। या दोनों सजाएं भुगतनी पड़ सकती हैं। कीटनाशकों के इस कारोबार से अगर किसी मृत्यु हो जाती है या गंभीर चोट लगती है 10 लाख रुपये से 50 लाख रुपये तक जुर्माना या पांच साल की जेल या दोनों की सजा मिल सकती है।
यही नहीं कीटनाशक अगर सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं या लाइसेंस व प्रमाणपत्र लेने में नियमों का उल्लंघन पाया गया तो 50 हजार रुपये से दो लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ेगा। जुर्माने की रकम पर अंतिम निर्णय सरकार बाद में करेगी। यह रकम कम या ज्यादा करने का अधिकार भी केंद्र सरकार के पास रहेगा। इस संबंध में केंद्र सरकार नया कीटनाशक प्रबंधन एक्ट लाने की तैयारी में है। इसके लिए कृषि मंत्रालय ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 के मसौदा तैयार किया है और इस पर जनता से 4 फरवरी तक अपने सुझाव मांगे हैं।
ये भी पढ़ें: गुजराती में आदि शंकराचार्य की ग्रंथावली का विमोचन, शाह बोले- स्थापित की भारत की ज्ञान परंपरा
हानिकारक रसायनों की होगी रोकथाम...
मसौदे के मुताबिक कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशालाओं का अनिवार्य रूप से एक्रीडियेशन होगा ताकि किसानों को केवल गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक ही उपलब्ध रहें। नया कानून किसानों को असली उत्पाद उपलब्ध कराएगा। इससे हानिकारक रसायनों पर रोकथाम हो सकेगी और कृषि उत्पादन बढ़ेगा। जेल, जुर्माने और लाइसेंस रद्द करने जैसे दंडों का प्रावधान भी इसमें किया गया है। इसमें प्रवर्तन तंत्र की भी जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।
कीटनाशक बोर्ड और समिति का होगा गठन
केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड व पंजीकरण समिति का गठन होगा। यह तंत्र कीटनाशकों के जरिए विषाक्तता की घटनाओं को रोकने की दिशा में काम करेगा। प्रस्तावित मसौदे में लाइसेंसिंग, लेबलिंग, सुरक्षित निपटान और दंडात्मक उपायों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। इससे किसानों व उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी, साथ ही पर्यावरण की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। इस विधेयक के तहत निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग आवश्यक है। कीटनाशकों को बाजार में आने से पहले पंजीकृत कराना होगा। निर्धारित मानकों को पूरा कर ने वाले कीटनाशक ही बाजार में बेचे जा सकेंगे।
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यही नहीं कीटनाशक अगर सुरक्षा मानकों पर खरे नहीं उतरते हैं या लाइसेंस व प्रमाणपत्र लेने में नियमों का उल्लंघन पाया गया तो 50 हजार रुपये से दो लाख रुपये तक जुर्माना देना पड़ेगा। जुर्माने की रकम पर अंतिम निर्णय सरकार बाद में करेगी। यह रकम कम या ज्यादा करने का अधिकार भी केंद्र सरकार के पास रहेगा। इस संबंध में केंद्र सरकार नया कीटनाशक प्रबंधन एक्ट लाने की तैयारी में है। इसके लिए कृषि मंत्रालय ने कीटनाशक प्रबंधन विधेयक, 2025 के मसौदा तैयार किया है और इस पर जनता से 4 फरवरी तक अपने सुझाव मांगे हैं।
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हानिकारक रसायनों की होगी रोकथाम...
मसौदे के मुताबिक कीटनाशक परीक्षण प्रयोगशालाओं का अनिवार्य रूप से एक्रीडियेशन होगा ताकि किसानों को केवल गुणवत्तापूर्ण कीटनाशक ही उपलब्ध रहें। नया कानून किसानों को असली उत्पाद उपलब्ध कराएगा। इससे हानिकारक रसायनों पर रोकथाम हो सकेगी और कृषि उत्पादन बढ़ेगा। जेल, जुर्माने और लाइसेंस रद्द करने जैसे दंडों का प्रावधान भी इसमें किया गया है। इसमें प्रवर्तन तंत्र की भी जवाबदेही सुनिश्चित की गई है।
कीटनाशक बोर्ड और समिति का होगा गठन
केंद्रीय कीटनाशक बोर्ड व पंजीकरण समिति का गठन होगा। यह तंत्र कीटनाशकों के जरिए विषाक्तता की घटनाओं को रोकने की दिशा में काम करेगा। प्रस्तावित मसौदे में लाइसेंसिंग, लेबलिंग, सुरक्षित निपटान और दंडात्मक उपायों पर अधिक ध्यान केंद्रित किया गया है। इससे किसानों व उपभोक्ताओं के हितों की रक्षा होगी, साथ ही पर्यावरण की रक्षा भी सुनिश्चित होगी। इस विधेयक के तहत निर्माताओं, वितरकों और खुदरा विक्रेताओं के लिए अनिवार्य लाइसेंसिंग आवश्यक है। कीटनाशकों को बाजार में आने से पहले पंजीकृत कराना होगा। निर्धारित मानकों को पूरा कर ने वाले कीटनाशक ही बाजार में बेचे जा सकेंगे।
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