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पीयूष गोयल ने व्यापार जगत से की अपील: कहा- उद्योग और सरकार मिलकर बढ़ाएं कदम; तभी बनेगा विकसित भारत
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Tue, 19 May 2026 03:32 PM IST
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सार
दुनिया भले ही भू-राजनीतिक तनाव और आर्थिक अनिश्चितता से जूझ रही हो, लेकिन भारत इसे थमने की वजह नहीं, बल्कि बड़ी छलांग लगाने का मौका मानता है। दृढ़ राजनीतिक इच्छाशक्ति, मजबूत डिजिटल बुनियादी ढांचे और अपनी युवा शक्ति के दम पर देश हर वैश्विक संकट को पीछे छोड़ 'विकसित भारत 2047' के नए रास्ते तैयार करने के लिए पूरी तरह कमर कस चुका है।
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
केंद्रीय वाणिज्य और उद्योग मंत्री पीयूष गोयल ने देश के आर्थिक विकास को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने मंगलवार को नई दिल्ली में आयोजित 'एसोचैम इंडिया बिजनेस रिफॉर्म समिट 2026' को संबोधित किया। इस दौरान उन्होंने व्यापार को आसान बनाने ईज ऑफ डूइंग बिजनेस के लिए उद्योग जगत और सरकार के बीच गहरे तालमेल की आवश्यकता पर बात की। केंद्रीय मंत्री ने कहा कि यह कदम भारत की वैश्विक प्रतिस्पर्धात्मकता को बढ़ाने और साल 2047 तक 'विकसित भारत' के लक्ष्य को तेजी से हासिल करने के लिए बेहद जरूरी है।
वैश्विक संकटों को विकास के अवसर में बदलने की जरूरत
पीयूष गोयल ने वैश्विक मंचों पर जारी मौजूदा उथल-पुथल और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को लेकर कहा कि भारत को इन परिस्थितियों से घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय इसे एक बड़े अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। इस संकट काल का उपयोग देश की व्यावसायिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने, आंतरिक सुधारों को गति देने और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण के लिए किया जाना चाहिए। भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी किसी संकट को व्यर्थ नहीं जाने दिया है। देश मौजूदा वैश्विक जोखिमों को भी विकास के नए रास्तों में बदलने का पूरा माद्दा रखता है।
यह भी पढ़ें: Supreme Court: रेबीज और गंभीर रूप से बीमार कुत्तों को मारने का निर्देश, सुप्रीम कोर्ट ने दी अनुमति
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पश्चिम एशिया संकट के बीच सतर्कता बरतने की सलाह
पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनाव पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने भारतीय उद्योग जगत को सचेत रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कारोबारियों को बिना किसी घबराहट और डर के बाजार के जोखिमों और नए अवसरों दोनों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। भारत ने अतीत में कोविड-19 जैसी अप्रत्याशित और गंभीर चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। महामारी के दौर से देश ने बहुत कुछ सीखा है। उस कठिन समय ने हमें सिखाया कि डिजिटल जुड़ाव और रिमोट वर्किंग मॉडल कितने प्रभावी हो सकते हैं।
औद्योगिक दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत से ज्यादा स्मार्ट और कुशल व्यावसायिक तौर-तरीके अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपने कामकाज में बर्बादी को कम करना होगा। इसके साथ ही उत्पादकता में सुधार लाने और ऊर्जा दक्षता के उपायों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। ये सभी कदम भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स बने रोजगार के बड़े इंजन
देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के तेजी से होते विस्तार पर पीयूष गोयल ने खुशी जताई। उन्होंने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए बताया कि इस समय भारत में लगभग 1,800 जीसीसी काम कर रहे हैं। ये सेंटर्स देश के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा जरिया बन चुके हैं। इनसे करीब 20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। इसके साथ ही लगभग एक करोड़ लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रही हैं। भारत के पास हुनरमंद और ऊर्जावान युवाओं की विशाल आबादी है, जो वैश्विक परिचालन को संभालने में पूरी तरह सक्षम है।
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वैश्विक संकटों को विकास के अवसर में बदलने की जरूरत
पीयूष गोयल ने वैश्विक मंचों पर जारी मौजूदा उथल-पुथल और भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं को लेकर कहा कि भारत को इन परिस्थितियों से घबराने की जरूरत नहीं है। इसके बजाय इसे एक बड़े अवसर के रूप में देखा जाना चाहिए। इस संकट काल का उपयोग देश की व्यावसायिक प्रक्रियाओं को मजबूत करने, आंतरिक सुधारों को गति देने और मजबूत आपूर्ति श्रृंखला के निर्माण के लिए किया जाना चाहिए। भारत और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने कभी भी किसी संकट को व्यर्थ नहीं जाने दिया है। देश मौजूदा वैश्विक जोखिमों को भी विकास के नए रास्तों में बदलने का पूरा माद्दा रखता है।
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पश्चिम एशिया संकट के बीच सतर्कता बरतने की सलाह
पश्चिम एशिया में जारी मौजूदा तनाव पर बोलते हुए केंद्रीय मंत्री ने भारतीय उद्योग जगत को सचेत रहने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि कारोबारियों को बिना किसी घबराहट और डर के बाजार के जोखिमों और नए अवसरों दोनों पर पैनी नजर रखनी चाहिए। भारत ने अतीत में कोविड-19 जैसी अप्रत्याशित और गंभीर चुनौतियों का सफलतापूर्वक सामना किया है। महामारी के दौर से देश ने बहुत कुछ सीखा है। उस कठिन समय ने हमें सिखाया कि डिजिटल जुड़ाव और रिमोट वर्किंग मॉडल कितने प्रभावी हो सकते हैं।
औद्योगिक दक्षता और उत्पादकता बढ़ाने पर जोर
केंद्रीय मंत्री ने उद्योग जगत से ज्यादा स्मार्ट और कुशल व्यावसायिक तौर-तरीके अपनाने की अपील की। उन्होंने कहा कि कंपनियों को अपने कामकाज में बर्बादी को कम करना होगा। इसके साथ ही उत्पादकता में सुधार लाने और ऊर्जा दक्षता के उपायों को प्राथमिकता देने की जरूरत है। ये सभी कदम भारतीय कंपनियों को वैश्विक स्तर पर अधिक टिकाऊ और प्रतिस्पर्धी बनाएंगे।
ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स बने रोजगार के बड़े इंजन
देश में ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स (जीसीसी) के तेजी से होते विस्तार पर पीयूष गोयल ने खुशी जताई। उन्होंने महत्वपूर्ण आंकड़े साझा करते हुए बताया कि इस समय भारत में लगभग 1,800 जीसीसी काम कर रहे हैं। ये सेंटर्स देश के युवाओं के लिए रोजगार का बड़ा जरिया बन चुके हैं। इनसे करीब 20 लाख लोगों को प्रत्यक्ष रोजगार मिला हुआ है। इसके साथ ही लगभग एक करोड़ लोगों को अप्रत्यक्ष रोजगार मिला है। अंतरराष्ट्रीय कंपनियां अब भारत को एक भरोसेमंद साझेदार के रूप में देख रही हैं। भारत के पास हुनरमंद और ऊर्जावान युवाओं की विशाल आबादी है, जो वैश्विक परिचालन को संभालने में पूरी तरह सक्षम है।