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PM Modi: 'युद्ध ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को झटका दिया, इसका असर लंबे समय तक रहेगा', राज्यसभा में बोले पीएम मोदी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: Nitin Gautam
Updated Tue, 24 Mar 2026 01:59 PM IST
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सार
प्रधानमंत्री ने पश्चिम एशिया संकट पर आज राज्यसभा में जानकारी दी। इस दौरान पीएम मोदी ने कहा कि इस युद्ध का असर पूरी दुनिया की अर्थव्यवस्था पर हुआ है, लेकिन हमारी अर्थव्यवस्था मजबूत है और सरकार पूरी गंभीरता से इस संकट से निपटने के लिए रणनीति बना रही है।
पश्चिम एशिया संकट पर राज्यसभा में पीएम मोदी का वक्तव्य
- फोटो : संसद टीवी / अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
प्रधानमंत्री मोदी आज पश्चिम एशिया संकट को लेकर राज्यसभा में जानकारी दे रहे हैं। इससे पहले सोमवार को प्रधानमंत्री मोदी ने लोकसभा में अपनी बात रखी थी। प्रधानमंत्री मोदी ने राज्यसभा में कहा, पश्चिम एशिया में चल रहे युद्ध और उससे बनी परिस्थितियों से हम सभी परिचित हैं। मैं आज संसद के उच्च सदन और देशवासियों के सामने इन विकट परिस्थितियों पर सरकार का पक्ष रखने के लिए पेश हुआ हूं। इस युद्ध ने पूरे विश्व में ऊर्जा संकट पैदा कर दिया है। भारत के लिए भी ये स्थिति चिंताजनक है।
'होर्मुज स्ट्रेट को बाधित किया जाना अस्वीकार्य'
पीएम मोदी ने कहा, 'इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। पेट्रोल-डीजल, गैस और उर्वरकों जैसे जरूरी सामानों की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं। यह भारत के लिए बड़ी चिंता है। होर्मुज में भारत के कई जहाज फंसे हैं, उनमें बड़ी संख्या में चालक दल के भारतीय सदस्य हैं। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए। युद्ध की शुरुआत से बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की बातचीत की है। हम ईरान, इस्राइल और अमेरिका के साथ संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य संवाद कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने होर्मुज को खोलने के लिए बात की है। व्यवसायिक जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट बाधित किया जाना अस्वीकार्य है। भारत ने नागरिकों, असैन्य ढांचों और ऊर्जा से जुड़ी बुनियादी संरचना पर हमलों का विरोध किया है। भारत डिप्लोमैसी के जरिए भारतीय जहाजों की आवाजाही के लिए सतत प्रयास कर रहा है। भारत ने समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है।'
युद्ध के बाद से लाखों भारतीय सुरक्षित भारत लौटे
'इस युद्ध में किसी भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है। भारत का सतत प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है। संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। युद्ध के बाद से तीन लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से एक हजार से अधिक भारतीय भारतीय भारत लौटे हैं। इनमें सात सौ से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र हैं। सभी देशों ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। यह बहुत दुखद है कि हमलों के कारण कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई है, कुछ गायब हुए हैं। ऐसे में परिजनों को हरसंभव मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज किया जा रहा है।'
'होर्मुज संकट पर संवाद के माध्यम से रास्ते बनाने के प्रयास कर रहे'
'होर्मुज विश्व व्यापार के लिए बेहद अहम है। विशेषतौर पर क्रूड और उर्वरक से जुड़ा परिवहन इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में होता है। युद्ध से इस क्षेत्र से आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद के माध्यम से रास्ते बनाने का प्रयास किया है। हमारी कोशिश है जहां से भी संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई आसानी से भारत पहुंचे। बीते कुछ दिनों में दुनिया के अनेक देशों से कच्चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं। आने वाले दिनों में भी ये प्रयास जारी रहेंगे। लेकिन युद्ध से बनी परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहती है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इसलिए भारत ने अपनी लचीलापन बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास किए हैं, उन्हें गति दी जा रही है।'
अब भारत 41 देशों से तेल-गैस का आयात कर रहा
पीएम मोदी ने कहा, 'कोई भी संकट हमारे हौंसलों और प्रयासों की परीक्षा लेता है। देश ऐसे संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सके, इसके लिए बीते 11 वर्षों में लगातार प्रयास किए गए हैं। एनर्जी आयात का विविधीकरण किया गया है। पहले गैस और कच्चा तेल 27 देशों से आयात किया जाता था आज भारत 41 देशों से तेल और गैस आयात करता है। भारत ने कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है। पिछले 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक पेट्रोलियम रिजर्व फील्ड बनाया गया है। साथ ही भारत की रिफाइनरी क्षमता भी अच्छी खासी बढ़ाई गई है। भारत के पास कच्चे तेल के पर्याप्त स्टोरेज और सप्लाई की क्षमता है।'
व्यापार के लिए मेड इन इंडिया जहाज बनाए जाएंगे
'सरकार घरेलू गैस की सप्लाई के लिए एलपीजी के अलावा पीएनजी पर भी जोर दे रही है। बीते वर्षों में पीएनजी कनेक्शन पर अभूतपूर्व काम हुआ है। बीते दिनों में इसे और बेहतर किया गया है। बीते वर्षों में सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि हर सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम से कम हो। हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हो। यही एकमात्र विकल्प है। भारत का 90 प्रतिशत से ज्यादा ट्रेड विदेशी जहाजों पर होता है, ये स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को गंभीर बना देती है। ऐसे में सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए 70 हजार करोड़ का प्रावधान किया है। भारत आज शिप बिल्डिंग और मरम्मत के लिए तेज गति से काम कर रहा है। भारत अपने रक्षा सेक्टर को भी ज्यादा लचीला बना रहा है। आज भारत अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार भारत में ही बना रहा है।'
ये भी पढ़ें- ऊर्जा आपूर्ति से भारत की डिप्लोमेसी तक: पश्चिम एशिया संकट पर लोकसभा में PM मोदी ने क्या-क्या कहा? जानिए सबकुछ
'विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे'
'एक समय था भारत अपने जीवन रक्षक दवाओं के कच्चे माल के लिए भी दूसरे देशों पर निर्भर था। बीते वर्षों में इस दिशा में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यस्था को हिला दिया है, अभी तक पश्चिम एशिया में जो नुकसान हुआ है, उससे उभरने में भी बहुत समय लगेगा। भारत पर इसका कम से कम असर हो इसके लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। हमारी अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स मजबूत हैं। भारत ने एक अंतर- मंत्रालयी समूह बनाया है, जो हमारे आयात निर्यात में आने वाली समस्याओं पर काम करता है। जैसे कोरोना के समय अलग-अलग सेक्टर की चुनौतियों से निपटने के लिए अलग-अलग ग्रुप बने थे। ऐसे ही नए ग्रुप बनाए गए हैं। ये समूह विभिन्न संकटों से निपटने के लिए बेहतर काम करेंगे।'
'किसानों पर किसी भी संकट का बोझ नहीं पड़ने देंगे'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'सरकार ये भी प्रयास कर रही है कि आगामी बुवाई समय में किसानों को पर्याप्त खाद मिलती रहे। सरकार ने खाद की पर्याप्त की सप्लाई के लिए जरूरी प्रयास किए हैं। सरकार की कोशिश है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ न पड़े। सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए किसानों के साथ खड़ी है। आने वाले समय में ये संकट हमारे देश की परीक्षा लेने वाला है। इसमें राज्यों का सहयोग बहुत जरूरी है। मैं सभी राज्यों की सरकारों से आग्रह करता हूं कि संकट का असर गरीबों, श्रमिकों पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए पीएम गरीब कल्याण योजना का लाभ समय पर मिलता रहे, ये सुनिश्चित करना होगा। प्रवासी श्रमिकों की परेशानी भी दूर करने पर फोकस करना होगा।'
'राज्य सरकारों को एक और चुनौती पर ध्यान देना होगा। ऐसे समय कालाबाजारी, जमाखोरी करने वाले सक्रिय हो जाते हैं। जहां से भी ऐसी शिकायत मिले, वहां तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। मैं सभी राज्यों से अनुरोध करना चाहता हूं संकट कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। ये टीम इंडिया की भी बड़ी परीक्षा है। इस युद्ध के असर लंबे समय तक रह सकते हैं। लेकिन मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं कि सरकार सतर्क है, तत्पर है और पूरी गंभीरता से रणनीति बना रही है। देश की जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है।'
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पीएम मोदी ने कहा, 'इस युद्ध से हमारे व्यापार के रास्ते प्रभावित हो रहे हैं। पेट्रोल-डीजल, गैस और उर्वरकों जैसे जरूरी सामानों की नियमित आपूर्ति प्रभावित हो रही है। खाड़ी देशों में करीब एक करोड़ भारतीय रह रहे हैं। यह भारत के लिए बड़ी चिंता है। होर्मुज में भारत के कई जहाज फंसे हैं, उनमें बड़ी संख्या में चालक दल के भारतीय सदस्य हैं। ऐसी विकट परिस्थिति में आवश्यक है कि भारत की उच्च सदन से शांति और संवाद की एकजुट आवाज पूरे विश्व में जाए। युद्ध की शुरुआत से बाद से मैंने पश्चिम एशिया के ज्यादातर देशों के राष्ट्राध्यक्षों के साथ दो दौर की बातचीत की है। हम ईरान, इस्राइल और अमेरिका के साथ संपर्क में हैं। हमारा लक्ष्य संवाद कूटनीति के माध्यम से क्षेत्र में शांति की बहाली का है। हमने होर्मुज को खोलने के लिए बात की है। व्यवसायिक जहाजों पर हमला और होर्मुज स्ट्रेट बाधित किया जाना अस्वीकार्य है। भारत ने नागरिकों, असैन्य ढांचों और ऊर्जा से जुड़ी बुनियादी संरचना पर हमलों का विरोध किया है। भारत डिप्लोमैसी के जरिए भारतीय जहाजों की आवाजाही के लिए सतत प्रयास कर रहा है। भारत ने समस्या के समाधान के लिए संवाद का ही रास्ता सुझाया है।'
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युद्ध के बाद से लाखों भारतीय सुरक्षित भारत लौटे
'इस युद्ध में किसी भी जीवन पर संकट मानवता के हित में नहीं है। भारत का सतत प्रयास सभी पक्षों को जल्द से जल्द शांतिपूर्ण समाधान के लिए प्रोत्साहित करने का है। संकट की स्थिति में भारतीयों की सुरक्षा हमारी प्राथमिकता है। युद्ध के बाद से तीन लाख 75 हजार भारतीय सुरक्षित भारत लौट चुके हैं। ईरान से एक हजार से अधिक भारतीय भारतीय भारत लौटे हैं। इनमें सात सौ से अधिक मेडिकल की पढ़ाई करने वाले भारतीय छात्र हैं। सभी देशों ने भारतीयों की सुरक्षा का आश्वासन दिया है। यह बहुत दुखद है कि हमलों के कारण कुछ भारतीयों की मृत्यु हुई है, कुछ गायब हुए हैं। ऐसे में परिजनों को हरसंभव मदद दी जा रही है। जो घायल हैं, उनका बेहतर इलाज किया जा रहा है।'
'होर्मुज संकट पर संवाद के माध्यम से रास्ते बनाने के प्रयास कर रहे'
'होर्मुज विश्व व्यापार के लिए बेहद अहम है। विशेषतौर पर क्रूड और उर्वरक से जुड़ा परिवहन इस क्षेत्र से बड़ी मात्रा में होता है। युद्ध से इस क्षेत्र से आना-जाना बहुत चुनौतीपूर्ण हो गया है। लेकिन विपरीत परिस्थितियों के बावजूद हमारी सरकार ने संवाद के माध्यम से रास्ते बनाने का प्रयास किया है। हमारी कोशिश है जहां से भी संभव हो, वहां से तेल और गैस की सप्लाई आसानी से भारत पहुंचे। बीते कुछ दिनों में दुनिया के अनेक देशों से कच्चा तेल और एलपीजी से भरे जहाज भारत आए हैं। आने वाले दिनों में भी ये प्रयास जारी रहेंगे। लेकिन युद्ध से बनी परिस्थितियां लंबे समय तक बनी रहती है तो इसके गंभीर परिणाम होंगे। इसलिए भारत ने अपनी लचीलापन बढ़ाने के लिए जो भी प्रयास किए हैं, उन्हें गति दी जा रही है।'
अब भारत 41 देशों से तेल-गैस का आयात कर रहा
पीएम मोदी ने कहा, 'कोई भी संकट हमारे हौंसलों और प्रयासों की परीक्षा लेता है। देश ऐसे संकटों का बेहतर तरीके से सामना कर सके, इसके लिए बीते 11 वर्षों में लगातार प्रयास किए गए हैं। एनर्जी आयात का विविधीकरण किया गया है। पहले गैस और कच्चा तेल 27 देशों से आयात किया जाता था आज भारत 41 देशों से तेल और गैस आयात करता है। भारत ने कच्चे तेल के भंडारण को भी प्राथमिकता दी है। पिछले 11 वर्षों में 53 लाख मीट्रिक टन से अधिक पेट्रोलियम रिजर्व फील्ड बनाया गया है। साथ ही भारत की रिफाइनरी क्षमता भी अच्छी खासी बढ़ाई गई है। भारत के पास कच्चे तेल के पर्याप्त स्टोरेज और सप्लाई की क्षमता है।'
व्यापार के लिए मेड इन इंडिया जहाज बनाए जाएंगे
'सरकार घरेलू गैस की सप्लाई के लिए एलपीजी के अलावा पीएनजी पर भी जोर दे रही है। बीते वर्षों में पीएनजी कनेक्शन पर अभूतपूर्व काम हुआ है। बीते दिनों में इसे और बेहतर किया गया है। बीते वर्षों में सरकार का निरंतर प्रयास रहा है कि हर सेक्टर में दूसरे देशों पर निर्भरता कम से कम हो। हम ज्यादा से ज्यादा आत्मनिर्भर हो। यही एकमात्र विकल्प है। भारत का 90 प्रतिशत से ज्यादा ट्रेड विदेशी जहाजों पर होता है, ये स्थिति किसी भी वैश्विक संकट में भारत की स्थिति को गंभीर बना देती है। ऐसे में सरकार ने मेड इन इंडिया जहाज बनाने के लिए 70 हजार करोड़ का प्रावधान किया है। भारत आज शिप बिल्डिंग और मरम्मत के लिए तेज गति से काम कर रहा है। भारत अपने रक्षा सेक्टर को भी ज्यादा लचीला बना रहा है। आज भारत अपनी जरूरत के अधिकांश हथियार भारत में ही बना रहा है।'
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'विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए कदम उठाए जा रहे'
'एक समय था भारत अपने जीवन रक्षक दवाओं के कच्चे माल के लिए भी दूसरे देशों पर निर्भर था। बीते वर्षों में इस दिशा में विदेशी निर्भरता को कम करने के लिए बड़े कदम उठाए जा रहे हैं। वर्तमान संकट ने पूरी दुनिया की अर्थव्यस्था को हिला दिया है, अभी तक पश्चिम एशिया में जो नुकसान हुआ है, उससे उभरने में भी बहुत समय लगेगा। भारत पर इसका कम से कम असर हो इसके लिए भी इंतजाम किए जा रहे हैं। हमारी अर्थव्यवस्था के फंडामेंटल्स मजबूत हैं। भारत ने एक अंतर- मंत्रालयी समूह बनाया है, जो हमारे आयात निर्यात में आने वाली समस्याओं पर काम करता है। जैसे कोरोना के समय अलग-अलग सेक्टर की चुनौतियों से निपटने के लिए अलग-अलग ग्रुप बने थे। ऐसे ही नए ग्रुप बनाए गए हैं। ये समूह विभिन्न संकटों से निपटने के लिए बेहतर काम करेंगे।'
'किसानों पर किसी भी संकट का बोझ नहीं पड़ने देंगे'
प्रधानमंत्री ने कहा, 'सरकार ये भी प्रयास कर रही है कि आगामी बुवाई समय में किसानों को पर्याप्त खाद मिलती रहे। सरकार ने खाद की पर्याप्त की सप्लाई के लिए जरूरी प्रयास किए हैं। सरकार की कोशिश है कि किसानों पर किसी भी संकट का बोझ न पड़े। सरकार हर चुनौती के समाधान के लिए किसानों के साथ खड़ी है। आने वाले समय में ये संकट हमारे देश की परीक्षा लेने वाला है। इसमें राज्यों का सहयोग बहुत जरूरी है। मैं सभी राज्यों की सरकारों से आग्रह करता हूं कि संकट का असर गरीबों, श्रमिकों पर बुरा असर पड़ता है। इसलिए पीएम गरीब कल्याण योजना का लाभ समय पर मिलता रहे, ये सुनिश्चित करना होगा। प्रवासी श्रमिकों की परेशानी भी दूर करने पर फोकस करना होगा।'
'राज्य सरकारों को एक और चुनौती पर ध्यान देना होगा। ऐसे समय कालाबाजारी, जमाखोरी करने वाले सक्रिय हो जाते हैं। जहां से भी ऐसी शिकायत मिले, वहां तुरंत कार्रवाई होनी चाहिए। मैं सभी राज्यों से अनुरोध करना चाहता हूं संकट कितना भी बड़ा हो, भारत की तेज ग्रोथ बनाए रखना हम सभी की जिम्मेदारी है। ये टीम इंडिया की भी बड़ी परीक्षा है। इस युद्ध के असर लंबे समय तक रह सकते हैं। लेकिन मैं देशवासियों को भरोसा देता हूं कि सरकार सतर्क है, तत्पर है और पूरी गंभीरता से रणनीति बना रही है। देश की जनता का हित हमारे लिए सर्वोपरि है।'