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साथ आएंगे भाजपा-अकाली दल?: PM मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात से अटकलें तेज, पंजाब में चुनाव से पहले बढ़ी हलचल

Fri, 07 Aug 2026 06:44 PM IST
हिमांशु सिंह चंदेल न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: हिमांशु सिंह चंदेल Updated Fri, 07 Aug 2026 06:44 PM IST
सार

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की मुलाकात ने नई राजनीतिक चर्चा छेड़ दी है। क्या वर्षों पुराना भाजपा-अकाली दल गठबंधन फिर लौट सकता है? या यह सिर्फ पंजाब के मुद्दों पर हुई सामान्य बातचीत थी? जानिए इस मुलाकात के पीछे की राजनीति, गठबंधन की संभावनाएं और पंजाब के बदलते चुनावी समीकरण।

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PM Modi-Sukhbir Badal Meeting Sparks BJP-SAD Alliance Buzz Ahead of Punjab Assembly Elections
पीएम मोदी और सुखबीर बादल की मुलाकात - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

पंजाब विधानसभा चुनाव से पहले प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और शिरोमणि अकाली दल (एसएडी) प्रमुख सुखबीर सिंह बादल की नई दिल्ली में हुई मुलाकात ने राज्य की राजनीति में हलचल बढ़ा दी है। दोनों नेताओं की संसद परिसर में हुई इस मुलाकात के बाद भाजपा और अकाली दल के बीच संभावित चुनावी गठबंधन की अटकलें तेज हो गई। हालांकि किसी भी पक्ष ने गठबंधन को लेकर आधिकारिक घोषणा नहीं की है, लेकिन चुनाव से पहले हुई यह मुलाकात राजनीतिक रूप से अहम मानी जा रही है।
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इस मुलाकात में किन मुद्दों पर चर्चा हुई?

मुलाकात के दौरान सुखबीर सिंह बादल ने पंजाब में कानून-व्यवस्था की स्थिति समेत राज्य से जुड़े विभिन्न मुद्दे प्रधानमंत्री के सामने रखे। अकाली दल के नेताओं के अनुसार प्रधानमंत्री ने इन सभी विषयों को गंभीरता से सुना। दूसरी ओर पंजाब भाजपा अध्यक्ष केवल सिंह ढिल्लों ने कहा कि कोई भी वरिष्ठ नेता प्रधानमंत्री से मिल सकता है। उन्होंने यह भी दोहराया कि भाजपा पंजाब की सभी 117 विधानसभा सीटों पर अपने दम पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है और पार्टी में जल्द बड़े नेताओं की एंट्री होने वाली है।
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भाजपा और अकाली दल के रिश्ते क्यों टूटे?

भाजपा और शिरोमणि अकाली दल दो दशक से अधिक समय तक राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) के मजबूत सहयोगी रहे। लेकिन सितंबर 2020 में तीन कृषि कानूनों के मुद्दे पर दोनों दलों के रास्ते अलग हो गए। किसान आंदोलन के दौरान अकाली दल ने एनडीए से बाहर होने का फैसला लिया। बाद में केंद्र सरकार ने कृषि कानून वापस ले लिए, लेकिन दोनों दलों के रिश्तों में आई दूरी पूरी तरह खत्म नहीं हो सकी। अब चुनाव से पहले दोनों नेताओं की मुलाकात ने पुराने गठबंधन की वापसी की चर्चाओं को फिर हवा दे दी है।
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2022 के चुनाव में पंजाब की राजनीति कैसे बदली थी?

2022 के विधानसभा चुनाव में भाजपा और अकाली दल ने अलग-अलग चुनाव लड़ा और दोनों को बड़ा नुकसान हुआ। कांग्रेस भी सत्ता से बाहर हो गई, जबकि आम आदमी पार्टी ने ऐतिहासिक जीत दर्ज कर पहली बार पूर्ण बहुमत की सरकार बनाई।
  • भाजपा को केवल 2 सीटें मिली थीं।
  • शिरोमणि अकाली दल सिर्फ 3 सीटें जीत सका।
  • भगवंत मान के नेतृत्व में आम आदमी पार्टी सरकार बनी।
  • कांग्रेस भी सत्ता से बाहर हो गई।
  • अकाली दल का विधानसभा में अब तक का सबसे कमजोर प्रदर्शन रहा।

क्या अकाली दल सबसे मुश्किल दौर से गुजर रहा है?

शिरोमणि अकाली दल पिछले कुछ वर्षों में लगातार राजनीतिक चुनौतियों का सामना कर रहा है। पार्टी से कई वरिष्ठ नेताओं का अलग होना, संगठनात्मक कमजोरी और लगातार खराब चुनावी प्रदर्शन उसके लिए बड़ी चुनौती बन गए हैं। 2021 में अपना शताब्दी वर्ष पूरा करने वाली पार्टी आज संगठन और जनाधार दोनों स्तर पर कठिन दौर से गुजर रही है। ऐसे में भाजपा के साथ संभावित नजदीकी को पार्टी के लिए नई राजनीतिक रणनीति के रूप में भी देखा जा रहा है।

क्या भाजपा अभी भी गठबंधन को लेकर सतर्क है?

हालांकि सुखबीर सिंह बादल की प्रधानमंत्री से मुलाकात के बाद राजनीतिक चर्चाएं तेज हैं, लेकिन भाजपा की ओर से अभी गठबंधन के संकेत नहीं दिए गए हैं। पंजाब भाजपा नेतृत्व लगातार कह रहा है कि पार्टी सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की तैयारी कर रही है। इससे साफ है कि फिलहाल भाजपा अपनी राजनीतिक स्थिति मजबूत करने पर भी समानांतर रूप से काम कर रही है।

क्या यह सिर्फ शिष्टाचार मुलाकात थी या चुनावी रणनीति का संकेत?

राजनीतिक जानकार इस मुलाकात को सामान्य शिष्टाचार भेंट से अधिक महत्व दे रहे हैं, क्योंकि यह ऐसे समय हुई है जब पंजाब विधानसभा चुनाव करीब हैं। दोनों दलों की ओर से गठबंधन पर चुप्पी बरकरार है, लेकिन मुलाकात ने यह जरूर संकेत दिया है कि पंजाब की राजनीति में आने वाले महीनों में नए समीकरण बन सकते हैं।

कब हो सकते हैं पंजाब विधानसभा चुनाव?

पंजाब में अगला विधानसभा चुनाव फरवरी 2027 तक होने की संभावना है। राज्य की 117 विधानसभा सीटों पर मतदान होगा और सरकार बनाने के लिए किसी भी दल या गठबंधन को कम से कम 59 सीटें जीतनी होंगी। फिलहाल राज्य में आम आदमी पार्टी की सरकार है और भगवंत मान मुख्यमंत्री हैं। 2022 के चुनाव में आम आदमी पार्टी ने 92 सीटें जीतकर ऐतिहासिक जीत दर्ज की थी।
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