PM Modi: विकसित भारत की तस्वीर सीमावर्ती गांवों तक कैसे पहुंची? पीएम मोदी के सामने युवाओं ने साझा किए अनुभव
विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 के प्रतिभागियों से संवाद के दौरान प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने सीमावर्ती गांवों के विकास पर चर्चा की। वहीं, 'माई भारत' के स्वयंसेवकों ने चांगो समेत सीमा से जुड़े क्षेत्रों में सड़क, पानी, बिजली, नेटवर्क और स्वास्थ्य सुविधाओं में आए बदलाव के अनुभव साझा किए।
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विस्तार
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने रविवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 के प्रतिभागियों से बातचीत की। देश के विभिन्न राज्यों के 245 से अधिक जिलों के 5,000 से ज्यादा स्वयंसेवक वर्चुअल माध्यम से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से जुड़े। इस दौरान विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम और 'माई भारत' से जुड़े अनुभव साझा किए गए।
'माई भारत' के स्वयंसेवक ने क्या अनुभव साझा किया?
एक 'माई भारत' स्वयंसेवक ने कहा कि इस कार्यक्रम ने उन्हें देश के सीमावर्ती गांवों का दौरा करने का अवसर दिया। उन्होंने कहा कि उन्हें ऐसे गांवों को देखने का मौका मिला, जहां जाने की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी। एक अन्य 'माई भारत' स्वयंसेवक ने कहा कि जब उन्होंने आयुष्मान आरोग्य मंदिर में स्वास्थ्य सेवाओं की जानकारी ली, तब उन्हें महसूस हुआ कि विकसित भारत की रोशनी देश के दूरदराज के इलाकों तक पहुंच रही है। उन्होंने यह भी कहा कि उन्हें स्कूलों में भी विकसित भारत की सोच दिखाई दी।
पीएम मोदी ने क्या कहा?
पीएम मोदी ने कहा कि वह हर दिवाली पर देश के जवानों से मिलने सीमा पर जाते हैं। उन्होंने कहा कि यह संयोग है कि वर्ष 2016 में दिवाली के दौरान उन्हें सीमा से सटे चांगो क्षेत्र जाने का अवसर मिला था।
#WATCH | Delhi: Prime Minister Narendra Modi interacts with participants of the Viksit Vibrant Village Program 2026 via video conferencing.
PM Modi says, "I visit the border every Diwali to meet our soldier brothers. It is a coincidence that in 2016, I visited the Chango… pic.twitter.com/1nwdZARu2W — ANI (@ANI) July 26, 2026
चांगो पहुंचकर प्रतिभागी निकिता ने क्या देखा?
विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 की प्रतिभागी निकिता ने बताया कि चांगो जाने से पहले उन्होंने सोशल मीडिया पर देखे गए वीडियो के आधार पर यह मान लिया था कि वहां न मोबाइल नेटवर्क होगा और न ही बिजली की सुविधा होगी। उन्होंने कहा कि जब वह वहां पहुंचीं और ऊंचे-ऊंचे पहाड़ों के बीच बनी मजबूत सड़कों को देखा तो हैरान रह गईं। स्थानीय लोगों से बातचीत में उन्हें पता चला कि पहले वहां ऐसी सुविधाएं नहीं थीं और लोगों को काफी कठिनाइयों का सामना करना पड़ता था।
ग्रामीणों ने विकास को लेकर क्या बताया?
निकिता के अनुसार, ग्रामीणों ने बताया कि प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना के तहत सड़कें बनने से वहां बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पहले घरों तक पाइप से पेयजल नहीं पहुंचता था, लेकिन अब जल जीवन मिशन के तहत हर घर में पीने के पानी की सुविधा उपलब्ध है। निकिता ने बताया कि स्थानीय लोगों ने कहा कि अब क्षेत्र में चौबीसों घंटे बिजली और मोबाइल नेटवर्क की सुविधा उपलब्ध है। साथ ही आयुष्मान भारत योजना के कारण स्वास्थ्य सेवाओं को लेकर उनका भरोसा बढ़ा है और उनका जीवन पहले की तुलना में अधिक आसान हुआ है।
दिव्यांशु जोशी ने क्या अनुभव साझा किया?
दादरा और नगर हवेली तथा दमन और दीव का प्रतिनिधित्व कर रहे 'माई भारत' के स्वयंसेवक दिव्यांशु जोशी ने विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम से जुड़े अपने अनुभव साझा किए। उन्होंने कहा कि 'माई भारत' की ओर से मिले इस अवसर ने उन्हें देश के सीमावर्ती गांवों तक पहुंचने का मौका दिया, जहां जाने की उन्होंने कभी कल्पना भी नहीं की थी।
दिव्यांशु जोशी ने बताया कि 'माई भारत' के तहत विकसित भारत, विकसित लीडर्स डायलॉग, विकसित भारत यूथ पार्लियामेंट, बजट क्विज, मेंटरशिप कार्यक्रम, वॉलंटियरिज्म समेत कई पहलें संचालित की जा रही हैं। उन्होंने कहा कि इन पहलों के माध्यम से देशभर के 2.3 करोड़ से अधिक युवाओं को आगे बढ़ने का मंच मिला है। उनके अनुसार, यही 'नेशन फर्स्ट' की सच्ची भावना है।
विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम क्या है?
माई भारत के माध्यम से संचालित विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के उस विजन पर आधारित है, जिसमें भारत के सीमावर्ती गांवों को देश का पहला गांव मानकर उनके विकास पर विशेष जोर दिया गया है। विकसित वाइब्रेंट विलेज कार्यक्रम 2026 का आयोजन 4 जून से 30 जून तक दो चरणों में किया गया। इसके तहत लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड के 74 वाइब्रेंट गांवों को शामिल किया गया। प्रधानमंत्री कार्यालय के अनुसार, देशभर में आयोजित ऑनलाइन क्विज प्रतियोगिता में तीन लाख से अधिक युवाओं ने भाग लिया। इनमें से सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों का प्रतिनिधित्व करने वाले 400 से अधिक युवाओं का चयन किया गया।
इस पहल का उद्देश्य क्या है?
कार्यक्रम के जरिए युवाओं को सीमावर्ती क्षेत्रों की सामाजिक-आर्थिक परिस्थितियों, सांस्कृतिक विरासत और विकास संबंधी आकांक्षाओं को करीब से समझने का अवसर मिला। साथ ही समुदाय की भागीदारी, राष्ट्रीय एकता और सीमावर्ती गांवों के रणनीतिक महत्व के प्रति जागरूकता बढ़ाने का प्रयास किया गया।