{"_id":"6316246a42461f31db072433","slug":"police-need-to-apply-laws-with-some-degree-of-honesty-and-impartiality-teesta-setalvad","type":"story","status":"publish","title_hn":"Teesta Setalvad: तीस्ता सीतलवाड़ बोलीं, नियमों की अनदेखी कर गिरफ्तार करने पर पुलिस बन सकती है सभी के लिए खतरा","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
Teesta Setalvad: तीस्ता सीतलवाड़ बोलीं, नियमों की अनदेखी कर गिरफ्तार करने पर पुलिस बन सकती है सभी के लिए खतरा
Mon, 05 Sep 2022 10:01 PM IST
Amit Mandal
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: Amit Mandal
Updated Mon, 05 Sep 2022 10:01 PM IST
सार
2002 के गुजरात दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सबूत गढ़ने के आरोप साबरमती केंद्रीय जेल से अंतरिम जमानत पर रिहा होने के दो दिन बाद सीतलवाड़ ने एक समाचार चैनल पर ये बातें कहीं।
विज्ञापन
तीस्ता सीतलवाड़
- फोटो : social media
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
सामाजिक कार्यकर्ता तीस्ता सीतलवाड़ ने सोमवार को कहा कि अगर पुलिस ईमानदारी, निष्पक्षता और स्वायत्तता के साथ कानूनों को लागू करने में विफल रहती है और गिरफ्तारी से संबंधित उचित प्रक्रिया का पालन नहीं करती है, तो हर किसी के लिए खतरा बन सकती है। हमारे पास इस देश में कानून है, आईपीसी (भारतीय दंड संहिता)। उन कानूनों को कुछ हद तक ईमानदारी के साथ और कुछ हद तक निष्पक्षता और स्वायत्तता के साथ पुलिस को लागू करना होगा।
विज्ञापन
सुप्रीम कोर्ट ने किया तीस्ता को रिहा
2002 के गुजरात दंगों के मामलों में निर्दोष लोगों को फंसाने के लिए सबूत गढ़ने के आरोप साबरमती केंद्रीय जेल से अंतरिम जमानत पर रिहा होने के दो दिन बाद सीतलवाड़ ने एक समाचार चैनल पर ये बातें कहीं। जून के अंत में गिरफ्तार होने के बाद तीस्ता को पिछले हफ्ते सुप्रीम कोर्ट ने 70 दिन सलाखों के पीछे बिताने के बाद अंतरिम जमानत दी थी।
विज्ञापन
फैक्ट-चेकर मोहम्मद जुबैर का उदाहरण देते हुए , जिसे जून में ट्वीट के जरिए धार्मिक भावनाओं को आहत करने के मामले में गिरफ्तार किया गया था और बाद में सुप्रीम कोर्ट ने अंतरिम जमानत दी थी, तीस्ता ने कहा कि मुझे लगता है कि यह वास्तव में काफी चिंताजनक है क्योंकि जब पुलिस जब गिरफ्तारी की उचित प्रक्रिया से दूर हो जाती है, तो यह कल किसी के लिए भी खतरा बन सकती है। यह किसी व्यापारी के साथ हो सकता है, किसी कार्यकर्ता के साथ हो सकता है और कोई भी हो सकता है।
विज्ञापन
लोगों के अधिकार को छीना नहीं जा सकता
सीतलवाड़ ने कहा कि संविधान उन लोगों को अधिकार देता है जो महसूस करते हैं कि उनके साथ राज्य द्वारा भेदभाव किया जा रहा है। उस अधिकार को व्यक्ति से नहीं छीना जा सकता है। एनजीओ, सिटीजन फॉर जस्टिस एंड पीस (सीजेपी) के संस्थापक ट्रस्टी ने कहा कि देश को यह महसूस करने की जरूरत है कि व्यक्तिगत स्वतंत्रता महत्वपूर्ण है और कारावास आदर्श नहीं हो सकता। सुप्रीम कोर्ट ने 11 जुलाई को इस देश में जमानत के मानदंड क्या होने चाहिए, इस पर एक बहुत ही कड़ा फैसला दिया है। सुप्रीम कोर्ट का कहना है कि सत्र अदालत में, उच्च न्यायालय में और फिर 2-3 सप्ताह में जमानत की सुनवाई होनी चाहिए। इसे बहुत गंभीरता से लेने की जरूरत है।