क्या दक्षिण भारत में सियासी बवाल के संकेत: तमिलनाडु, केरल और कर्नाटक में एक साथ गहराए विवाद, किसने क्या कहा?
दक्षिण भारत में सियासी हलचल तेज हो गई है। तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में एक के बाद एक उठे विवादों ने न सिर्फ राज्य की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि इसकी गूंज राष्ट्रीय स्तर तक पहुंच रही है। आइए जानते है इन तीनों ही राज्यों में क्या विवाद चल रहा है...
विस्तार
दक्षिण भारत में इन दिनों राजनीति का माहौल लगातार गरमाता नजर आ रहा है। तमिलनाडु, कर्नाटक और केरल में एक साथ उभरे विवादों ने न सिर्फ राज्य स्तर की राजनीति को झकझोर दिया है, बल्कि इसकी गूंज राष्ट्रीय राजनीति तक सुनाई देने लगी है। तमिलनाडु में राज्यपाल और सत्ताधारी दल के बीच बढ़ता टकराव, कर्नाटक में शीर्ष पुलिस अधिकारी के निलंबन को लेकर मचा बवाल और केरल में तेज होते राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप यह संकेत दे रहे हैं कि क्षेत्रीय राजनीति में सत्ता संघर्ष और राजनीतिक अस्थिरता का दौर तेज हो गया है। इन घटनाओं का असर दक्षिण भारत की राजनीतिक दिशा, दलों के आपसी समीकरण और आने वाले चुनावों की रणनीति पर साफ तौर पर देखने को मिल सकता है।
तमिलनाडु: राज्यपाल ने विधानसभा से गुस्से में बाहर निकलकर जताया असंतोष
तमिलनाडु के राज्यपाल आरएन रवी ने मंगलवार को विधानसभा के सालाना सत्र की शुरुआत से पहले परंपरागत उद्घाटन भाषण देने से इनकार कर दिया और गुस्से में कक्ष छोड़ दिया। उनका कहना था कि राष्ट्रीय गान का सम्मान नहीं किया गया और भाषण में असत्य तथ्य प्रस्तुत किए गए।
राज्यपाल ने कहा मेरा भाषण बार-बार रोका गया और राष्ट्रीय गान का उचित सम्मान नहीं हुआ। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। इस पर विधानसभा अध्यक्ष एम. अप्पावु ने अनुरोध किया कि नियमों और प्रथाओं का पालन किया जाए, लेकिन स्थिति तनावपूर्ण बनी रही। यहां पढ़ें अधिक खबर...
कर्नाटक: डीजीपी रामचंद्र राव निलंबित, अश्लील वीडियो वायरल
कर्नाटक के डीजीपी रामचंद्र राव को अश्लील वीडियो वायरल होने के बाद निलंबित कर दिया गया है। राज्यपाल थावरचंद गहलोत के आदेश पर यह कार्रवाई तत्काल प्रभाव से की गई। रामचंद्र राव 1993 बैच के आईपीएस अधिकारी हैं और नागरिक अधिकार प्रवर्तन शाखा के महानिदेशक के पद पर थे। राज्य सरकार ने जारी आदेश में कहा कि वीडियो वायरल होने के बाद कार्रवाई आवश्यक थी। इस मामले ने राज्य में राजनीतिक और प्रशासनिक हलचल बढ़ा दी है। यहां पढ़ें पूरी खबर...
केरल विधानसभा में नीतिगत भाषण को लेकर विवाद, मुख्यमंत्री विजयन ने उठाए सवाल
वहीं केरल के मुख्यमंत्री पिनरायी विजयन ने मंगलवार को कहा कि राज्यपाल राजेंद्र विश्वनाथ आर्लेकर ने विधानसभा में नीतिगत अभिभाषण के कुछ हिस्से नहीं पढ़े। मुख्यमंत्री के अनुसार, यह अभिभाषण राज्य मंत्रिमंडल की मंजूरी से तैयार किया गया था, लेकिन राज्यपाल ने इसे पूरा नहीं पढ़ा। विजयन ने बताया कि राज्यपाल ने अभिभाषण पढ़ने के बाद सदन छोड़ दिया और इसमें से कुछ अहम हिस्से छोड़ दिए गए। इनमें अनुच्छेद 12 की शुरुआत और अनुच्छेद 15 का अंत शामिल था। छोड़े गए अंशों में केंद्र सरकार की नीतियों के कारण केरल पर पड़े वित्तीय संकट और राजकोषीय संघवाद से जुड़े मुद्दों का उल्लेख था।
मुख्यमंत्री ने यह भी कहा कि एक अन्य छोड़े गए हिस्से में यह बात शामिल थी कि राज्य विधानसभा द्वारा पारित कई विधेयक लंबे समय से लंबित हैं और इस मामले को लेकर राज्य सरकार ने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया है। विजयन ने विधानसभा अध्यक्ष से मांग की कि मंत्रिमंडल द्वारा स्वीकृत नीतिगत अभिभाषण को ही आधिकारिक दस्तावेज माना जाए। इस पर विधानसभा अध्यक्ष ए एन शमसीर ने कहा कि परंपरा के अनुसार मंत्रिमंडल से मंजूर अभिभाषण में किसी भी तरह का बदलाव मान्य नहीं होता और यही नियम इस बार भी लागू रहेगा। यहां पढ़ें पूरी खबर...
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