Stray Dogs Row: सुप्रीम कोर्ट नाराज क्यों? मेनका गांधी की बात पर कहा- बिना सोचे बयान देना अवमानना के दायरे में
सुप्रीम कोर्ट से पशुप्रेमियों और गैर सरकारी संगठनों ने अपील की है कि आवारा कुत्तों को उसी क्षेत्र में छोड़ा जाए, जहां से उन्हें पकड़ा गया था। उन्होंने कुछ वैज्ञानिक मॉडल सुझाए हैं, जिन्हें अपनाने से कुत्तों की आबादी को नियंत्रित किया जा सकता है। वहीं, पीड़ितों के पक्ष ने आवासीय परिसरों और अन्य संस्थानों (जैसे अस्पताल आदि) से आवारा कुत्तों को हटाने की दलील दी है।
विस्तार
सुप्रीम कोर्ट में मंगलवार को आवारा कुत्तों के मामले पर सुनवाई की। इस दौरान एक वकील ने दलील देते हुए कहा कि नगर पालिका के अधिकारी कूड़ा नहीं उठाते हैं, जिसकी वजह से वहां कुत्ते इकट्ठा हो जाते हैं। वकील ने कहा कि शहरीकरण की वजह से कूड़ा बढ़ा है। शीर्ष अदालत में न्यायमूर्ति विक्रम नाथ, न्यायमूर्ति संदीप मेहता और न्यायमूर्ति एनवी अंजारिया की पीठ के समक्ष आवारा कुत्तों के मामले की सुनवाई हुई। मामले की सुनवाई के दौरान पीठ ने मुख्य रूप से संस्थागत परिसरों में आवारा कुत्तों के मुद्दे और नगर निगम अधिकारियों की विफलता पर ध्यान दिया।
ये भी पढ़ें: SC: सेंगर के खिलाफ CBI की अपील और कांग्रेस नेता पर दर्ज ड्रग्स मामले पर सुनवाई; बिश्नोई का मुकदमा भी सूचीबद्ध
मेनका गांधी के वकील से सुप्रीम कोर्ट ने पूछा क्या सवाल?
लाइव लॉ की रिपोर्ट के मुताबिक आवारा कुत्तों के मामले में सुनवाई के दौरान एक अन्य वकील ने दलील देते हुए कहा कि नसबंदी आदि की जिम्मेदारी अधिकारियों की है। वहीं, मेनका गांधी की ओर से पेश हुए वकील रामचंद्रन की एक दलील पर न्यायमूर्ति संदीप मेहता ने सवाल पूछते हुए कहा, 'आपकी मुवक्किल मंत्री रह चुकी हैं और पशु अधिकार कार्यकर्ता हैं। हमें बताएं कि आपके आवेदन में बजट आवंटन का जिक्र क्यों नहीं है। इन क्षेत्रों में आपके मुवक्किल का क्या योगदान रहा है?' इस पर वकील रामचंद्रन ने कहा कि मैं इसका मौखिक उत्तर नहीं दे सकता।
जस्टिस ने आवारा कुत्तों के मुद्दे पर सुप्रीम कोर्ट के आदेशों की आलोचना करने वाली टिप्पणियों पर नाराजगी जताई, और ये भी कहा कि उन्होंने कोर्ट की अवमानना की है। जस्टिस विक्रम नाथ, संदीप मेहता और एन वी अंजारिया की बेंच ने कहा कि पूर्व मंत्री ने बिना सोचे-समझे सबके खिलाफ हर तरह की टिप्पणियां की हैं। गांधी की तरफ से पेश हुए सीनियर वकील राजू रामचंद्रन से सवाल करते हुए बेंच ने कहा कि आपने कहा कि कोर्ट को अपनी टिप्पणी में सावधान रहना चाहिए, लेकिन क्या आपने अपने क्लाइंट से पूछा है कि उन्होंने किस तरह की टिप्पणियां की हैं? क्या आपने उनका पॉडकास्ट सुना है? उन्होंने बिना सोचे-समझे सबके खिलाफ हर तरह की टिप्पणियां की हैं। क्या आपने उनकी बॉडी लैंग्वेज देखी है?
बेंच ने कहा कि कोर्ट की उदारता के कारण वह पूर्व केंद्रीय मंत्री के खिलाफ अवमानना की कार्यवाही शुरू नहीं कर रही है। जस्टिस मेहता ने रामचंद्रन से पूछा कि पूर्व केंद्रीय मंत्री के तौर पर मेनका गांधी ने आवारा कुत्तों की समस्या को खत्म करने के लिए किस बजटीय आवंटन में मदद की है। रामचंद्रन ने जवाब दिया कि वह आतंकवादी अजमल कसाब की तरफ से भी पेश हुए हैं और बजटीय आवंटन एक नीतिगत मामला है। जस्टिस नाथ ने टिप्पणी की कि अजमल कसाब ने कोर्ट की अवमानना नहीं की, लेकिन आपके क्लाइंट ने की है।
वहीं, सुप्रीम कोर्ट में एक वकील ने दलील दी, 'कुत्ते पालने वाले लोग कुत्तों के व्यवहार को समझते हैं। वे बीमार कुत्तों की पहचान कर सकते हैं। खाना खिलाने से कुत्ते इधर-उधर भटकना बंद कर देते हैं, आपस में लड़ते नहीं हैं। कोई बीमारी नहीं फैलती। प्रति कुत्ता प्रति वर्ष 18250 रुपये का खर्च आता है।'
ये भी पढ़ें: Republic Day 2026: 77वें गणतंत्र दिवस परेड के साक्षी बनेंगे 10,000 मेहमान, सरकार बोली- मकसद जन भागीदारी बढ़ाना
वकील की दलील- सहानुभूति को दंडित नहीं किया जा सकता
उन्होंने कहा, 'हम कुत्तों को क्यों हटाने की कोशिश कर रहे हैं? इस पैसे का इस्तेमाल लोगों (जैसे अनाथ बच्चों) को फुटपाथ से हटाने के लिए किया जा सकता है। खाना खिलाने वाले लोग जनहित में काम कर रहे हैं।' उन्होंने कहा, 'एक खाना खिलाने वाले के रूप में मैं भी इन सभी बातों के दायरे में आता हूं। तंजानिया में भी कुत्तों की संख्या और काटने की घटनाओं में कमी आई है। सहानुभूति को दंडित नहीं किया जा सकता।'
संबंधित वीडियो-
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.