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सम्मान बनाम प्रोटोकॉल: तमिलनाडु राज्य गीत को लेकर फिर गरमाई राजनीति; 21 सांसदों ने राज्यपाल को लिखा पत्र

Thu, 06 Aug 2026 11:12 AM IST
प्रशांत तिवारी पीटीआई, चेन्नई
पीटीआई, चेन्नई Published by: प्रशांत तिवारी Updated Thu, 06 Aug 2026 11:12 AM IST
सार

तमिलनाडु में आधिकारिक समारोहों के प्रोटोकॉल को लेकर एक बार फिर विवाद खड़ा हो गया है। 21 सांसदों ने राज्यपाल आर. एन. रवि अर्लेकर को पत्र लिखकर विश्वविद्यालयों और सरकारी कार्यक्रमों में तमिल राज्य गीत को परंपरा के अनुसार सबसे पहले गाए जाने की व्यवस्था बहाल करने की मांग की है। 

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Politics heats up again over Tamil Nadu state anthem 21 MPs including P Chidambaram write to Governor
पी. चिदंबरम - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

तमिलनाडु में आधिकारिक कार्यक्रमों के प्रोटोकॉल को लेकर एक बार फिर विवाद गहरा गया है। राज्य के 21 सांसदों ने राज्यपाल आर. एन. रवि अर्लेकर को पत्र लिखकर विश्वविद्यालयों और सरकारी समारोहों में तमिल राज्य गीत को परंपरा के अनुसार कार्यक्रम की शुरुआत में गाए जाने की व्यवस्था बहाल करने का आग्रह किया है। 5 अगस्त को भेजे गए पत्र में सांसदों ने 28 जुलाई को तिरुनेलवेली स्थित मनोनमनियम सुंदरनार विश्वविद्यालय के 33वें दीक्षांत समारोह का उल्लेख किया है। सांसदों के अनुसार, राजभवन से मिले निर्देशों के तहत कार्यक्रम की शुरुआत 'वंदे मातरम्' से हुई, इसके बाद राष्ट्रीय गान बजाया गया और राज्य गीत को तीसरे स्थान पर प्रस्तुत किया गया।

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तमिल राज्य गीत को तीसरे स्थान पर रखने पर क्यों जताई गई आपत्ति?
सांसदों ने पत्र में कहा कि तमिलनाडु के अनेक लोगों ने इस क्रम को तमिल समाज और महान विद्वान मनोनमनियम सुंदरनार पिल्लै के प्रति 'अनजाने में किया गया अपमान' माना। सुंदरनार पिल्लै ने ही प्रसिद्ध रचना 'नीरारुम कडलुडुथा' की रचना की थी, जिसे 2021 में तमिलनाडु का आधिकारिक राज्य गीत घोषित किया गया था। सांसदों ने यह भी याद दिलाया कि यह गीत पिछले पांच दशकों से अधिक समय से सार्वजनिक कार्यक्रमों की शुरुआत में गाया जाता रहा है।
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पहले कौन-सी परंपरा अपनाई जाती रही है?
सांसदों ने अपने पत्र में जून 2026 में तमिलनाडु विधानसभा में राज्यपाल के अभिभाषण का भी हवाला दिया। उन्होंने बताया कि उस अवसर पर कार्यक्रम की शुरुआत तमिल राज्य गीत से हुई थी और अंत में राष्ट्रीय गान हुआ था। उनका कहना है कि विश्वविद्यालय के दीक्षांत समारोह में अपनाया गया क्रम उसी स्थापित परंपरा से अलग था। सांसदों ने यह भी कहा कि कर्नाटक समेत कई राज्यों में भी राज्य गीत को सम्मानजनक स्थान देने की परंपरा निभाई जाती है।
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सांसदों ने राज्यपाल से क्या मांग की?
पत्र में सांसदों ने राजभवन से अनुरोध किया कि तमिलनाडु के सभी विश्वविद्यालयों और सरकारी संस्थानों को पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए जाएं, ताकि दीक्षांत समारोह और अन्य सरकारी आयोजनों की शुरुआत तमिल राज्य गीत से हो और समापन राष्ट्रीय गान के साथ किया जाए।

क्या मांगी गई है आधिकारिक सफाई?
सांसदों ने यह भी आग्रह किया कि राजभवन सार्वजनिक रूप से यह स्पष्ट करे कि तमिल राज्य गीत या उसके रचयिता मनोनमनियम सुंदरनार के प्रति किसी प्रकार का अनादर करने का कोई इरादा नहीं था।

किन सांसदों ने पत्र पर हस्ताक्षर किए?
इस पत्र पर पूर्व केंद्रीय मंत्री पी. चिदंबरम, बी. मणिक्कम टैगोर, कार्ति चिदंबरम, थोल. तिरुमावलवन, दुरई वाइको सहित तमिलनाडु के कुल 21 सांसदों ने हस्ताक्षर किए हैं। उन्होंने कहा कि यह पत्र किसी शिकायत के रूप में नहीं, बल्कि सम्मानपूर्वक किया गया अनुरोध है, ताकि राज्य के संस्थान गरिमा के साथ कार्य करें और अनावश्यक विवादों से बचा जा सके। फिलहाल इस पूरे मामले पर राजभवन की ओर से कोई आधिकारिक प्रतिक्रिया नहीं आई है।


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क्या यह पहली बार हुआ है?
रिपोर्ट के अनुसार, हाल ही में हुए कैबिनेट शपथ ग्रहण समारोह में भी तमिल राज्य गीत को तीसरे स्थान पर ही प्रस्तुत किया गया था। यह लगातार तीसरी बार है जब आधिकारिक कार्यक्रम में तमिल राज्य गीत को इस क्रम में रखा गया है। इसे लेकर राज्यभर में राजनीतिक प्रतिक्रियाएं तेज हो गई हैं और सरकार पर क्षेत्रीय सांस्कृतिक परंपराओं का सम्मान सुनिश्चित करने का दबाव बढ़ रहा है।

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