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Potato Price: आलू के दाम धड़ाम, लागत भी नहीं निकल पा रही; किसानों की परेशानी इस वजह से बढ़ी, जानें दाम

डिजिटल ब्यूरो ,अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: अस्मिता त्रिपाठी Updated Tue, 13 Jan 2026 02:22 PM IST
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सार

मंडियों में आलू की मांग के मुकाबले ज्यादा आवक होने के कारण ही कीमतों पर दबाव बना हुआ है। इस वजह से दाम लगातार गिर रहे हैं। मंडी में आलू की मांग रोजाना 90 से 100 गाड़ियों की है, जबकि आवक 130 से 140 गाड़ियों तक पहुंच रही है। कारोबारियों का कहना है कि, आलू के दाम इस कदर टूट चुके हैं कि किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। 

Potato prices plummet failing to even cover costs this has exacerbated farmers' troubles know about prices
आलू किसान की मुश्किलें बढ़ी। - फोटो : संवाद
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विस्तार
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सीजन की शुरुआत होते ही आलू किसानों की मुश्किलें बढ़ती नजर आ रही हैं। देश के अलग अलग राज्यों की मंडियों में आलू के दाम तेजी से टूट रहे हैं। हालात ऐसे हो गए हैं कि मौजूदा भाव किसानों की लागत तक नहीं निकाल पा रहे हैं। कई राज्यों में आलू के रेट इतने गिर चुकी हैं कि किसानों के लिए फसल बेचने का भी कोई मतलब नहीं रह गया है। मजबूरी में कुछ किसान अपनी उपज सड़कों पर फेंकने को विवश हो रहे हैं, जिससे खेतों से मंडी तक का पूरा सिस्टम सवालों के घेरे में आ गया है।

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आलू के दामों में आई गिरावट के पीछे जानकार कई वजह बता रहे है। इनमें सबसे बड़ी वजह पिछले साल का भारी स्टॉक अब भी बड़ी मात्रा में कोल्ड स्टोरेज में जमा होना है। इस वजह से बाजार में सप्लाई ज्यादा बनी हुई है। जबकि दूसरी तरफ अच्छे मौसम के चलते इस आलू की बंपर पैदावार होने की उम्मीद है। हालांकि कारोबारियों का कहना है कि ज्यादा आवक के कारण फिलहाल कीमतों पर दबाव रहेगा और इस महीने दामों में नरमी बनी रह सकती है। लेकिन आने वाले दिनों में रेट में अंतर दिखेगा।
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देश की प्रमुख आलू मंडियों में कीमतों में तेज गिरावट दर्ज की गई है। इनमें सबसे बड़े उत्पादक राज्य उत्तर प्रदेश की आगरा मंडी में बीते एक महीने में आलू के थोक दाम 900 से 1250 रुपये प्रति क्विंटल से फिसलकर 500 से 650 रुपये रह गए हैं। जबकि देश के दूसरे बड़े उत्पादक राज्य पश्चिम बंगाल की कोलकाता मंडी में भाव 1500 से 1550 रुपये से घटकर 1100 से 1200 रुपये प्रति क्विंटल पर आ गए हैं। मध्य प्रदेश की इंदौर मंडी में आलू के दाम 500 से 1400 रुपये से गिरकर 300 से 900 रुपये हो गए हैं। राजधानी दिल्ली की मंडियों में भी कीमत 800 से 1400 रुपये से घटकर 300 से 900 रुपये प्रति क्विंटल तक पहुंच गई हैं।

रोज मंडियों में आ रही 140 से ज्यादा गाड़ियां
आजादपुर मंडी के कारोबारियों का कहना है कि, आलू की मांग के मुकाबले ज्यादा आवक होने के कारण ही कीमतों पर दबाव बना हुआ है और दाम लगातार गिर रहे हैं।  मंडी में आलू की मांग रोजाना 90 से 100 गाड़ियों की है, जबकि आवक 130 से 140 गाड़ियों तक पहुंच रही है। उनका कहना है कि,आलू के दाम इस कदर टूट चुके हैं कि किसानों की लागत भी नहीं निकल पा रही है। फिलहाल किसानों को आलू के सिर्फ 5 से 6 रुपये प्रति किलो तक ही भाव मिल रहे हैं, जबकि इसकी उत्पादन लागत 8 रुपये प्रति किलो से ज्यादा बैठती है। किसानों को गेहूं की बुआई के लिए खेत खाली करना जरूरी था, इसलिए मजबूरी में उन्हें कम दाम पर ही आलू निकालना पड़ा है। जानकारों के मुताबिक, कई राज्यों में 30 नवंबर तक कोल्ड स्टोरेज खाली हो जाने चाहिए थे, लेकिन ऐसा नहीं हो पाया। दिसंबर में पुराना आलू खराब होने के डर से बड़ी मात्रा में बाजार में उतार दिया गया। इसी दौरान नए आलू की आवक भी शुरू हो गई। इसलिए बाजार में सप्लाई बढ़ने से आलू के दामों में तेजी दिखाई दे रही है।

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