करदाताओं को बड़ी राहत: टैक्स के खौफ से आजादी, गलती पर जेल नहीं जुर्माना; बदलेगा भारत के टैक्स सिस्टम का चेहरा?
मोदी सरकार ने टैक्स सिस्टम की सोच बदलने का बड़ा कदम उठाया है। जन-विश्वास 2.0 के जरिए यह साफ संदेश दिया गया है कि हर करदाता अपराधी नहीं और हर तकनीकी गलती टैक्स चोरी नहीं होती। छोटी चूकों को अब आपराधिक अपराध नहीं माना जाएगा। लाखों टैक्स विवादों के बीच सरकार का यह दांव मुकदमेबाजी घटाकर भरोसे का माहौल बनाने की कोशिश है।
विस्तार
भारत का टैक्स सिस्टम अब डराने वाला नहीं, बल्कि भरोसे का जरिया बनेगा। मांग पुरानी थी, लेकिन अर्थ जगत में वैश्विक स्तर पर असमंजस और अविश्वास के माहौल में मोदी सरकार ने अब टैक्स देने वालों का भरोसा जीतने का बड़ा दांव खेला है। सरकार ने टैक्स टेररिज्म की जड़ों पर प्रहार करते हुए जन-विश्वास 2.0 को जमीन पर उतारने का ताकतवर प्रयास किया है। बजट का सबसे बड़ा संदेश यही है कि हर करदाता अपराधी नहीं है और हर तकनीकी चूक टैक्स चोरी नहीं होती।
दशकों से विडंबना रही है कि टीडीएस जमा करने में मामूली देरी या कागजी दस्तावेज की छोटी सी गलती भी कारोबारियों को कचहरी और जेल के दरवाजे तक ले जाती थी। बजट-2026 इसी मानसिकता को बदल रहा है। नीति आयोग की सिफारिशों को अमली जामा पहनाते हुए सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि अनजाने में हुई गलतियों को अब आपराधिक नहीं माना जाएगा, बल्कि केवल नागरिक दंड तक सीमित रखा जाएगा।
भारी पड़ रही मुकदमेबाजी
सरकार की कवायद इसलिए भी जरूरी थी, क्योंकि टैक्स विवादों के चलते देश की अर्थव्यवस्था का बड़ा हिस्सा अदालतों की फाइलों में कैद है। इतना ही नहीं, करीब 16.75 लाख करोड़ रुपये की विशाल राशि विवादों में फंसी है। यह वह पैसा है, जो उद्योगों और स्टार्टअप्स की धड़कन बन सकता था, पर कारोबारी अदालतों के चक्कर काटने में परेशान हैं। अदालतों और ट्रिब्यूनलों में आयकर अपील के 5.4 लाख मामले लंबित हैं, जबकि हाईकोर्ट और सुप्रीम कोर्ट में 40 हजार से अधिक मामले न्याय की राह देख रहे हैं।
मोटर दुर्घटना मुआवजा ब्याज पर आयकर व टीडीएस खत्म
मोटर दुर्घटना पीड़ितों को भी बड़ी राहत दी गई है। दुर्घटना मुआवजे पर अर्जित ब्याज को आयकर अधिनियम के तहत टैक्स मुक्त किया जाएगा। इस ब्याज राशि पर टैक्स डिडक्शन एट सोर्स (टीडीएस) की व्यवस्था भी समाप्त कर दी है। मोटर दुर्घटना दावा न्यायाधिकरण की ओर से किसी व्यक्ति को दिए गए मुआवजे पर मिलने वाला ब्याज अब आय की श्रेणी में नहीं आएगा। इस पर न तो आयकर लगेगा, न ही टीडीएस कटेगा। इससे हादसों में घायल व्यक्तियों और मृतकों के परिजनों को सीधा लाभ मिलेगा, जिन्हें अब पूरी ब्याज राशि मिल सकेगी। यह मुद्दा अरसे से विवाद का विषय रहा है और सुप्रीम कोर्ट में विचाराधीन है।
एमएसएमई को बड़ी राहत
सबसे ज्यादा मार झेलने वाले छोटे व मझोले कारोबारियों (एमएसएमई) के लिए बजट संजीवनी लेकर आया है। टीसीएस और टीडीएस फाइलिंग में देरी को अब अपराध की श्रेणी से बाहर करना एक ऐतिहासिक पहल है। अप्रैल 2026 से लागू होने जा रहा नया आयकर एक्ट-2025 इसी भरोसे की नींव पर खड़ा होगा, जिसका मकसद जटिल कानूनों को सरल बनाना और विभाग के असीमित विवेकाधिकारों पर लगाम कसना है।
राहत कैसे होगी मुकम्मल?
आयकर में शुरू हुई यह राहत तभी मुकम्मल होगी जब जीएसटी के कठोर प्रावधानों में भी इसी तरह का लचीलापन दिखेगा। अब सरकार ने हाथ तो बढ़ाया है, पर भरोसे का यह सेतु तभी बनेगा जब विभाग का कलेक्टर वाला रवैया बदलकर फैसिलिटेटर यानी सुविधा देने वाला हो जाए। सरकार के सूत्रों का कहना है कि जब दुनिया में अविश्वास का संकट है तो देश के लोगों पर विश्वास जता कर और उनका दिल जीतकर ही मौजूदा चुनौतियों को धराशायी किया जा सकता है। मतलब..अपने तो अपने होते हैं।
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