{"_id":"69de15c2c10e0e7ac406035a","slug":"president-droupadi-murmu-calls-for-unity-beyond-caste-focus-on-economic-divide-2026-04-14","type":"story","status":"publish","title_hn":"President Murmu: 'जाति से ऊपर उठें, अमीर-गरीब की खाई मिटे, तभी बनेगा समरस भारत'; राष्ट्रपति मुर्मू की अपील","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
President Murmu: 'जाति से ऊपर उठें, अमीर-गरीब की खाई मिटे, तभी बनेगा समरस भारत'; राष्ट्रपति मुर्मू की अपील
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, अहमदाबाद
Published by: Shivam Garg
Updated Tue, 14 Apr 2026 04:00 PM IST
विज्ञापन
सार
ष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने गुजरात में सामाजिक समरसता महोत्सव में जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर 'अमीर और गरीब' के बीच की खाई को पाटने का आह्वान किया। उन्होंने शिक्षा, स्वास्थ्य और गांवों के विकास पर भी जोर दिया।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू।
- फोटो : amar ujala
विज्ञापन
विस्तार
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने मंगलवार को लोगों से जातिगत विभाजन से ऊपर उठकर एक समावेशी समाज के निर्माण की दिशा में काम करने की अपील की। उन्होंने कहा कि देश को अब 'अमीर और गरीब' के बीच की खाई को पाटने पर ध्यान केंद्रित करना चाहिए।
Trending Videos
डॉ. बी.आर. अंबेडकर की जयंती के अवसर पर गुजरात के गांधीनगर में 'सामाजिक समरसता महोत्सव' को संबोधित करते हुए राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि जाति व्यवस्था अतीत की बात है और लोगों को अब एक समाज के रूप में आगे बढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा 'जिन्होंने जाति व्यवस्था बनाई, वे अब नहीं रहे। हमें मिलकर आगे बढ़ना चाहिए और सामाजिक सद्भाव को मजबूत करना चाहिए। एक तरह से, अब केवल दो ही जातियां हैं - 'हैव्स' (अमीर) और 'हैव-नॉट्स' (गरीब)।' उन्होंने पिछड़ों के उत्थान की आवश्यकता पर जोर दिया। इस अवसर पर गुजरात के राज्यपाल आचार्य देवव्रत, मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और उपमुख्यमंत्री हर्ष संघवी भी मौजूद थे।
विज्ञापन
विज्ञापन
'एकजुट खड़े रहना सामाजिक सद्भाव की सच्ची अभिव्यक्ति'
राष्ट्रपति ने एकता का आह्वान करते हुए कहा किसी को भी केवल अपने हित के बारे में नहीं सोचना चाहिए। हम सब एक हैं। हम भाई-बहन हैं। उन्होंने भारत की सांस्कृतिक एकता पर जोर देते हुए कहा कि देश की परंपराएं करुणा, समानता, आपसी कल्याण और सद्भाव में निहित हैं। उन्होंने कहा, "सभी विभाजनों से ऊपर उठकर और बिना किसी भेदभाव के एकजुट खड़े रहना सामाजिक सद्भाव की सच्ची अभिव्यक्ति है।"
'गांव समृद्ध होंगे, तो देश समृद्ध होगा'
राष्ट्रपति मुर्मू ने इस बात पर भी जोर दिया कि भारत के विकास और सामाजिक ताने-बाने में गांव केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। उन्होंने कहा राष्ट्र की आत्मा उसके गांवों में बसती है। एक सामंजस्यपूर्ण समाज के निर्माण का मार्ग गांवों से होकर गुजरता है। विविधता के बावजूद, गांवों में लोगों के बीच स्नेह, गर्मजोशी और आपसी समझ है और यह भारतीय संस्कृति की सच्ची भावना को दर्शाता है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि यदि गांव समृद्ध होंगे, तो देश समृद्ध होगा।
शिक्षा व्यक्तिगत और राष्ट्रीय विकास दोनों की नींव- राष्ट्रपति
डॉ. बी.आर. अंबेडकर का स्मरण करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि उनका सद्भाव का संदेश स्वतंत्रता, समानता और बंधुत्व पर आधारित था। अंबेडकर के 'स्वयं को शिक्षित करो' संदेश को याद करते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा व्यक्तिगत और राष्ट्रीय विकास दोनों की नींव है। उन्होंने कहा शिक्षा के मूल में राष्ट्र और समाज का विकास निहित है। हमारे संविधान ने शिक्षा को मौलिक अधिकार बनाया है। यह हमारी जिम्मेदारी है कि हम यह सुनिश्चित करें कि गांवों या शहरों के हाशिए पर पड़े वर्गों के लोगों को शिक्षा मिले।
नैतिक मूल्यों और स्वास्थ्य पर जोर
राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा के साथ-साथ नैतिक मूल्यों को भी बढ़ावा देना चाहिए। व्यापक शिक्षा, विशेष रूप से नैतिक शिक्षा के माध्यम से, सामाजिक सद्भाव के बंधन मजबूत होते हैं। उन्होंने स्वास्थ्य और स्वच्छ वातावरण के महत्व पर भी प्रकाश डाला, यह कहते हुए कि ये दोनों व्यक्तियों और समाज की प्रगति के लिए आवश्यक हैं। राष्ट्रपति ने कहा कि ग्राम स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयास किए जा रहे हैं।
उन्होंने व्यक्तियों से दूसरों के उत्थान में योगदान करने का भी आह्वान किया। उन्होंने समाज के लाभ के लिए अपनी क्षमताओं का उपयोग करने के बारे में एक व्यक्तिगत संदेश साझा किया। राष्ट्रपति ने कहा सफल होना अच्छी बात है, लेकिन यह तभी सार्थक होता है जब आप पीछे मुड़कर देखें कि आप कितने लोगों की मदद कर सकते हैं। आप पूरे राष्ट्र को नहीं बदल सकते हैं, लेकिन आपको खुद से पूछना चाहिए कि आप दूसरों के लिए क्या कर सकते हैं।
स्थानीय समुदायों की भूमिका पर भी जोर
राष्ट्रपति मुर्मू ने कहा कि शिक्षा, स्वास्थ्य सेवा और कृषि जैसे क्षेत्रों में सहायता प्रदान की जा रही है, लेकिन लोगों को सक्रिय रूप से भाग लेना चाहिए। उन्होंने कहा सरकार अपना कर्तव्य निभा रही है, लेकिन लोगों को भी आगे बढ़ने और आत्मनिर्भर बनने के लिए प्रयास करना चाहिए। राष्ट्रपति ने समावेशी विकास और सामाजिक एकजुटता को बढ़ावा देने में सहकारी क्षेत्र और स्थानीय समुदायों की भूमिका पर भी जोर दिया। उन्होंने सामाजिक कल्याण में सुधार के लिए स्वच्छता, वृक्षारोपण और पशुपालन से संबंधित पहलों का भी आह्वान किया।
विज्ञापन
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
