Political Clash: भाजपा-कांग्रेस झड़प के बाद पुणे पुलिस सख्त, पार्टी दफ्तरों के बाहर प्रदर्शन पर लगी रोक
पुणे पुलिस ने राजनीतिक दलों के दफ्तरों और नेताओं के घरों के बाहर प्रदर्शन करने पर रोक लगा दी है। यह फैसला भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प के बाद लिया गया। कांग्रेस ने पुलिस पर भेदभाव का आरोप लगाया है। उनका कहना है कि मेयर का नाम एफआईआर से जानबूझकर हटाया गया है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
पुणे के पुलिस कमिश्नर अमितेश कुमार ने सोमवार को एक बड़ा आदेश जारी किया। अब पुणे पुलिस कमिश्नरेट क्षेत्र में किसी भी राजनीतिक पार्टी के दफ्तर के बाहर प्रदर्शन करने की अनुमति नहीं होगी। यह फैसला भाजपा और कांग्रेस कार्यकर्ताओं के बीच हुई हिंसक झड़प के एक दिन बाद लिया गया है। रविवार को हुई इस झड़प में नौ लोग घायल हो गए थे।
क्या है विवाद?
यह हिंसा महाराष्ट्र कांग्रेस प्रमुख हर्षवर्धन सपकाल के एक विवादित बयान के बाद शुरू हुई। उन्होंने छत्रपति शिवाजी महाराज और मैसूर के शासक टीपू सुल्तान को लेकर टिप्पणी की थी। इसके विरोध में भाजपा कार्यकर्ता स्थानीय कांग्रेस दफ्तर के बाहर जमा हुए थे। पुलिस के अनुसार, घायलों में दोनों पार्टियों के कार्यकर्ता, दो पुलिसकर्मी और दो पत्रकार शामिल हैं।
क्या बोले पुलिस कमिश्नर?
कमिश्नर अमितेश कुमार ने पत्रकारों से कहा कि भविष्य में ऐसी घटनाएं न हों, इसलिए राजनीतिक दफ्तरों या नेताओं के घरों के पास किसी भी तरह के आंदोलन की इजाजत नहीं दी जाएगी। उन्होंने बताया कि रविवार को हुई पत्थरबाजी पहले से तय नहीं थी। पुलिस मामले की गहराई से जांच कर रही है। जांच में जिनका भी नाम सामने आएगा, उनके खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई होगी। पुलिस ने इस मामले में दोनों पक्षों के नेताओं और कई कार्यकर्ताओं पर दो अलग-अलग केस दर्ज किए हैं।
ये भी पढे़ं: Maharashtra: भाजपा के 'औरंगजेब' वाले कटाक्ष पर उद्धव की पार्टी का पलटवार, AIMIM से गठबंधन को दिलाया याद
कांग्रेस ने लगाए आरोप
दूसरी तरफ, कांग्रेस नेता प्रशांत जगताप ने पुलिस पर भेदभाव करने का गंभीर आरोप लगाया है। उन्होंने सवाल उठाया कि पुलिस ने भाजपा कार्यकर्ताओं को कांग्रेस भवन की बाउंड्री वॉल तक कैसे आने दिया। जगताप का कहना है कि पुलिस को उन्हें कम से कम 100 मीटर दूर रोकना चाहिए था। उन्होंने आरोप लगाया कि भाजपा को सड़क जाम करने की पूरी छूट दी गई, जो गलत है।
जगताप ने नवनिर्वाचित मेयर मंजुषा नागपुरे पर भी निशाना साधा। उन्होंने दावा किया कि मेयर ने मोर्चे में हिस्सा लिया और भड़काऊ भाषण दिया। कांग्रेस का आरोप है कि पुलिस ने एफआईआर से मेयर का नाम जानबूझकर हटा दिया है। जगताप ने अंदेशा जताया कि गृह मंत्री के निर्देश पर पुलिस ने ऐसा किया है। उन्होंने कहा कि उनके पास मेयर के भाषण का वीडियो फुटेज है। कांग्रेस अब इस मामले को लेकर हाई कोर्ट जाने पर विचार कर रही है ताकि मेयर का नाम दोबारा एफआईआर में शामिल कराया जा सके।
अन्य वीडियो-
रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

कमेंट
कमेंट X