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इस्कॉन की समय से पहले रथ यात्रा पर विवाद: जगन्नाथ मंदिर समिति ने राष्ट्रपति-PM को लिखा पत्र, क्या उठाई मांग?
Tue, 07 Jul 2026 05:08 PM IST
निर्मल कांत
पीटीआई, भुवनेश्वर (ओडिशा)।
पीटीआई, भुवनेश्वर (ओडिशा)।
Published by: निर्मल कांत
Updated Tue, 07 Jul 2026 05:08 PM IST
सार
पुरी जगन्नाथ मंदिर समिति ने इस्कॉन की ओर से दुनियाभर में निकाली जा रही समय से पहले स्नान यात्रा और रथ यात्रा पर आपत्ति जताई है। समिति ने राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री से इसमें दखल देकर पुरानी परंपराओं को बचाने की मांग की है। पढ़िए रिपोर्ट-
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जगन्नाथ पुरी
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक
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विस्तार
श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति (एसजेटीएमसी) के अध्यक्ष और गजपति महाराजा दिव्यसिंह देव ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को पत्र लिखा है। उन्होंने उनसे आग्रह किया कि इस्कॉन की ओर से दुनियाभर में भगवान जगन्नाथ की समय से पहले निकाली जा रही 'स्नान यात्रा' और 'रथ यात्रा' को रोकने के लिए हस्तक्षेप करें।
उन्होंने कहा कि इस्कॉन सदियों पुरानी परंपरा से अलग हटकर ये आयोजन कर रहा है, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह ने कहा, कई बार अनुरोध करने के बाद भी इस्कॉन भगवान जगन्नाथ के त्योहारों के आयोजन में पवित्र शास्त्रों और सदियों पुरानी परंपराओं के नियमों का पालन नहीं कर रहा है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति (एसजेटीएमसी) ओडिशा के पुरी स्थित 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर की सबसे बड़ी नीति बनाने वाली संस्था है।
राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र में क्या लिखा?
दिब्यसिंह देब ने चार जुलाई को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, पिछले करीब दो दशकों से श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (पुरी) इस जरूरी मुद्दे को सुलझाने के लगातार प्रयास कर रहा है। इसके अलावा, ओडिशा सरकार भी समय-समय पर इस बारे में बयान देती रही है। लेकिन इसके बावजूद भारत के बाहर इस्कॉन की ओर से की जा रही समय से पहले श्री जगन्नाथ यात्राओं को रोकने में सफलता नहीं मिली।
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ये भी पढ़ें: PM को इंडोनेशिया का सर्वोच्च सम्मान पर मिलने पर कांग्रेस ने साधा निशाना; नेहरू का क्यों किया जिक्र?
भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाने वाले दिब्यसिंह देब ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की गौरवशाली परंपरा की पवित्रता को दुनियाभर में बनाए रखने और भारत व विदेश में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री से दोबारा अपील की है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि वह ऐसे कदम उठाएं, जिससे इस्कॉन की ओर से शास्त्रों और परंपराओं के खिलाफ आयोजित की जा रही समय से पहले 'स्नान यात्रा' और 'रथ यात्रा' को रोका जा सके।
एसजेटीएमसी दिल्लील भेजेगा प्रतिनिधिमंडल?
श्री जगन्नाथ संस्कृति पर शोध करने वाले प्रोफेसर हरेकृष्ण सत्पथी ने कहा, इससे पहले दिब्यसिंह देब ने प्रधानमंत्री मोदी को 24 अक्तूबर 2025 और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 20 अप्रैल 2026 को पत्र लिखा था। इसलिए एसजेटीएमसी ने दिल्ली एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों से मुलाकात करेगा और उन्हें श्री जगन्नाथ संस्कृति की पवित्रता बनाए रखने के महत्व के बारे में बताएगा।
ओडिशा सरकार अकेले नहीं रोक सकती: दिब्यसिंह देब
दिब्यसिंह देब ने माना कि केवल ओडिशा सरकार और जगन्नाथ मंदिर प्रशासन भारत के बाहर इस्कॉन की ओर से समय से पहले होने वाली रथ यात्रा को नहीं रोक सकते। उन्होंने कहा, हमने इस मामले को ओडिशा के मुख्यमंत्री, कानून मंत्री, सांसदों और विधायकों के सामने उठाया है, ताकि सभी मिलकर इस मुद्दे पर काम करें और पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा को बचाया जा सके।
गजपति महाराजा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की पवित्रता और शुद्धता को हर हाल में बचाना जरूरी है। उन्होंने कहा, इस्कॉन का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय पश्चिम बंगाल के मायापुर में है। वहां लिया गया हर फैसला दुनियाभर में लागू होता है। अब बदली हुई परिस्थितियों में पश्चिम बंगाल में सरकार बदल गई है और इस्कॉन को नया प्रमुख मिला है। इसलिए हमें उन्हें सनातन धर्म के नियमों के अनुसार चलने और भगवान जगन्नाथ के समय से पहले होने वाले धार्मिक आयोजनों को रोकने के लिए समझाना चाहिए।
दिब्यसिंह देब ने अपने पत्र में बताया कि शास्त्रों के अनुसार भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा 'ज्येष्ठ पूर्णिमा' के दिन होनी चाहिए। वहीं, रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया से शुरू होने वाली नौ दिनों की अवधि के अंदर होनी चाहिए। हालांकि इस्कॉन भारत में इन तिथियों का पालन करता है। लेकिन देश के बाहर उसकी ज्यादातर रथ यात्राएं समय के अनुसार नहीं होती हैं।
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उन्होंने कहा कि इस्कॉन सदियों पुरानी परंपरा से अलग हटकर ये आयोजन कर रहा है, जिससे करोड़ों श्रद्धालुओं की धार्मिक भावनाएं आहत हो रही हैं। पुरी के गजपति महाराजा दिव्यसिंह ने कहा, कई बार अनुरोध करने के बाद भी इस्कॉन भगवान जगन्नाथ के त्योहारों के आयोजन में पवित्र शास्त्रों और सदियों पुरानी परंपराओं के नियमों का पालन नहीं कर रहा है। श्री जगन्नाथ मंदिर प्रबंध समिति (एसजेटीएमसी) ओडिशा के पुरी स्थित 12वीं सदी के जगन्नाथ मंदिर की सबसे बड़ी नीति बनाने वाली संस्था है।
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राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को पत्र में क्या लिखा?
दिब्यसिंह देब ने चार जुलाई को राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री को लिखे पत्र में कहा, पिछले करीब दो दशकों से श्री जगन्नाथ मंदिर प्रशासन (पुरी) इस जरूरी मुद्दे को सुलझाने के लगातार प्रयास कर रहा है। इसके अलावा, ओडिशा सरकार भी समय-समय पर इस बारे में बयान देती रही है। लेकिन इसके बावजूद भारत के बाहर इस्कॉन की ओर से की जा रही समय से पहले श्री जगन्नाथ यात्राओं को रोकने में सफलता नहीं मिली।
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भगवान जगन्नाथ के प्रथम सेवक माने जाने वाले दिब्यसिंह देब ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की गौरवशाली परंपरा की पवित्रता को दुनियाभर में बनाए रखने और भारत व विदेश में रहने वाले करोड़ों श्रद्धालुओं की भावनाओं का सम्मान करने के लिए उन्होंने प्रधानमंत्री से दोबारा अपील की है।
उन्होंने प्रधानमंत्री से कहा कि वह ऐसे कदम उठाएं, जिससे इस्कॉन की ओर से शास्त्रों और परंपराओं के खिलाफ आयोजित की जा रही समय से पहले 'स्नान यात्रा' और 'रथ यात्रा' को रोका जा सके।
एसजेटीएमसी दिल्लील भेजेगा प्रतिनिधिमंडल?
श्री जगन्नाथ संस्कृति पर शोध करने वाले प्रोफेसर हरेकृष्ण सत्पथी ने कहा, इससे पहले दिब्यसिंह देब ने प्रधानमंत्री मोदी को 24 अक्तूबर 2025 और राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को 20 अप्रैल 2026 को पत्र लिखा था। इसलिए एसजेटीएमसी ने दिल्ली एक प्रतिनिधिमंडल भेजने का फैसला किया है। यह प्रतिनिधिमंडल राष्ट्रपति और प्रधानमंत्री दोनों से मुलाकात करेगा और उन्हें श्री जगन्नाथ संस्कृति की पवित्रता बनाए रखने के महत्व के बारे में बताएगा।
ओडिशा सरकार अकेले नहीं रोक सकती: दिब्यसिंह देब
दिब्यसिंह देब ने माना कि केवल ओडिशा सरकार और जगन्नाथ मंदिर प्रशासन भारत के बाहर इस्कॉन की ओर से समय से पहले होने वाली रथ यात्रा को नहीं रोक सकते। उन्होंने कहा, हमने इस मामले को ओडिशा के मुख्यमंत्री, कानून मंत्री, सांसदों और विधायकों के सामने उठाया है, ताकि सभी मिलकर इस मुद्दे पर काम करें और पुरी के श्री जगन्नाथ मंदिर की सदियों पुरानी परंपरा को बचाया जा सके।
गजपति महाराजा ने कहा कि भगवान जगन्नाथ की पवित्रता और शुद्धता को हर हाल में बचाना जरूरी है। उन्होंने कहा, इस्कॉन का अंतरराष्ट्रीय मुख्यालय पश्चिम बंगाल के मायापुर में है। वहां लिया गया हर फैसला दुनियाभर में लागू होता है। अब बदली हुई परिस्थितियों में पश्चिम बंगाल में सरकार बदल गई है और इस्कॉन को नया प्रमुख मिला है। इसलिए हमें उन्हें सनातन धर्म के नियमों के अनुसार चलने और भगवान जगन्नाथ के समय से पहले होने वाले धार्मिक आयोजनों को रोकने के लिए समझाना चाहिए।
दिब्यसिंह देब ने अपने पत्र में बताया कि शास्त्रों के अनुसार भगवान जगन्नाथ की स्नान यात्रा 'ज्येष्ठ पूर्णिमा' के दिन होनी चाहिए। वहीं, रथ यात्रा आषाढ़ शुक्ल पक्ष द्वितीया से शुरू होने वाली नौ दिनों की अवधि के अंदर होनी चाहिए। हालांकि इस्कॉन भारत में इन तिथियों का पालन करता है। लेकिन देश के बाहर उसकी ज्यादातर रथ यात्राएं समय के अनुसार नहीं होती हैं।