फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
डाउनलोड करें

सब्सक्राइब करें
Hindi News ›   India News ›   Rafale Deal: Central Government got clean chit from SUpreme Court, Know big things

सुप्रीम कोर्ट से राफेल सौदे पर मोदी सरकार को क्लीन चिट, जानें बड़ी बातें

Fri, 14 Dec 2018 11:25 AM IST
शशांक गौर न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: शशांक गौर Updated Fri, 14 Dec 2018 11:25 AM IST
विज्ञापन
Rafale Deal: Central Government got clean chit from SUpreme Court, Know big things
सुप्रीम कोर्ट

पिछले काफी समय से राफेल सौदे को लेकर विपक्ष मोदी सरकार को आड़े हाथ लेता आ रहा है। कांग्रेस के राष्ट्रीय अध्यक्ष राहुल गांधी ने अमूमन हर रैली और हर संबोधन में सरकार पर इस सौदे को लेकर हमला किया है। उनका कहना है कि अनिल अंबानी को जानबूझकर इस सौदे का ऑफसेट पार्टनर बनाया गया है जबकि पहला यह सौदा फ्रांस की दसॉल्ट का एचएएल के साथ होना था। इसके खिलाफ उच्चतम न्यायालय में कई याचिकाएं दाखिल की गई थीं जिसे आज न्यायालय ने खारिच कर दिया और इस सौदे को हरी झंडी दे दी है।

विज्ञापन


न्यायालय के फैसले ने जहां सरकार को बहुत बड़ी राहत दी है वहीं विपक्ष के लिए यह तगड़ा झटका है। अब विपक्ष इसकी संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) जांच करवाने की मांग कर रहा है। बहरहाल हम आपको बताते हैं इस सौदे को लेकर न्यायालय ने क्या-क्या बड़ी बाते कहीं।
विज्ञापन


1. राफेल सौदे में निर्णय लेने की प्रक्रिया पर संदेह करने का कोई अवसर नहीं है।

2. हमें लड़ाकू विमानों की जरूरत है और देश लड़ाकू विमानों के बगैर नहीं रह सकता है।

3. राफेल लड़ाकू विमानों की कीमत पर निर्णय लेना अदालत का काम नहीं है।

4. हमें फ्रांस से 36 राफेल विमानों की खरीद की प्रक्रिया में हस्तक्षेप करने का कोई कारण नजर नहीं आता है।

5. न्यायालय ने कहा कि सितंबर 2016 में जब राफेल सौदे को अंतिम रूप दिया गया था, उस वक्त किसी ने खरीद पर सवाल नहीं उठाया था।

6. उच्चतम न्यायालय ने माना कि भारतीय वायुसेना में राफेल की तरह के चौथी और पांचवीं पीढ़ी के लड़ाकू विमानों को शामिल करने की जरूरत है।

7. न्यायालय ने कहा कि वह सरकार को 126 या 36 विमान खरीदने के लिए बाध्य नहीं कर सकता है।

8. न्यायालय ने कहा कि राफेल सौदे पर सवाल उस वक्त उठे जब फ्रांस के पूर्व राष्ट्रपति फ्रांसवा ओलांद ने बयान दिया, यह न्यायिक समीक्षा का आधार नहीं हो सकता है।
विज्ञापन
विज्ञापन


9. शीर्ष अदालत ने कहा कि कीमतों के तुलनात्मक विवरण पर फैसला लेना अदालत का काम नहीं है।

10. पीठ ने कहा कि खरीदी, कीमत और ऑफसेट साझेदार के मामले में हस्तक्षेप के लिए उसके पास कोई ठोस साक्ष्य नहीं है।
विज्ञापन
विज्ञापन

रहें हर खबर से अपडेट, डाउनलोड करें Android Hindi News apps, iOS Hindi News apps और Amarujala Hindi News apps अपने मोबाइल पे|
Get all India News in Hindi related to live update of politics, sports, entertainment, technology and education etc. Stay updated with us for all breaking news from India News and more news in Hindi.

विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन

एड फ्री अनुभव के लिए अमर उजाला प्रीमियम सब्सक्राइब करें

Next Article

AU ऐप में पढ़ें

Followed