राफेल विवाद: नए खुलासे पर दसॉल्ट की सफाई, 'रिलायंस से समझौता कंपनी का फैसला'
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राफेल सौदे पर फ्रांसीसी खोजी पत्रिका और वेबसाइट द्वारा किए गए नए खुलासे के बाद कांग्रेस एक बार फिर मोदी सरकार पर हमलावर है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने इस बार प्रधानमंत्री मोदी पर सीधा हमला बोलते हुए उन्हें भ्रष्ट बताया है। इस बीच राफेल बनाने वाली कंपनी दसॉल्ट ने नए खुलासे पर सफाई पेश की है।
दसॉल्ट ने अपनी सफाई में कहा कि रिलायंस के साथ समझौता भारतीय कानून के तहत ही हुआ था और यह पूरी तरह से कंपनी (दसॉल्ट) का फैसला था। दसॉल्ट के सीईओ एरिक ट्रैपियर ने साफ तौर पर कहा कि कानून के हिसाब से ही दसॉल्ट ने रिलायंस के साथ मिलकर नागपुर में प्लांट लगाने का फैसला किया।
ट्रेपियर ने कहा है कि रिलायंस के साथ दसॉल्ट एविएशन का संयुक्त उपक्रम राफेल लड़ाकू विमान करार के तहत करीब 10 फीसदी ऑफसेट निवेश का प्रतिनिधित्व करता है।
उन्होंने कहा, 'हम करीब 100 भारतीय कंपनियों के साथ बातचीत कर रहे हैं जिनमें करीब 30 कंपनियां ऐसी हैं जिनके साथ हमने पहले ही साझेदारी की पुष्टि कर दी है।'
ट्रैपियर ने हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड की जगह रिलायंस कंपनी को चुनने पर कहा कि रिलायंस के साथ मिलकर दसॉल्ट भारत में लंबी साझेदारी करना चाहता था इसलिए ये फैसला लिया गया।
राफेल पर क्या है नया खुलासा?
फ्रांसीसी वेबसाइट मीडियापार्ट ने राफेल डील पर नया खुलासा करते हुए कहा है कि उसने दसॉल्ट कंपनी के दस्तावेज को देखा है जिसमें कहा गया है कि राफेल डील के लिए रिलायंस के साथ संयुक्त उपक्रम 'अनिवार्य' था।
वेबसाइट ने अपनी रिपोर्ट में कहा है कि हाल ही में उसने पूर्व फ्रांसीसी राष्ट्रपति फ्रांस्वा ओलांद का इंटरव्यू भी लिया था। इसमें उन्होंने कहा था कि दसॉल्ट के लिए भारत से रिलायंस को ऑफसेट पार्टनर चुनने के अलावा उनके पास कोई दूसरा विकल्प नहीं था। इस मामले में फ्रांस सरकार की कोई भूमिका नहीं थी और रिलायंस के नाम का प्रस्ताव भारत की ओर से किया गया था।
खुलासे के बाद पीएम मोदी पर हमलावर राहुल
फ्रांसीसी मीडिया के इस नए खुलासे के बाद कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस कर प्रधानमंत्री मोदी पर हमला बोला। उन्होंने पीएम मोदी को भ्रष्ट बताया है। यह पहली बार है जब किसी विपक्षी नेता ने पीएम मोदी को भ्रष्ट कहा है।
उन्होंने कहा कि पूरा देश राफेल की बात कर रहा है, लेकिन प्रधानमंत्री मोदी इस पर एक शब्द भी नहीं बोलते हैं। यह साफ तौर पर भारत के प्रधानमंत्री के भ्रष्टाचार का मामला है, इसकी जांच होनी चाहिए। उन्होंने देश के किसानों और गरीबों के साथ विश्वासघात किया है।
फ्रांस दौरे पर हैं रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण
रक्षा मंत्री निर्मला सीतारमण इस वक्त फ्रांस के दौरे पर हैं। आज वो दसॉल्ट के प्लांट का दौरा कर सकती हैं। गुरुवार को उन्होंने अपने फ्रांसीसी समकक्ष फ्लोरेंस पार्ली के साथ भारत और फ्रांस के बीच सामरिक और रक्षा सहयोग को मजबूत करने के तौर तरीकों पर व्यापक बातचीत की। यह बातचीत वार्षिक भारत-फ्रांस रक्षा मंत्रीस्तरीय वार्ता के प्रारुप के तहत हुई, जिस पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और फ्रांसीसी राष्ट्रपति इमैनुएल मैक्रों के बीच शिखर वार्ता के दौरान सहमति बनी थी।
आधिकारिक सूत्रों ने बताया कि दोनों रक्षामंत्रियों ने परस्पर हित के विभिन्न द्विपक्षीय, क्षेत्रीय और वैश्विक मुद्दों पर प्रतिनिधिमंडल स्तर की वार्ता के बाद आपस में बातचीत की। दोनों पक्षों ने अपने सशस्त्र बलों खासकर समुद्री क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के अलावा दोनों देशों द्वारा सैन्य मंचों और हथियारों के सह-उत्पादन पर चर्चा की।
हालांकि इस वार्ता में राफेल सौदे पर बातचीत हुई या नहीं, यह फिलहाल ज्ञात नहीं है, लेकिन इसके बाद रक्षामंत्री निर्मला सीतारमण ने पेरिस में अलग से एक संवाददाता सम्मेलन किया, जिसमें उन्होंने मोदी सरकार के इस दावे को दोहराया कि उसे कोई भनक नहीं थी कि दसॉल्ट एविएशन अनिल अंबानी की अगुवाई वाले रिलायंस ग्रुप के साथ गठजोड़ करेगा।
बता दें कि मीडिया में आई कई खबरों में कहा गया है कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मेदी ने दसॉल्ट को मजबूर किया था कि वह रिलायंस को अपने साझेदार के तौर पर चुने जबकि रिलायंस के पास उड्डयन क्षेत्र में कोई अनुभव नहीं था।