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राफेल सौदा: अब फ्रांस की एनजीओ ने लगाई जांच की गुहार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Sat, 24 Nov 2018 11:06 AM IST
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राफेल लड़ाकू विमान
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फ्रांस की भ्रष्टाचार निरोधी एनजीओ ने फ्रांस के राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजक से एक शिकायत की है। इस शिकायत में उसने भारत और फ्रांस के बीच सितंबर 2016 में हुए 59,000 करोड़ रुपये के समझौते में हुए कथित भ्रष्टाचार मामले में जांच की मांग की है। शिकायत में फ्रांस सरकार और दसॉल्ट एविएशन के बीच भ्रष्टाचार के संभावित कृत्य, अनुचित फायदा पहुंचाना, पैसे या फेवर के लिए राजनीति का इस्तेमाल करना और मनी लांड्रिंग जैसे आरोप शामिल है।
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इस शिकायत को शेरपा एनजीओ ने दाखिल किया है। यह एनजीओ दावा करती है कि वह अवैध वित्तीय प्रवाह, भ्रष्टाचार, मनी लांड्रिंग, टैक्स बचाने और बेकार संपत्तियों के खिलाफ लड़ती है। यह शिकायत राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजक के दफ्तर में अक्तूबर के आखिर में दर्ज की गई है। शिकायत में उन परिस्थितियों की जांच करने की मांग की गई है जिसमें दसॉल्ट एविएशन द्वारा बनाए गए 36 लड़ाकू विमानों को फ्रांस ने 2016 में भारत को बेचा। शेरपा ने दसॉल्ट के भारतीय ऑफसेट पार्टनर के चुनने के तरीके की भी जांच की मांग की है।
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ऐसा इसलिए क्योंकि अनिल अंबानी के रिलायंस समूह को लड़ाकू विमान बनाने का कोई अनुभव नहीं है और वह कांट्रैक्ट पर हस्ताक्षर करने से 12 दिन पहले ही पंजीकृत हुई थी। शेरपा के संस्थापक विलियम बोर्डन का कहना है, 'यह सबकुठ दर्शाता है कि यह गंभीर मसला है।' उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय वित्तीय अभियोजक के कार्यालय को दी गई जानकारी के बाद इसकी जल्द से जल्द जांच करवाई जानी चाहिए। हालांकि यह साफ नहीं है कि इस मामले की जांच शुरू हुई है या नहीं।
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भारत में भी राफेल मुद्दे पर रार जारी है। केंद्र सरकार को लगातार इस मामले पर विपक्ष की आलोचनाओं का शिकार होना पड़ रहा है। विपक्ष इसे भाजपा सरकार का रक्षा घोटाला बताते हुए जांच की मांग कर रही है। वहीं उच्चतम न्यायालय में भी इस मामले को लेकर कई याचिकाएं दाखिल की गई हैं। जिसपर पिछली सुनवाई में न्यायालय ने सरकार से लड़ाकू विमान से जुड़ी जानकारियां मांगी थी। जिसके बाद सरकार ने अपना जवाब देते हुए सीलबंद लिफाफे में समझौते से जुड़ा सभी सूचना न्यायालय को सौंप दी थी।