{"_id":"5b856a9c42c7924676417711","slug":"rafale-direct-deal-between-pm-modi-and-anil-ambani-says-congress","type":"story","status":"publish","title_hn":"पीएम मोदी और अनिल अंबानी का सौदा है राफेल डील","category":{"title":"India News","title_hn":"देश","slug":"india-news"}}
पीएम मोदी और अनिल अंबानी का सौदा है राफेल डील
ब्यूरो, अमर उजाला, नई दिल्ली
Updated Tue, 28 Aug 2018 09:00 PM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
राफेल सौदे को लेकर देश भर में प्रेस कांफ्रेस कर रही कांग्रेस ने एक बार फिर सीधे तौर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर निशाना साधा। दिल्ली में कांग्रेस ने पूर्व केंद्रीय मंत्री एस.जयपाल रेड्डी ने कहा कि मेरे विचार में यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अनिल अंबानी के बीच सीधा सौदा है।
विज्ञापन
मैं जिम्मेदार तरीके से विरोध कर रहा हूं मेरे पास इसका आधार है। रेड्डी ने कहा कि पूर्व पीएम अटल बिहारी वाजपेयी के निधन के चलते सात दिनों के शोक के चलते वे इस मुद्दे को उठाना नहीं चाहते थे।
विज्ञापन
रेड्डी ने अपने आरोपों का आधार बताते हुए कहा कि विमान सौदे से दो दिन पहले विदेश सचिव ने 10 अप्रैल 2015 को स्पष्ट रूप से बताया था कि पीएम के फ्रांस दौरे के दौरान रॉफेल सौदे पर चर्चा नहीं की जाएगी।
विज्ञापन
विदेश सचिव को भी इस सौदे पर चर्चा और फैसले की जानकारी नहीं थी। मेरे आरोप का दूसरा आधार ये है कि तत्कालीन रक्षा मंत्री मनोहर परिकर इस दौरान फ्रांस में नहीं थे। सौदे के संबंध में मनोहर परिकर ने कहा था उनके शब्दों में भारत के प्रधानमंत्री और फ्रांस के राष्ट्रपति के बीच राफेल समझौते पर हस्ताक्षर किए गए हैं। उन्होंने अपनी भाषा में खुद को अलग कर लिया।
रेड्डी का कहना है कि पीएम के अलावा एक व्यक्ति अनिल अंबानी थे जिन्हें जानकारी थी कि इस अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। विमान सौदे के अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाने के 12 दिन पहले यानि 28 मार्च 2015 को अनिल अंबानी ने अपनी कंपनी पंजीकृत कराई थी।
मतलब साफ है कि अनिल अंबानी जानते थे कि 12 दिन बाद राफेल अनुबंध पर हस्ताक्षर किए जाएंगे। उन्हें पता था कि एचएएल हटा दिया जाएगा और कांट्रेक्ट प्राप्त करेंगे। जबकि विदेश सचिव ने 8 अप्रैल 2015 को उस अनुबंध से दो दिन पहले कहा कि बातचीत एचएएल और दासॉल्ट के बीच चल रही थी। इसलिए मैं कह रहा हूं कि ये नरेंद्र मोदी और अनिल अंबानी के बीच सीधा सौदा है।
रेड्डी ने कहा कि पीएम ने अपने विदेश सचिव को भी विश्वास में नहीं लिया है। हम नहीं जानते कि उन्होंने रक्षा मंत्री को विश्वास में लिया था कि नहीं। राफेल सौदा एक बड़ा घोटाला है और रक्षा खरीद प्रक्रियाओं का भी कोई पालन नहीं किया गया है। उनका कहना है कि सौदे के बाद आए पीएम के बयान में ढेरों विरोधाभास हैं तब कहा गया कि समझौते के पुराने पैरामीटर होंगे अब नए तर्क और बहाने बताए जा रहे हैं।
रेड्डी ने कहा कि सरकार ने सरकारी कंपनी एचएएल की रक्षा क्षमता का उपयोग नहीं किया। उन्होंने तंज कसा कि मेक इन इंडिया में विश्वास रखने वाले मोदी जी अब भारत में ब्रोकर्स बनाने पर विश्वास करते हैं। इस सौदे में हमारे पास देसी ब्रोकर है न कि विदेशी ब्रोकर शायद ये ही मेक इन इंडिया है।