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Raja Ravi Varma: राजा रवि वर्मा की पेंटिंग 'यशोदा और कृष्ण' ने रचा इतिहास, 167.2 करोड़ रुपये में हुई नीलामी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, मुंबई
Published by: Devesh Tripathi
Updated Thu, 02 Apr 2026 03:29 PM IST
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सार
राजा रवि वर्मा की एक प्रतिष्ठित पेंटिंग ने नीलामी में अभूतपूर्व कीमत हासिल कर भारतीय कला बाजार में नया रिकॉर्ड बनाया, जिसे एक प्रमुख उद्योगपति ने खरीदा और इसे सार्वजनिक रूप से प्रदर्शित करने की इच्छा जताई।
राजा रवि वर्मा
- फोटो : संस्कृति मंत्रालय
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विस्तार
प्रसिद्ध चित्रकार राजा रवि वर्मा की प्रतिष्ठित ऑयल पेंटिंग 'यशोदा और कृष्ण' ने नीलामी में भारतीय कला जगत का नया कीर्तिमान स्थापित किया है। यह पेंटिंग 167.2 करोड़ रुपये (करीब 18 मिलियन डॉलर) में बिकी, जो अब तक किसी भारतीय कलाकृति के लिए हासिल की गई सबसे बड़ी कीमत है।
यह ऐतिहासिक नीलामी मुंबई में सैफ्रनआर्ट की स्प्रिंग लाइव ऑक्शन के दौरान हुई, जहां कड़ी बोली के बाद इसे अरबपति उद्योगपति साइप्रस पूनावाला ने खरीदा। वह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संस्थापक भी हैं। इस बिक्री ने पिछले साल बनी रिकॉर्ड कीमत को पीछे छोड़ दिया, जब एमएफ हुसैन की एक पेंटिंग 118 करोड़ रुपये से अधिक में किरण नादर द्वारा खरीदी गई थी।
दोगुनी कीमत पर बिकी पेटिंग
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस पेंटिंग का अनुमानित मूल्य 80 से 120 करोड़ रुपये के बीच लगाया गया था, लेकिन नीलामी में यह लगभग दोगुनी कीमत पर बिकी। साइरस पूनावाला ने इस खरीद को सम्मान और जिम्मेदारी दोनों बताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय धरोहर है और इसे समय-समय पर आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
1890 के दशक में अपने करियर के चरम पर बनाई गई यह पेंटिंग राजा रवि वर्मा की श्रेष्ठ कृतियों में गिनी जाती है। इसमें यशोदा को गाय का दूध निकालते हुए दिखाया गया है, जबकि बाल कृष्ण पीछे से दूध के पात्र की ओर हाथ बढ़ाते नजर आते हैं। यह दृश्य एक साधारण घरेलू क्षण को आध्यात्मिक और भावनात्मक अनुभव में बदल देता है।
कौन थे राजा रवि वर्मा?
यह कलाकृति पहले दिल्ली के एक निजी संग्रह का हिस्सा थी। राजा रवि वर्मा का जन्म 1848 में त्रावणकोर के किलिमानूर शाही परिवार में हुआ था। उन्हें भारतीय आधुनिक कला का अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने भारतीय पौराणिक विषयों को यूरोपीय यथार्थवादी शैली में प्रस्तुत कर नई पहचान दिलाई और 1894 में लिथोग्राफिक प्रेस स्थापित कर अपने कार्यों को आम लोगों तक पहुंचाया।
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यह ऐतिहासिक नीलामी मुंबई में सैफ्रनआर्ट की स्प्रिंग लाइव ऑक्शन के दौरान हुई, जहां कड़ी बोली के बाद इसे अरबपति उद्योगपति साइप्रस पूनावाला ने खरीदा। वह सीरम इंस्टीट्यूट ऑफ इंडिया के संस्थापक भी हैं। इस बिक्री ने पिछले साल बनी रिकॉर्ड कीमत को पीछे छोड़ दिया, जब एमएफ हुसैन की एक पेंटिंग 118 करोड़ रुपये से अधिक में किरण नादर द्वारा खरीदी गई थी।
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दोगुनी कीमत पर बिकी पेटिंग
समाचार एजेंसी पीटीआई के अनुसार, इस पेंटिंग का अनुमानित मूल्य 80 से 120 करोड़ रुपये के बीच लगाया गया था, लेकिन नीलामी में यह लगभग दोगुनी कीमत पर बिकी। साइरस पूनावाला ने इस खरीद को सम्मान और जिम्मेदारी दोनों बताया। उन्होंने कहा कि यह राष्ट्रीय धरोहर है और इसे समय-समय पर आम जनता के लिए प्रदर्शित किया जाना चाहिए।
1890 के दशक में अपने करियर के चरम पर बनाई गई यह पेंटिंग राजा रवि वर्मा की श्रेष्ठ कृतियों में गिनी जाती है। इसमें यशोदा को गाय का दूध निकालते हुए दिखाया गया है, जबकि बाल कृष्ण पीछे से दूध के पात्र की ओर हाथ बढ़ाते नजर आते हैं। यह दृश्य एक साधारण घरेलू क्षण को आध्यात्मिक और भावनात्मक अनुभव में बदल देता है।
कौन थे राजा रवि वर्मा?
यह कलाकृति पहले दिल्ली के एक निजी संग्रह का हिस्सा थी। राजा रवि वर्मा का जन्म 1848 में त्रावणकोर के किलिमानूर शाही परिवार में हुआ था। उन्हें भारतीय आधुनिक कला का अग्रदूत माना जाता है। उन्होंने भारतीय पौराणिक विषयों को यूरोपीय यथार्थवादी शैली में प्रस्तुत कर नई पहचान दिलाई और 1894 में लिथोग्राफिक प्रेस स्थापित कर अपने कार्यों को आम लोगों तक पहुंचाया।
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