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TMC में बगावत: 'हृदय में काबा' गाने वालीं सायोनी से लेकर शत्रुघ्न-यूसुफ पठान तक, ममता के 19 बागी सांसद कौन?
आईएएनएस, कोलकाता
Published by: Devesh Tripathi
Updated Wed, 10 Jun 2026 07:05 PM IST
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सार
तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी के सामने अब अपनी पार्टी का वजूद बचाने की चुनौती खड़ी हो गई है। पश्चिम बंगाल में करीब 60 टीएमसी विधायकों के बगावत करने के बाद अब पार्टी के संसदीय दल में भी टूट की नींव रख दी गई है। काकोली घोष के नेतृत्व में 19 सांसदों ने पार्टी के खिलाफ बगावती सुर बुलंद कर दिए थे।
टीएमसी के बागी सांसद
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
तृणमूल कांग्रेस की सुप्रीमो ममता बनर्जी की मुश्किलें कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। पश्चिम बंगाल में विधायकों की बगावत के बाद उनके दिल्ली दौरे के बीच में ही संसदीय दल के 19 सांसदों ने भी बागी रुख अपना लिया था। न्यूज एजेंसी आईएएनएस की ओर से अब इन 19 सांसदों के नाम वाली एक सूची सामने आई है। टीएमसी सांसदों के नाम वाली इस सूची में कई बड़े नाम शामिल हैं। इनमें शत्रुघ्न सिन्हा, यूसुफ पठान, काकोली घोष के साथ ही एक चौंकाने वाला नाम सायोनी घोष का शामिल है।
टीएमसी के बागी सांसदों की इस सूची पर अभी तात्कालिक रूप से पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी अपना दिल्ली दौरा खत्म करके आज यानी बुधवार को ही वापस कोलकाता पहुंची थीं। इसी दौरान बागियों की ये सूची सामने आ गई है।
बागी सांसदों की सूची
काकोली घोष ने किया था एनडीए को समर्थन देने का एलान
काकोली घोष ने दावा किया था कि बागी सांसद टीएमसी से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा था कि टीएमसी सांसद भाजपा में भी शामिल नहीं होंगे। काकोली घोष ने कहा था कि टीएमसी सांसदों का गुट एनडीए को पार्टी के एक अलग गुट के तौर पर समर्थन देगा। बीते दिनों काकोली घोष को लोकसभा में मुख्य सचेतक पद से हटाकर कल्याण बनर्जी को यह पद दे दिया गया था।
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ममता बनर्जी के साथ बचे ये सांसद
कौन हैं शत्रुघ्न सिन्हा?
शत्रुघ्न सिन्हा की राजनीति में एंट्री उनके फिल्मी करियर के दौरान ही हुई। वे 1980 के दशक में भाजपा में शामिल हो गए थे। 1992 में उन्हें नई दिल्ली लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया। उनका पहला चुनावी मुकाबला बॉलीवुड के सुपरस्टार राजेश खन्ना से था। शत्रुघ्न अपना पहला मुकाबला करीब 25 हजार वोटों के बड़े अंतर से हार गए थे। इसके बाद 1996 से 2008 तक वे राज्यसभा के नामित सदस्य रहे। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी तक संभाली।
बाद में 2009 और 2014 में उन्होंने बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट से दो बार चुनाव जीता। इस दौरान ही कुछ मुद्दों को लेकर उनकी भाजपा से अनबन हो गई और 2019 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 2019 से 2022 तक वे कांग्रेस का हिस्सा रहे। आखिरकार 2022 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और बंगाल की आसनसोल सीट पर उपचुनाव में उन्होंने टीएमसी के टिकट पर तीन लाख वोटों से जीत दर्ज की और सांसद चुने गए।
टीएमसी के बागी सांसदों की इस सूची पर अभी तात्कालिक रूप से पार्टी की ओर से कोई प्रतिक्रिया सामने नहीं आई है। गौरतलब है कि टीएमसी सुप्रीमो ममता बनर्जी अपना दिल्ली दौरा खत्म करके आज यानी बुधवार को ही वापस कोलकाता पहुंची थीं। इसी दौरान बागियों की ये सूची सामने आ गई है।
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बागी सांसदों की सूची
- काकोली घोष (बारासात)
- जगदीश चंद्र बसुनिया (कूचबिहार)
- खलीलुर रहमान (जंगीपुर)
- यूसुफ पठान (बहरामपुर)
- अबू ताहिर खान (मुर्शिदाबाद)
- पार्थ भौमिक (बैरकपुर)
- बापी हलदार (मथुरापुर)
- सायोनी घोष (जादवपुर)
- माला रॉय (कोलकाता दक्षिण)
- मिताली बाग (आरामबाग)
- दीपक अधिकारी (घाटाल)
- कालीपद सोरेन (झाड़ग्राम)
- जून मालिया (मेदिनीपुर)
- अरूप चक्रवर्ती (बांकुड़ा)
- डॉ. शर्मिला सरकार (वर्धमान पूर्व)
- शत्रुघ्न सिन्हा (आसनसोल)
- असित कुमार माल (बोलपुर)
- शताब्दी रॉय (बीरभूम)
- रचना बनर्जी (हुगली)
काकोली घोष ने किया था एनडीए को समर्थन देने का एलान
काकोली घोष ने दावा किया था कि बागी सांसद टीएमसी से इस्तीफा नहीं देंगे। उन्होंने कहा था कि टीएमसी सांसद भाजपा में भी शामिल नहीं होंगे। काकोली घोष ने कहा था कि टीएमसी सांसदों का गुट एनडीए को पार्टी के एक अलग गुट के तौर पर समर्थन देगा। बीते दिनों काकोली घोष को लोकसभा में मुख्य सचेतक पद से हटाकर कल्याण बनर्जी को यह पद दे दिया गया था।
ममता बनर्जी के साथ बचे ये सांसद
- अभिषेक बनर्जी (डायमंड हार्बर)
- कल्याण बनर्जी (श्रीरामपुर)
- कीर्ति आजाद (बर्धमान-दुर्गापुर)
- महुआ मोइत्रा (कृष्णानगर)
- सौगात रॉय (दम-दम)
- प्रतिमा मंडल (जयनगर)
- सुदीप बंदोपाध्याय (कोलकाता उत्तर)
- प्रसून बनर्जी (हावड़ा)
- सजदा अहमद (उलूबेरिया)
कौन हैं शत्रुघ्न सिन्हा?
शत्रुघ्न सिन्हा की राजनीति में एंट्री उनके फिल्मी करियर के दौरान ही हुई। वे 1980 के दशक में भाजपा में शामिल हो गए थे। 1992 में उन्हें नई दिल्ली लोकसभा सीट से उम्मीदवार बनाया गया। उनका पहला चुनावी मुकाबला बॉलीवुड के सुपरस्टार राजेश खन्ना से था। शत्रुघ्न अपना पहला मुकाबला करीब 25 हजार वोटों के बड़े अंतर से हार गए थे। इसके बाद 1996 से 2008 तक वे राज्यसभा के नामित सदस्य रहे। प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार में उन्होंने स्वास्थ्य मंत्रालय की जिम्मेदारी तक संभाली।
बाद में 2009 और 2014 में उन्होंने बिहार की पटना साहिब लोकसभा सीट से दो बार चुनाव जीता। इस दौरान ही कुछ मुद्दों को लेकर उनकी भाजपा से अनबन हो गई और 2019 में उन्होंने भाजपा से इस्तीफा दे दिया। इसके बाद 2019 से 2022 तक वे कांग्रेस का हिस्सा रहे। आखिरकार 2022 में वे तृणमूल कांग्रेस में शामिल हो गए और बंगाल की आसनसोल सीट पर उपचुनाव में उन्होंने टीएमसी के टिकट पर तीन लाख वोटों से जीत दर्ज की और सांसद चुने गए।