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RudraM-II Missile: दुश्मन पर सटीक वार करेगा रुद्रम-2, DRDO और वायुसेना ने किया सफल परीक्षण; बढ़ी भारत की ताकत
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: हिमांशु सिंह चंदेल
Updated Tue, 02 Jun 2026 07:59 PM IST
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सार
DRDO Successful Missile Test: डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी रुद्रम-2 एयर-टू-सर्फेस मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। सुखोई-30 एमकेआई से छोड़ी गई इस मिसाइल ने तय लक्ष्य को बेहद सटीकता से निशाना बनाया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार सभी परीक्षण सफल रहे।
रुद्रम 2 का सफल परीक्षण।
- फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
भारत ने रक्षा क्षेत्र में एक और बड़ी उपलब्धि हासिल की है। रक्षा अनुसंधान एवं विकास संगठन यानी डीआरडीओ और भारतीय वायुसेना ने स्वदेशी 'रुद्रम-2' एयर-टू-सर्फेस मिसाइल का सफल परीक्षण किया है। यह परीक्षण सुखोई-30 एमकेआई लड़ाकू विमान से किया गया। रक्षा मंत्रालय के अनुसार मिसाइल ने तय लक्ष्य को बेहद सटीक तरीके से निशाना बनाया। इस सफलता को भारत की रक्षा ताकत और आत्मनिर्भरता की दिशा में बड़ा कदम माना जा रहा है।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि परीक्षण बेहद कठिन परिस्थितियों में किया गया। मिसाइल को हवा में छोड़े जाने के बाद उसने अपने सभी महत्वपूर्ण सिस्टम की क्षमता साबित की और तय लक्ष्य को सटीकता से भेदा। चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज के उपकरणों से मिले डाटा में सभी परीक्षण उद्देश्यों के सफल होने की पुष्टि हुई। इस परीक्षण के बाद रुद्रम-2 को भारतीय रक्षा प्रणाली के लिए अहम हथियार माना जा रहा है।
क्या पूरी तरह स्वदेशी है रुद्रम-2 मिसाइल?
रुद्रम-2 मिसाइल को पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है। इसे हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने तैयार किया है। इस परियोजना में डीआरडीओ की कई अन्य प्रयोगशालाओं ने भी सहयोग किया। इसमें डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी, हाई एनर्जी मटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज शामिल हैं।
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ये भी पढ़ें- Annamalai: कर्नाटक का 'सिंघम', जिसने तमिलनाडु में बढ़ाया BJP का प्रभाव; पर गठबंधन के लिए पार्टी से ही मिला
क्या भारतीय उद्योगों ने भी निभाई अहम भूमिका?
इस परियोजना में सरकारी और निजी उद्योगों की भी बड़ी भूमिका रही। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, रीजनल सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस और मिसाइल सिस्टम क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसी समेत कई संस्थाओं ने इस मिसाइल को तैयार करने और परीक्षण में मदद की। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता भारत के रक्षा उद्योग और वैज्ञानिक क्षमता की बड़ी मिसाल है।
क्या रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और सभी सहयोगी संस्थाओं को इस सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण दिखाता है कि भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक अब तेजी से मजबूत हो रही है। उन्होंने इसे उन्नत हथियार प्रणालियों में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया।
क्या भारतीय सेना की ताकत और बढ़ेगी?
कहा जा रहा है कि रुद्रम-2 जैसी आधुनिक मिसाइलें भारतीय वायुसेना की हमलावर क्षमता को और मजबूत करेंगी। यह मिसाइल दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर दूर से सटीक हमला करने में सक्षम मानी जा रही है। इससे युद्ध के समय भारतीय सेना की रणनीतिक ताकत बढ़ेगी और विदेशी हथियारों पर निर्भरता भी कम होगी।
पिछले कुछ वर्षों में भारत लगातार स्वदेशी हथियारों और रक्षा तकनीकों पर जोर दे रहा है। रुद्रम-2 का सफल परीक्षण इसी दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने और दुनिया के बड़े रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो।
रक्षा मंत्रालय ने बताया कि परीक्षण बेहद कठिन परिस्थितियों में किया गया। मिसाइल को हवा में छोड़े जाने के बाद उसने अपने सभी महत्वपूर्ण सिस्टम की क्षमता साबित की और तय लक्ष्य को सटीकता से भेदा। चांदीपुर स्थित इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज के उपकरणों से मिले डाटा में सभी परीक्षण उद्देश्यों के सफल होने की पुष्टि हुई। इस परीक्षण के बाद रुद्रम-2 को भारतीय रक्षा प्रणाली के लिए अहम हथियार माना जा रहा है।
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क्या पूरी तरह स्वदेशी है रुद्रम-2 मिसाइल?
रुद्रम-2 मिसाइल को पूरी तरह भारत में विकसित किया गया है। इसे हैदराबाद स्थित रिसर्च सेंटर इमारत ने तैयार किया है। इस परियोजना में डीआरडीओ की कई अन्य प्रयोगशालाओं ने भी सहयोग किया। इसमें डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट लेबोरेटरी, हाई एनर्जी मटेरियल्स रिसर्च लेबोरेटरी, आर्मामेंट रिसर्च एंड डेवलपमेंट एस्टैब्लिशमेंट और इंटीग्रेटेड टेस्ट रेंज शामिल हैं।
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क्या भारतीय उद्योगों ने भी निभाई अहम भूमिका?
इस परियोजना में सरकारी और निजी उद्योगों की भी बड़ी भूमिका रही। हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड, रीजनल सेंटर फॉर मिलिट्री एयरवर्थिनेस और मिसाइल सिस्टम क्वालिटी एश्योरेंस एजेंसी समेत कई संस्थाओं ने इस मिसाइल को तैयार करने और परीक्षण में मदद की। रक्षा मंत्रालय ने कहा कि यह सफलता भारत के रक्षा उद्योग और वैज्ञानिक क्षमता की बड़ी मिसाल है।
क्या रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने दी बधाई?
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने डीआरडीओ, भारतीय वायुसेना, रक्षा सार्वजनिक उपक्रमों और सभी सहयोगी संस्थाओं को इस सफलता के लिए बधाई दी। उन्होंने कहा कि यह परीक्षण दिखाता है कि भारत की स्वदेशी रक्षा तकनीक अब तेजी से मजबूत हो रही है। उन्होंने इसे उन्नत हथियार प्रणालियों में आत्मनिर्भर भारत की दिशा में बड़ी उपलब्धि बताया।
क्या भारतीय सेना की ताकत और बढ़ेगी?
कहा जा रहा है कि रुद्रम-2 जैसी आधुनिक मिसाइलें भारतीय वायुसेना की हमलावर क्षमता को और मजबूत करेंगी। यह मिसाइल दुश्मन के महत्वपूर्ण ठिकानों पर दूर से सटीक हमला करने में सक्षम मानी जा रही है। इससे युद्ध के समय भारतीय सेना की रणनीतिक ताकत बढ़ेगी और विदेशी हथियारों पर निर्भरता भी कम होगी।
पिछले कुछ वर्षों में भारत लगातार स्वदेशी हथियारों और रक्षा तकनीकों पर जोर दे रहा है। रुद्रम-2 का सफल परीक्षण इसी दिशा में अहम उपलब्धि माना जा रहा है। सरकार का लक्ष्य है कि भारत रक्षा क्षेत्र में आत्मनिर्भर बने और दुनिया के बड़े रक्षा निर्यातक देशों में शामिल हो।