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रूस से भारत तक सीधी ट्रेन चलाने की योजना: पाक-तुर्कमेनिस्तान रूट का प्रस्ताव, क्या है मॉस्को की मंशा?
Sun, 09 Aug 2026 08:34 PM IST
राकेश कुमार
आईएएनएस, नई दिल्ली।
आईएएनएस, नई दिल्ली।
Published by: राकेश कुमार
Updated Sun, 09 Aug 2026 08:34 PM IST
सार
रूस भारतीय महासागर और भारत तक पहुंचने के लिए नए रेल मार्ग की संभावना तलाश रहा है। प्रस्तावित रास्ता तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान से होकर भारत पहुंच सकता है। हालांकि, अभी यह विचाराधीन है और इसके लिए कई देशों की सहमति और बड़े बुनियादी ढांचे की जरूरत होगी।
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भारत रूस संबंध
- फोटो : @अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
रूस अब भारतीय महासागर तक पहुंचने के लिए रेल मार्ग तलाश रहा है। रूस के उप प्रधानमंत्री मरात खुसनुलिन ने कहा है कि देश को भारतीय महासागर तक रेल कनेक्शन विकसित करने की संभावना पर विचार करना चाहिए। उनका कहना है कि इससे रूस की रणनीतिक रूप से संवेदनशील समुद्री मार्गों पर निर्भरता कम हो सकती है।
रूसी समाचार एजेंसी तास को दिए इंटरव्यू में खुसनुलिन ने कहा कि बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरूरत है। उनके मुताबिक, रूस ऐसे किसी भी रास्ते पर विचार करेगा, जिससे भारत तक पहुंच बनाई जा सके।
क्या है रूस से भारत तक रेल पहुंचाने की योजना?
खुसनुलिन के मुताबिक, एक संभावित रेल कॉरिडोर रूस से निकलकर तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत तक पहुंच सकता है। उन्होंने साफ कहा कि भारत तक पहुंच देने वाला कोई भी विकल्प स्वीकार्य हो सकता है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी शुरुआती स्तर पर है। फिलहाल इस रेल मार्ग के निर्माण की कोई पुष्टि नहीं हुई है। न ही यात्री ट्रेन सेवा, टिकट की कीमत या इसे शुरू करने की कोई तारीख घोषित की गई है।
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रूस के इस प्रस्ताव के पीछे सबसे बड़ी वजह महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से जुड़े जोखिम हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की करीब एक-पांचवां हिस्सा ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। वहीं, बोस्फोरस जलडमरूमध्य काला सागर को मरमारा सागर से जोड़ता है। तुर्किये के नियंत्रण वाले इस जलमार्ग को लेकर भी रूस वैकल्पिक रास्तों की जरूरत महसूस कर रहा है।
यह भी पढ़ें: सवालों के घेरे में एअर इंडिया टर्बुलेंस: सरकार को डोप टेस्ट की अंतिम रिपोर्ट का इंतजार, AAIB कर रहा जांच
क्या यह रास्ता भारत-रूस संबंधों को नई दिशा दे सकता है?
अगर यह प्रस्ताव भविष्य में वास्तविक रेल कॉरिडोर का रूप लेता है, तो भारत और रूस के बीच जमीनी संपर्क का एक नया विकल्प बन सकता है। रूस को भारतीय महासागर तक सामान पहुंचाने के लिए समुद्री मार्गों के अलावा एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। भारत के लिए भी इससे रूस और मध्य एशिया के देशों के साथ कनेक्टिविटी बढ़ने की संभावना होगी। लेकिन रास्ते में कई देश शामिल हैं। इसलिए बुनियादी ढांचे के साथ ट्रांजिट, सुरक्षा और सीमा-पार आवाजाही को लेकर व्यापक समन्वय जरूरी होगा। हालांकि, अभी तक भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया भी नहीं आई है। वैसे पीएम मोदी और पुतिन के बीच भी पिछले कुछ वर्षों में कई बार मुलाकात हो चुकी है, लेकिन कभी भी ऐसी योजना का जिक्र नहीं हुआ।
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रूसी समाचार एजेंसी तास को दिए इंटरव्यू में खुसनुलिन ने कहा कि बोस्फोरस और होर्मुज जलडमरूमध्य से जुड़े जोखिमों को देखते हुए वैकल्पिक परिवहन मार्गों की जरूरत है। उनके मुताबिक, रूस ऐसे किसी भी रास्ते पर विचार करेगा, जिससे भारत तक पहुंच बनाई जा सके।
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क्या है रूस से भारत तक रेल पहुंचाने की योजना?
खुसनुलिन के मुताबिक, एक संभावित रेल कॉरिडोर रूस से निकलकर तुर्कमेनिस्तान, ईरान, अफगानिस्तान और पाकिस्तान होते हुए भारत तक पहुंच सकता है। उन्होंने साफ कहा कि भारत तक पहुंच देने वाला कोई भी विकल्प स्वीकार्य हो सकता है। हालांकि, यह प्रस्ताव अभी शुरुआती स्तर पर है। फिलहाल इस रेल मार्ग के निर्माण की कोई पुष्टि नहीं हुई है। न ही यात्री ट्रेन सेवा, टिकट की कीमत या इसे शुरू करने की कोई तारीख घोषित की गई है।
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रूस के इस प्रस्ताव के पीछे सबसे बड़ी वजह महत्वपूर्ण समुद्री मार्गों से जुड़े जोखिम हैं। होर्मुज जलडमरूमध्य फारस की खाड़ी और ओमान की खाड़ी को जोड़ता है। सामान्य परिस्थितियों में दुनिया की करीब एक-पांचवां हिस्सा ऊर्जा आपूर्ति इसी रास्ते से गुजरती है। वहीं, बोस्फोरस जलडमरूमध्य काला सागर को मरमारा सागर से जोड़ता है। तुर्किये के नियंत्रण वाले इस जलमार्ग को लेकर भी रूस वैकल्पिक रास्तों की जरूरत महसूस कर रहा है।
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क्या यह रास्ता भारत-रूस संबंधों को नई दिशा दे सकता है?
अगर यह प्रस्ताव भविष्य में वास्तविक रेल कॉरिडोर का रूप लेता है, तो भारत और रूस के बीच जमीनी संपर्क का एक नया विकल्प बन सकता है। रूस को भारतीय महासागर तक सामान पहुंचाने के लिए समुद्री मार्गों के अलावा एक वैकल्पिक रास्ता मिल सकता है। भारत के लिए भी इससे रूस और मध्य एशिया के देशों के साथ कनेक्टिविटी बढ़ने की संभावना होगी। लेकिन रास्ते में कई देश शामिल हैं। इसलिए बुनियादी ढांचे के साथ ट्रांजिट, सुरक्षा और सीमा-पार आवाजाही को लेकर व्यापक समन्वय जरूरी होगा। हालांकि, अभी तक भारत की ओर से कोई प्रतिक्रिया भी नहीं आई है। वैसे पीएम मोदी और पुतिन के बीच भी पिछले कुछ वर्षों में कई बार मुलाकात हो चुकी है, लेकिन कभी भी ऐसी योजना का जिक्र नहीं हुआ।