India-GCC Ties: जयशंकर और जीसीसी के महासचिव की मुलाकात, FTA पर बातचीत; व्यापार और ऊर्जा सहयोग को मिलेगा नया बल
विदेश मंत्री एस जयशंकर ने जीसीसी के महासचिव जसीम मोहम्मद अलबुदैवी से मुलाकात कर ऊर्जा, व्यापार और निवेश बढ़ाने पर चर्चा की। इस दौरान भारत-जीसीसी के बीच FTA वार्ता औपचारिक रूप से शुरू हुई, जिससे खाड़ी देशों के साथ आर्थिक साझेदारी को नई ऊंचाई मिलने की उम्मीद है।
विस्तार
भारत के विदेश मंत्री एस जयशंकर ने मंगलवार को राष्ट्रीय राजधानी नई दिल्ली में गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) के महासचिव जसीम मोहम्मद अलबुदैवी से मुलाकात की। इस दौरान दोनों नेताओं ने ऊर्जा, व्यापार, निवेश और अन्य क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की। इस बात की जानकारी जयशंकर ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर दी। गल्फ कोऑपरेशन काउंसिल (जीसीसी) एक महत्वपूर्ण क्षेत्रीय संगठन है, जिसमें संयुक्त अरब अमीरात, बहरीन, सऊदी अरब, ओमान, कतर और कुवैत शामिल हैं।
इस बैठक के दौरान भारत और जीसीसी के बीच मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) पर आधिकारिक रूप से बातचीत शुरू करने के लिए एक संयुक्त दस्तावेज पर हस्ताक्षर भी किए गए। विदेश मंत्री जयशंकर ने कहा कि भारत और जीसीसी संयुक्त कार्ययोजना हमारे रणनीतिक संवाद के तहत व्यापार, निवेश, ऊर्जा, कृषि, सुरक्षा और लोगों के बीच संबंधों को मजबूत कर रही है। उन्होंने भरोसा जताया कि प्रस्तावित एफटीए दोनों पक्षों की साझेदारी को नई ऊंचाई देगा।
Pleased to meet H.E. Jasem Mohamed AlBudaiwi, @GCCSG, today in New Delhi.
The India–GCC Joint Action Plan, anchored in our Strategic Dialogue, is advancing cooperation across trade and investment, energy and agriculture, security, and people-to-people ties.
Expressed confidence… pic.twitter.com/mk78Aem8Fv— Dr. S. Jaishankar (@DrSJaishankar) February 24, 2026
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भारत के लिए जीसीसी अहम, कैसे?
बता दें कि भारत के लिए जीसीसी देश बेहद अहम हैं। साल 2024-25 में भारत और जीसीसी के बीच कुल व्यापार लगभग 178.56 अरब डॉलर रहा, जो भारत के कुल वैश्विक व्यापार का करीब 15.42 प्रतिशत है। पिछले पांच वर्षों में भारत और जीसीसी के बीच व्यापार लगातार बढ़ा है। इस दौरान औसतन 15.3 प्रतिशत सालाना वृद्धि दर्ज की गई है।
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दोनों पक्षों के बीच FTA से क्या होगा?
दूसरी ओर विशेषज्ञों का मानना है कि मुक्त व्यापार समझौते (एफटीए) लागू होने से तेल और गैस जैसे ऊर्जा क्षेत्रों के साथ-साथ निवेश, कृषि और अन्य क्षेत्रों में भी व्यापार के नए अवसर खुलेंगे। इससे भारत और खाड़ी देशों के बीच आर्थिक संबंध और मजबूत होंगे।
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