Samwad 2026: 'भारत अब नेतृत्व करने की स्थिति में', अमर उजाला संवाद में जेपी नड्डा ने गिनाए 12 साल के बदलाव
अमर उजाला संवाद उत्तराखंड कार्यक्रम में केंद्रीय मंत्री जेपी नड्डा ने कहा कि पिछले 10-13 वर्षों में देश के राजनीतिक और सामाजिक विमर्श में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि पहले आम लोगों ने मान लिया था कि देश में कुछ नहीं बदल सकता, लेकिन अब लोगों में आत्मविश्वास पैदा हुआ है। नड्डा के मुताबिक, आज देश का जनमानस यह सोचता है कि हम कर सकते हैं और हम करेंगे, जो नए भारत की बदलती मानसिकता को दर्शाता है। आइए, विस्तार से जानते है जेपी नड्डा ने क्या कुछ कहा...
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विस्तार
जेपी नड्डा ने कहा कि 12-13 साल पहले देश का आम आदमी परिस्थितियों से समझौता कर चुका था। लोगों को लगता था कि देश की व्यवस्था नहीं बदलेगी और जो हो रहा है, वही चलता रहेगा। लेकिन बीते एक दशक में राजनीतिक सोच बदली है। अब लोगों में आत्मविश्वास बढ़ा है और देश विकसित भारत के लक्ष्य की ओर तेजी से बढ़ रहा है। उन्होंने कहा कि 2047 तक विकसित भारत बनाना अब देश का साझा लक्ष्य बन चुका है। उन्होंने यह भी बताया कि नेशनल फैमिली हेल्थ सर्वे बताता है कि हमारी संस्थागत प्रसव दर 79 फीसदी से बढ़कर 90.6 फीसदी पहुंच गई है। ये कोई छोटी घटना नहीं है।
क्या बोले नड्डा, कैसे बदला राजनीतिक विमर्श?
नड्डा ने कहा कि पहले सरकारें अक्सर किसी एक क्षेत्र, जाति या परिवार तक सीमित होकर काम करती थीं। लोग यह मानते थे कि जिस क्षेत्र का मुख्यमंत्री होगा, विकास भी उसी क्षेत्र तक सीमित रहेगा। लेकिन अब राजनीति में बड़ा बदलाव आया है। उन्होंने कहा कि अब सरकार सबका साथ, सबका विकास के मंत्र के साथ काम कर रही है। नड्डा ने कहा कि आज भारत वैश्विक मंच पर नेतृत्व करने की स्थिति में पहुंच चुका है और यह बदलाव देश के आत्मविश्वास का परिणाम है।
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विकसित भारत को लेकर क्या है सरकार का विजन?
केंद्रीय मंत्री ने कहा कि देश के सामने अब एक साझा लक्ष्य है कि वर्ष 2047 तक भारत को विकसित राष्ट्र बनाया जाए। उन्होंने कहा कि समाज के हर वर्ग के मन में विकसित भारत का सपना है। नड्डा ने कहा कि यदि ऐसे संवादों से नए विचार निकलते हैं और देश के विकास की दिशा तय होती है, तो यही इन आयोजनों की सबसे बड़ी सफलता होगी।
स्वास्थ्य क्षेत्र में क्या बदलाव गिनाए?
जेपी नड्डा ने स्वास्थ्य क्षेत्र में हुए बदलावों का भी उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि पहले स्वास्थ्य व्यवस्था का पूरा फोकस बीमारी के इलाज पर होता था, लेकिन 2017 के बाद सरकार ने स्वास्थ्य नीति के मूल ढांचे में बदलाव किया। अब सरकार इलाज के साथ-साथ बीमारी की रोकथाम पर भी जोर दे रही है। उन्होंने कहा कि आयुष्मान आरोग्य मंदिरों की स्थापना से लोगों को प्राथमिक स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं मिल रही हैं। पहले लोग सीधे AIIMS की ओर भागते थे, लेकिन अब उन्हें स्थानीय स्तर पर ही सही मार्गदर्शन मिल रहा है।
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मेंटल हेल्थ को लेकर क्या बोले नड्डा?
नड्डा ने कहा कि लंबे समय तक मानसिक स्वास्थ्य को नजरअंदाज किया गया। उन्होंने कहा कि लोग मानसिक बीमारी को स्वीकार करने से बचते हैं और कई बार मरीज खुद भी इसे बीमारी नहीं मानता। इस चुनौती से निपटने के लिए सरकार ने 'टेलीमानस' पहल शुरू की है। इसके तहत टोल फ्री नंबर के माध्यम से मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं पर मुफ्त परामर्श उपलब्ध कराया जा रहा है। उन्होंने कहा कि मानसिक स्वास्थ्य को लेकर जागरूकता बढ़ाना समय की जरूरत है।
अमर उजाला को लेकर क्या कहा?
केंद्रीय मंत्री ने अमर उजाला की सराहना करते हुए कहा कि यह केवल एक अखबार या प्रकाशन नहीं है, बल्कि समाज को दिशा देने वाला एक सशक्त माध्यम है। उन्होंने कहा कि अमर उजाला लगातार समाज में हो रही घटनाओं, उनके प्रभाव और भविष्य की दिशा को लेकर लोगों को जागरूक करने का काम कर रहा है। नड्डा ने इस तरह के संवाद मंचों को लोकतंत्र और समाज के लिए बेहद महत्वपूर्ण बताया।