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पश्चिम एशिया संकट: सीजफायर के बाद सऊदी और ईरान के विदेश मंत्रियों की पहली बातचीत, क्या खाड़ी में घटेगा तनाव?

न्यूज डेस्क, अमर उजाला, तेहरान Published by: राकेश कुमार Updated Thu, 09 Apr 2026 05:19 PM IST
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सार

पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता से पहले सऊदी और ईरान के विदेश मंत्रियों ने फोन पर चर्चा की है। कभी एक-दूसरे पर मिसाइलें दागने वाले ये देश अब लेबनान और इस्राइल संकट के बीच क्षेत्रीय स्थिरता के लिए एकजुट होते दिख रहे हैं। ईरान का यह कदम शांति वार्ता से पहले अपनी कूटनीतिक स्थिति मजबूत करने की एक सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है।

saudi iran foreign ministers talk before peace summit middle east tensions
अब्बास अराघची, ईरान के विदेश मंत्री - फोटो : ANI
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विस्तार

पश्चिम एशिया से एक ऐसी खबर आई है, जो पूरी दुनिया को हैरान भी कर रही है और राहत भी दे रही है। ईरान, इस्राइल और अमेरिका के बीच पाकिस्तान में होने वाली निर्णायक शांति वार्ता से ठीक पहले सऊदी अरब और तेहरान के बीच नजदीकियां बढ़ती दिख रही हैं। यह इस बात का संकेत हैं कि खाड़ी में अब बुलेट नहीं, बल्कि बातचीत का दौर शुरू होने वाला है।
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सऊदी और ईरान के विदेश मंत्रियों ने की बातचीत
खबर है कि सऊदी अरब के विदेश मंत्री प्रिंस फैसल बिन फरहान और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अराघची के बीच टेलीफोन पर एक लंबी बातचीत हुई है। दोनों नेताओं ने न केवल खाड़ी में तनाव घटाने पर चर्चा की, बल्कि क्षेत्रीय स्थिरता बहाल करने पर भी जोर दिया। पश्चिम एशिया में तनाव के बाद यह पहली बार है जब दोनों देशों के विदेश मंत्रियों के बीच बातचीत हुई है। यह बातचीत ऐसे समय में हुई है जब लेबनान पर इस्राइली हमलों ने कोहराम मचा रखा है। वहीं, जवाब में ईरान ने होर्मुज की घेराबंदी कर वैश्विक व्यापार को खतरे में डाल दिया है। 
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जख्म पुराने हैं, पर मरहम की तलाश जरूरी
इस बातचीत की गहराई को समझने के लिए थोड़ा पीछे मुड़कर देखना होगा। वर्षों से ईरान और सऊदी अरब के बीच तलवारें खिंची हुई हैं। अमेरिकी सैन्य कार्रवाई के बाद ईरान ने सऊदी अरब, कतर और यूएई जैसे देशों को सीधे तौर पर निशाना बनाया है। सऊदी के तेल ठिकानों पर भी ईरान ने हमले किए। लेकिन, इस बीच ईरान को समझ आ गया है कि उसे अपने पड़ोसियों के साथ तालमेल बिठाना ही होगा। कूटनीतिक जानकारों का मानना है कि ईरान अब शांति वार्ता से पहले इन क्षेत्रीय शक्तियों के साथ मिलकर एक 'सुरक्षा कवच' तैयार कर रहा है, जिससे अमेरिका और इस्राइल पर कूटनीतिक दबाव बनाया जा सके।

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पाकिस्तान में होने वाली शांति वार्ता पर टिकी निगाहें
पाकिस्तान में होने वाली आगामी शांति वार्ता को गेम चेंजर माना जा रहा है। यदि सऊदी और ईरान एक साझा स्टैंड पर सहमत हो जाते हैं, तो पश्चिम एशिया में युद्धविराम की संभावनाएं प्रबल हो जाएंगी। हालांकि, इस बीच इस्राइली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू ने साफ कर दिया है कि हिजबुल्लाह के खिलाफ उनके हमले रुकने वाले नहीं हैं। उन्होंने कहा कि इस्राइली सेना पूरी ताकत और सटीक रणनीति के साथ हिजबुल्लाह को निशाना बना रही है। जब तक उत्तरी इस्राइल के निवासी अपने घरों में सुरक्षित वापस नहीं लौट जाते, तब तक हिजबुल्लाह के ठिकानों पर जहां भी जरूरी होगा, हमला जारी रहेगा। नेतन्याहू के बयान ने पश्चिम एशिया में एक बार फिर से तनाव बढ़ा दिया है। 

हालांकि, चुनौती अभी भी बड़ी है। क्या बरसों की नफरत और हमलों के जख्म एक फोन कॉल से भर जाएंगे? यह तो वक्त ही बताएगा, लेकिन फिलहाल रियाद और तेहरान के बीच की यह बातचीत सकारात्मक लग रही है। 


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