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छह नावों से बचाईं 1000 से ज्यादा जिंदगियां: असम में दिन-रात चला राहत अभियान, पढ़ें इंसानियत की बेजोड़ दास्तां

Sun, 02 Aug 2026 06:17 PM IST
Pavan एएनआई, शिवसागर
एएनआई, शिवसागर Published by: Pavan Updated Sun, 02 Aug 2026 06:17 PM IST
सार

असम के शिवसागर जिले में बाढ़ के दौरान ग्रामीणों ने सिर्फ छह देसी नावों से पांच गांवों के 1000 से ज्यादा लोगों को सुरक्षित बचाया। इस बचाव दल ने अपनी जान जोखिम में डालकर दिन-रात राहत अभियान चलाया। राज्य में बाढ़ से अब तक 1.92 लाख लोग प्रभावित और 82 लोगों की मौत हो चुकी है। पढ़ें, कैसे हजारों को लोग को त्रासदी से बचाया गया...

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'Saving people more important than our lives': Sivasagar locals rescued over 1000 people with six boats, Assam
असम में बाढ़ की त्रासदी के दौरान देवदूत बना स्थानीय समूह - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

असम में आई भीषण बाढ़ के दौरान शिवसागर जिले के कुछ ग्रामीणों ने अपनी जान जोखिम में डालकर इंसानियत की मिसाल पेश की। सिर्फ छह देसी नावों की मदद से इन ग्रामीणों ने पांच गांवों के 1,000 से अधिक लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया। बचाव अभियान में शामिल लोगों का कहना है कि उस समय उनके लिए अपनी जान से ज्यादा दूसरों की जान बचाना जरूरी था।
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कुछ ही घंटों में बाढ़ ने मचाई तबाही
19 जुलाई की सुबह शिवसागर जिले के नेपाली खूटी इलाके में अचानक पानी तेजी से बढ़ने लगा। देखते ही देखते बाढ़ का पानी घरों में घुस गया। कई लोगों को अपनी जान बचाने के लिए घरों की छतों, मचान और पेड़ों पर शरण लेनी पड़ी। शिवसागर इस साल असम के सबसे ज्यादा प्रभावित जिलों में शामिल रहा, जहां बड़ी संख्या में घर और दुकानें बाढ़ में क्षतिग्रस्त हो गईं।
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छह नावें बनीं हजारों लोगों की उम्मीद
बचाव अभियान में शामिल चौहान चौधरी ने बताया कि पानी इतनी तेजी से बढ़ा कि लोगों को संभलने का मौका ही नहीं मिला। उन्होंने कहा कि उनके पास कुल छह देसी नावें थीं। इन्हीं नावों से उन्होंने उन लोगों को निकाला जिनके घर बह गए थे या जो बाढ़ में फंस गए थे। इन नावों के जरिए पांच गांवों के एक हजार से ज्यादा लोगों को सुरक्षित जगह पहुंचाया गया।

पहले परिवार को बचाया, फिर लौटे दूसरों की मदद के लिए
एक अन्य ग्रामीण कन्हैया चौधरी ने बताया कि पहले उन्होंने अपने परिवार को सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया। इसके बाद जब वे घर का सामान लेने लौटे तो लगातार फोन आने लगे कि कई लोग बाढ़ में फंसे हुए हैं। इसके बाद उन्होंने सामान की चिंता छोड़ दी और लोगों को बचाने में जुट गए।

बिना खाना-पानी के देर रात तक चलता रहा अभियान
राजकुमार राजबीर ने बताया कि उनकी टीम रात करीब 1 बजे तक लगातार लोगों को बचाने का काम करती रही। इस दौरान उन्हें खाने-पीने का भी समय नहीं मिला। हालांकि, रास्ते में लोगों ने उन्हें थोड़ा पानी दिया, जिसके बाद वे फिर बचाव अभियान में जुट गए। अगले दिन सुबह भी उन्होंने फंसे लोगों को निकालने का काम जारी रखा।

'जान चली जाती तो भी मंजूर था'
वहीं, बचाव दल के सदस्य मोहन चौधरी ने कहा कि उन्हें पता था कि इस दौरान उनकी जान भी जा सकती है, लेकिन उस समय सबसे जरूरी काम लोगों की जान बचाना था। वहीं मिथु चौधरी ने बताया कि 19 जुलाई की सुबह चार बजे पानी बढ़ना शुरू हुआ और दोपहर तक उनके घर में भी पानी भर गया। उन्होंने पहले अपने परिवार और गांव के लोगों को सुरक्षित निकाला, फिर दूसरे गांवों से मदद की कॉल आने लगीं और वे बचाव अभियान में जुट गए।


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असम में बाढ़ से लाखों लोग प्रभावित
31 जुलाई तक की आपदा रिपोर्ट के अनुसार, असम के पांच जिलों में 1.92 लाख से अधिक लोग बाढ़ से प्रभावित हुए हैं। वहीं 1 अगस्त तक असम राज्य आपदा प्रबंधन प्राधिकरण (एएसडीएमए) के अनुसार, राज्य में बाढ़ से 82 लोगों की मौत हो चुकी है।

राहत कार्यों में कई संस्थाएं आगे आईं
असम में बाढ़ प्रभावित लोगों की मदद के लिए कई संस्थाएं भी आगे आई हैं। मुख्यमंत्री हिमंत बिस्व सरमा ने रिलायंस फाउंडेशन की सराहना करते हुए बताया कि संस्था ने मुख्यमंत्री राहत कोष में 21 करोड़ रुपये का योगदान दिया है, जिससे राहत और पुनर्वास कार्यों को गति मिलेगी।
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